“वैश्विक संकट की चुनौतियां और डायस्पोरा”

दिनांक : 10 मई 2026 (रविवार), विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार के साप्ताहिक रविवार कार्यक्रम के अंतर्गत “वैश्विक संकट की चुनौतियां और डायस्पोरा” विषय पर एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश से साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों एवं प्रवासी भारतीयों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन श्री सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित कार्यक्रम अध्यक्ष शिवाकांत शर्मा (पूर्व पत्रकार, बी.बी.सी. लंदन), मुख्य अतिथि विनोदकुमार (राजदूत), मुख्य वक्ता प्रोफेसर अजय दुबे (लेखक), सानिध्यकर्ता अनिल शर्माजोशी (अध्यक्ष, वैश्विक हिंदी परिवार) तथा वक्ताओं में शैलजा सक्सेना (रचनाकार, कनाडा), सुश्री शालिनी वर्मा (लेखिका एवं संपादक, दोहा-कतर) और डॉ. रघुवंश सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) सहित समस्त प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिवाकांत शर्मा ने कहा कि आज सबसे अधिक प्रवासी भारतीय अमेरिका एवं खाड़ी देशों में निवास कर रहे हैं। उन्होंने प्रवासियों के संघर्ष, वैश्वीकरण तथा देश के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, और  चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण वैश्वीकरण की अवधारणा पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। विश्व की नियमबद्ध व्यवस्था कमजोर होती दिखाई दे रही है तथा कुछ असामाजिक गतिविधियों के कारण मानवता प्रभावित हो रही है, तथा यदि प्रवासी भारतीय एक-दूसरे के सहयोग में आगे आएं तो संकट की परिस्थितियों का समाधान संभव है, और सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक सहभागिता को आवश्यक बताया। मुख्य अतिथि विनोद कुमार ने भारतीय विदेश नीति की चर्चा करते हुए शांति, समानता एवं सामंजस्य को भारत की प्राथमिकता बताया। उन्होंने पश्चिम एशिया के दीर्घकालीन संकटों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, और उन भारत और विभिन्न देशों के मध्य संतुलित संबंधों की सराहना की तथा वैश्वीकरण, रोजगार संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं पर भी अपने विचार साझा किए। मुख्य वक्ता प्रोफेसर अजय दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के अनेक देश दोहरी नागरिकता की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, किंतु बदलती वैश्विक परिस्थितियों के प्रति सजग रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भारतीय डायस्पोरा को और अधिक संगठित एवं सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, और विकासशील देशों में भारतीय समुदाय की भूमिका, मीडिया एवं इंटेलिजेंस नेटवर्क के महत्व तथा वैश्विक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रवासी भारतीयों की सक्रिय भागीदारी पर विचार व्यक्त किए। सानिध्य वक्तव्य में अनिल शर्मा जोशी ने वैश्विक संकटों एवं डायस्पोरा की चुनौतियों के पारस्परिक संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने नैतिक शक्ति के आधार पर विश्व व्यवस्था को प्रभावित किया, जबकि यूरोप ने आर्थिक शक्ति के रूप में स्वयं को स्थापित किया, और कहा कि भारतीय डायस्पोरा ने विश्व के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान तथा बौद्धिक क्षमता के माध्यम से विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

वक्ता शैलजा सक्सेना ने मातृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए वैश्विक संकटों के कारण आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने कनाडा की राजनीतिक परिस्थितियों तथा बदलती सरकारों के कारण भारतीय डायस्पोरा पर पड़ने वाले प्रभावों एवं रोजगार संबंधी चुनौतियों पर अपने विचार रखे। सुश्री शालिनी वर्मा ने युद्ध की भयावहता का वर्णन करते हुए कहा कि युद्ध का प्रभाव केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यापार, राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि युद्ध की आशंका मात्र से ही समाज में भय और अशांति का वातावरण बन जाता है। वरिष्ठ पत्रकार डॉ.रघुवंश सिन्हा ने अपने 25 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के आधार पर वैश्विक चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय विश्वभर में राजनीति, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार एवं अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। साथ ही उन्होंने सुरक्षा, सांस्कृतिक प्रभाव एवं आर्थिक संकट से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन श्री स्वरांगी सानेद्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय वैश्विक हिंदी परिवार के लिए परिवार के समान हैं और उनका सहयोग एवं सहभागिता सदैव प्रेरणास्पद रहेगा।

रिपोर्ट :— अजय शर्मा

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