प्रख्यात युवा कवयित्री शाइस्ता का भारत नेपाल सीमा पर अभिनंदन

महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकि नगर में ग्राम पंचायत राज वाल्मीकि नगर एवं रामपुरवा पंचायत के संयुक्त तत्वाधान में दिल्ली निवासी देश की प्रख्यात युवा कवयित्री शाइस्ता के लिए एक सम्मान समारोह तथा काव्य संवाद आयोजन दिनांक 2 अगस्त को वाल्मीकि पंचायत भवन के सभागार में आहूत हुआ।

उल्लेखनीय है कि बिहार का वाल्मीकि नगर अपने धार्मिक , पर्यटनी आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय महत्व का एक महत्वपूर्ण स्थल है । यह महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि ,सीता जी का पाताल प्रवेश एवं लव कुश की जन्मस्थली है। वैदिक कालीन सदानीरा नदी जो आज गंडक नदी के नाम से जानी जाती है,के तट पर बसा यह सुंदर शहर अपने पहाड़, स्वच्छ वातावरण, घने जंगल और राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय बाघ अभ्यारण होने के कारण राज्य का एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है। जिस कारण राजधानी पटना से हेलीकॉप्टर सेवा के द्वारा पर्यटकों को इस खूबसूरत स्थल की सैर कराए जाने की व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर बना ‘गंडक बैराज’ भारत और नेपाल की सीमा बनाता है जिसकी आधारशिला स्वर्गीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 4 मई 1964 को रखी थी ।

ऐसी धरती पर यहाँ के बुद्धिजीवियों , पत्रकारों , साहित्यकारों द्वारा देश की प्रख्यात युवा कवयित्री शाइस्ता का अभिनंदन समारोह सह काव्य संवाद का आयोजन वाल्मीकि पंचायत भवन में आयोजित किया गया । इस अभिनंदन समारोह में स्वागत करते हुए बाल्मीकि नगर के मुखिया पन्नालाल साह ने शाइस्ता को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान करते हुए इस पवित्र भूमि पर शाइस्ता के आगमन को एक बड़ी खबर बताया और कहा कि हम अपनी इस पुत्री के आगमन पर समस्त वाल्मीकि नगर वासियों की ओर से अभिनंदन करते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
इस अवसर पर प्रमुख चिकित्सक श्री आई बी कुमार ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हम आज शाइस्ता को सुनने आए हैं। लोकप्रिय समाजसेवी सुरेश सिंह ने इस आयोजन को नारी शक्तिकारण का प्रतीक बताया ।प्रमुख पत्रकार संजय कुमार एवं विवेक कुमार ने अपने संबोधन में आज के दिन को यादगार दिन बताया। पड़ोस के रामपुरवा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि श्री सुमन कुमार सिंह ने यह कहा कि मैं अपनी खुशी बयान नहीं कर सकता और यह भी घोषणा करता हूं के इस वर्ष के अंत में एक विराट आयोजन सह अभिनंदन समारोह शाइस्ता हेतु वाल्मीकि नगर में आयोजित होंगे। प्रमुख समाजसेवी एवं लोकप्रिय व्यक्तित्व सदरुल हसन ने कहा कि ऐसे बौद्धिक आयोजन मन को आनंदित करते हैं और शाइस्ता को अभी तक हम लोग खबरों से जान रहे थे आज उन्हें सुनने का हमें अवसर मिला। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख शिक्षाविद बी बी अंबेडकर डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर जावेद इकबाल ने अपने संबोधन में इस उत्सव की गरिमा का वर्णन शाइस्ता के संदर्भ में किया । इस अवसर पर बगहा से विशेष रूप से पधारे आदर्श शिक्षक श्री कयूम अंसारी एवं रेलवे यूनियन के नामवर नेता श्री जयकुमार प्रसाद ने अपने संबोधन में शाइस्ता को ढेर सारा आशीर्वाद दिया।

इस सुंदर अवसर पर शाइस्ता ने अपने संबोधन में बुद्धिजीवियों और श्रोतागणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वाल्मीकि नगर के साथ बहुत सारे विशेषण एक साथ जुड़ते हैं जिस कारण यह धरती हमेशा मुझे आकर्षित करती रही है। इस अवसर पर शाइस्ता ने कहा कि साहित्यकार की रचनाओं में समाज का प्रतिबिंब होता है। मेरी कविता का केंद्र उन इंसानी एहसासों से है जो हमें इंसान बनाते हैं। इस अवसर पर शाइस्ता ने अपनी कविताओं “थोड़ी जमीन नहीं आसमान चाहिए, युद्ध में कोई जीतता नहीं, आसान नहीं उससे प्रेम कर लेना और तेरी आहटों से पहले….”का पाठ किया । इस अवसर पर शाइस्ता ने ऐसे आयोजन को महत्वपूर्ण बताया जिससे समाज में घृणा के वातावरण को कम किया जा सकता है। उन्होंने इस संदर्भ में मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण देते हुए स्वर्गीय रामकृष्ण परमहंस एवं विवेकानंद के उत्कृष्ट जीवन शैली का स्तरीय वर्णन किया । शाइस्ता ने अपने संबोधन की समाप्ति अपनी कविता की कुछ पंक्ति से की..

तुमसे संवाद करने
मैं हमेशा लौटूंगी
जीवन की शून्यताओं को
जंगल,आकाश और प्रेम से भरने
सादानीरा के तट की धाराओं से मिलने
तुमसे संवाद करने
मैं हमेशा लौटूंगी

अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बाल्मीकि नगर पंचायत के सरपंच मोइनुद्दीन अंसारी ने शाइस्ता एवं सभी आमंत्रित गण का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

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