‘कालगणना’ व्याख्यानमाला में भारतीय कालबोध के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के क्षेत्रीय केंद्र, वडोदरा द्वारा श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, वेरावल के सहयोग से आयोजित ‘श्रावण व्याख्यानमाला : कालगणना’ में भारतीय ज्ञान परंपरा में समय की अवधारणा के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श हुआ।
श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के अनुसंधान अधिकारी डॉ. कार्तिक कुमार पंड्या ने रामायण में कालगणना के संदर्भ में समय, घटनाओं और भारतीय कालबोध की सूक्ष्म परंपरा को रेखांकित किया। वहीं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. श्यामदेव मिश्रा ने ज्योतिष सिद्धांत से जोड़ते हुए नक्षत्र, ब्रह्ममुहूर्त और काल-निर्धारण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस मौके पर विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ.नित्यानंद ओझा, क्षेत्रीय केंद्र, वडोदरा की निदेशक अरूपा लाहिरी, अपूर्वा अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
यह व्याख्यानमाला केवल समय की गणना को समझने का प्रयास नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ‘काल’ को देखने और समझने की गहन दृष्टि से परिचित कराने वाला महत्वपूर्ण संवाद बना।
