‘ज से जेल’ : जेल जीवन के मानवीय पक्ष और आत्मपरिवर्तन की नई दृष्टि

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, कलानिधि प्रभाग और प्रभात प्रकाशन द्वारा मीडिया शिक्षिका एवं जेल सुधारक प्रो. वर्तिका नंदा की पुस्तक ‘ज से जेल’ के लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय ने की तथा आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि जेल और कैदी आज भी समाज के लिए वर्जित विषय हैं। उन्होंने पुस्तक को जेल जीवन के मानवीय पक्ष को सामने लाने वाला अद्भुत प्रयास बताते हुए कहा कि व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता खो सकता है, लेकिन उसकी गरिमा नहीं। श्री रामबहादुर राय ने पुस्तक को एक उत्कृष्ट उपन्यास बताते हुए कहा कि यह जेल को सीखने और आत्मपरिवर्तन के स्थान के रूप में देखने की नई दृष्टि देती है। वहीं डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इसे ‘जेल जीवन का जीवंत दस्तावेज’ बताया। लेखिका प्रो. वर्तिका नंदा ने साझा किया कि पुस्तक के पात्र उनके जेलों में मिले वास्तविक अनुभवों से जन्मे हैं। उनके शब्दों में – ‘जेल मेरा सबसे बड़ा टीचर है।’
