हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव : विरासत, चेतना और भविष्य का विमर्श

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, मीडिया केंद्र एवं माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित ‘हिंदी पत्रकारिता द्विशताब्दी महोत्सव’ के दूसरे दिन हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके सामाजिक दायित्वों, लोकतांत्रिक मूल्यों और भविष्य की चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. गिरीश्वर मिश्र, पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता की यह तेजस्वी यात्रा एक सात्विक उद्देश्य के साथ आरंभ हुई थी। ‘उदन्त मार्तण्ड’ के माध्यम से पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने यह प्रयास किया कि जनता तक सार्थक सूचना पहुँचे और मनुष्य अपनी चेतना, समाज तथा समय के प्रश्नों से जुड़ सके। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को जनजागरण और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बताया।

विभिन्न वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता की आरंभिक परंपरा, स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, क्षेत्रीय विस्तार तथा समाज के वैचारिक निर्माण में उसके योगदान पर प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में आपातकाल से लेकर डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर तक पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पत्रकारिता की भाषा, महिला सहभागिता, तकनीकी नवाचारों और विश्वसनीयता की चुनौतियों पर सारगर्भित चर्चा हुई। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने पिछले 12 वर्षों में देश में हुए परिवर्तनकारी कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच संवाद स्थापित करने वाली एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक शक्ति है। अतीत की गौरवगाथा, वर्तमान की प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा पर केंद्रित यह महोत्सव हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की जीवंत परंपरा को स्मरण करने और उसके आगामी पथ पर विचार करने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate This Website »