वात्सल्य वार्षिकोत्सव : डॉ. कविता मल्होत्रा – “भारत भाग्य विधाता” तथा “संस्कारों की उड़ान” कृति का लोकार्पण एवं सम्मान समारोह सम्पन्न

दिनांक 17 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित बंग भवन के मुक्तधारा सभागार में वात्सल्य वार्षिकोत्सव के अवसर पर डॉ. कविता मल्होत्रा की दो नवीनतम कृतियों “भारत भाग्य विधाता” एवं “संस्कारों की उड़ान” के लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लक्ष्मीशंकर वाजपेयी उपस्थित रहे। वरिष्ठ कवयित्री ममता किरण, डॉ. सविता चड्ढा, डॉ. सुधाकर पाठक, ऋषि कुमार शर्मा, ओमप्रकाश प्रजापति, कुमार सुबोध तथा डॉ. शंभू पंवार सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार एवं विद्वान मंचासीन रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षाविद् अर्चना त्यागी ने प्रभावशाली शैली में किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कविता मल्होत्रा के दत्तक पुत्र प्रणव मेहरा द्वारा वात्सल्य संस्था की वार्षिक गतिविधियों पर आधारित सारगर्भित प्रस्तुति से हुआ। इसके पश्चात वात्सल्य संस्था के बाल एवं तरुण सदस्यों ने ‘गणेश वंदना’ तथा ‘माटी की पुकार’, ‘संस्कारों की उड़ान’, ‘प्रॉब्लम चाइल्ड’, ‘गुस्ताख़ लड़का’ और ‘हर चीज़ पर अश्कों से लिखा है तुम्हारा नाम’ जैसी सामाजिक सरोकारों से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों की अभिव्यक्तियों और संदेशप्रधान प्रस्तुतियों ने सभागार में उपस्थित जनसमुदाय की भरपूर सराहना अर्जित की। प्रथम चरण का समापन वात्सल्य परिवार द्वारा यशपाल मल्होत्रा एवं डॉ. कविता मल्होत्रा को समर्पित भावपूर्ण सामूहिक प्रस्तुति के साथ हुआ।

द्वितीय चरण में दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात सभी अतिथियों का माल्यार्पण, शाल एवं प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मान किया गया तथा डॉ. कविता मल्होत्रा की दोनों पुस्तकों का विधिवत लोकार्पण सम्पन्न हुआ। तृतीय चरण में वक्ताओं ने डॉ. कविता मल्होत्रा के साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक योगदान की सराहना की। डॉ. शंभू पंवार ने संस्था द्वारा सामाजिक जागरूकता फैलाने के प्रयासों की प्रशंसा की, जबकि कुमार सुबोध ने दोनों पुस्तकों को समाजोपयोगी और प्रेरणादायी बताया। डॉ. सुधाकर पाठक ने संस्था के उज्ज्वल भविष्य पर विश्वास व्यक्त किया तथा डॉ. सविता चड्ढा ने डॉ. कविता मल्होत्रा की संवेदनशील सामाजिक प्रतिबद्धता को अनुकरणीय बताया। अपने उद्बोधन में लक्ष्मीशंकर वाजपेयी ने युवा पीढ़ी को कर्मठता एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि अपनाने का संदेश दिया। वहीं अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. हरीश नवल ने आत्मानुशासन, नैतिकता, आत्मनिरीक्षण एवं सार्थक अभिव्यक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में विचारशक्ति और संवेदनशीलता का होना अत्यंत आवश्यक है।
समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं कला प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अंत में यशपाल मल्होत्रा ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

रिपोर्ट :— कुमार सुबोध

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