अरुणाचल में देवनागरी लिपि का प्रसार

रुणाचल प्रदेश के ‘तानी’ समुदाय की भाषाओं निशि, आदि, गालो, आपतानी एवं तागिन के लिए देवनागरी लिपि अपनाए जाने के संबंध में ६-८ मई २०२६ तक कार्यशाला का आयोजन केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षणिक संस्थान नियामक आयोग के संयुक्त तत्वावधान में ईटानगर में किया गया। इसमें केंद्रीय हिंदी निदेशालय की तरफ से निदेशक श्री हितेंद्र मिश्र, उपनिदेशक श्री दीपक पांडेय, सी-डैक के श्री सुधीर मिश्र के अतिरिक्त विशेषज्ञ के रूप में जबलपुर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर त्रिभुवननाथ शुक्ल एवं मैंने भाग लिया।

तानी की कुछ भाषाओं के लिए रोमन लिपि का प्रयोग कुछ समय से किया जाने लगा है। उन भाषाओं के प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम में पॉवरपॉइंट प्रस्तुतियांँ देकर रोमन में लिखने के उपायों और उसकी मुश्किलों के बारे में बताया। देवनागरी लिपि का प्रयोग निश्चय ही उनके लिए रोमन की अपेक्षा बहुत सुविधाजनक होगा। कुछ विशिष्ट ध्वनियाँ, जो हिंदी नेपाली मराठी आदि में नहीं हैं, उनको व्यक्त करने के लिए नागरी लिपि में कुछ अतिरिक्त चिह्न अपनाए जा सकते हैं। मैंने परिवर्धित देवनागरी में कश्मीरी भाषा हेतु इसी तरह की एक समानान्तर व्यवस्था देखी और उसको अपनाने की संस्तुति की।

कार्यक्रम का उद्घाटन अरुणाचल प्रदेश सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा जबकि समापन सरकार के शिक्षा सलाहकार द्वारा हुआ। अरुणाचल के ‘दोनी पोलो कल्चरल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट’ के अध्यक्ष श्री काटुंग वागे एवं सचिव डॉ० जोरम बेगी की प्रमुख भूमिका रही। के०हि०नि० द्वारा उनके प्रयासों में यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

रिपोर्ट :— बरुन कुमार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate This Website »