जगजीत सिंह की याद में सजी सुरों और शायरी की महफ़िल

27 जुलाई 2026 सिंगापुर। ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह और उनकी जीवनसंगिनी एवं प्रसिद्ध गायिका चित्रा सिंह की स्मृतियों को समर्पित “रिमेम्बरिंग द ग़ज़ल मैस्ट्रो – जगजीत सिंह एंड चित्रा सिंह” कार्यक्रम में संगीत, शायरी और साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में जगजीत सिंह की ग़ज़लों और उनकी संगीत-साधना को याद करते हुए उनके योगदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
जगजीत सिंह ग़ज़ल की बारीकियों के गहरे पारखी थे। उनकी सूक्ष्म दृष्टि, खुले विचारों और ग़ज़लों के चयन की विशिष्ट शैली ने उन्हें संगीत जगत में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने अनेक नए शायरों और ग़ज़लकारों को पहचान दी तथा उन्हें मंच प्रदान किया। चित्रा सिंह के साथ उनकी सुरमयी जुगलबंदी ने ग़ज़ल गायकी को एक नई ऊँचाई और व्यापक लोकप्रियता प्रदान की।
कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने कहा कि ऐसी संगीत-संध्याएँ केवल गायकों और संगीतकारों से ही नहीं मिलातीं, बल्कि उन शायरों और रचनाकारों की दुनिया से भी परिचित कराती हैं, जिनकी रूमानी और रूहानी कलम को ग़ज़ल के सुरों के माध्यम से आवाज़ मिली। इस अवसर पर ग़ालिब, क़तील शिफ़ाई, निदा फ़ाज़ली, बशीर बद्र, सुदर्शन फ़ाकिर, राही सहित अनेक प्रतिष्ठित शायरों की रचनात्मक स्मृतियाँ भी जीवंत हो उठीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ सिंगापुर कोकिला सुदेशना के स्वागत से हुआ। इसके पश्चात गौरी गुप्ता की रिकॉर्डेड कविता का वीडियो प्रस्तुत किया गया। मंच पर मोनज़ुरुल मन्नान, मिलिया इस्लाम साबेद, अलिम्पन मुखर्जी और लक्ष्मी राव ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से ग़ज़लों को जीवंत कर दिया। संगीत संगत में शुभेन्दु मुखर्जी, आनंद धामेलिया, गौरव मिश्रा और शशांक राव ने अपनी कला का परिचय दिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन अनन्या मुखर्जी और डॉ. स्वरूप मुखर्जी ने किया।
इस अवसर पर सिंगापुर की अदबी दुनिया की जानी-मानी हस्ती डॉली दी, सहकर्मी कौशिक कुंडू, कविताई परिवार के साथी सीमा अय्यर और प्रसाद तथा लोकगायिका ऊर्जा सहित अनेक साहित्य एवं संगीतप्रेमियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम ने उपस्थित श्रोताओं को जगजीत–चित्रा की अमर ग़ज़लों की दुनिया में फिर से ले जाकर उनकी सांगीतिक विरासत से जोड़ दिया।
