‘परदेश में हिंदी और भारतीय संस्कृति’ पर हुआ विचारोत्तेजक विमर्श

निष्ठा ध्वनि ओटीटी चैनल के तत्वावधान में पालम रोड स्थित निष्ठा क्लब मे परदेश में हिंदी और भारतीय संस्कृति पुस्तक पर एक विचारोत्तेजक और सफल पुस्तक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश और विदेश के प्रमुख शिक्षाविदों, साहित्यकारों एवं वरिष्ठ संपादकों ने भाग लेकर वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर मंथन किया। कार्यक्रम के बीज वक्तव्य एवं कुशल मंच संचालन का दायित्व प्रख्यात कवि व उद्यमिता एवं कौशल विकास विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव डॉ० संतोष पटेल ने निभाया। उन्होंने अपने सारगर्भित वक्तव्य से परिचर्चा को एक सुदृढ़ दिशा प्रदान की।
परिचर्चा के दौरान शिक्षाविद् एवं प्रवासी लेखिका डॉ० शिखा रस्तोगी (थाईलैंड) एवं नमस्ते भारत’ के संपादक श्री आशीष मिश्रा (लंदन) से विदेश में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रसार को रेखांकति किया। उन्होंने कहा कि भाषा संस्कृति की वाहक होती है, और परदेश में हिंदी और हिंदी भाषी हमें अपने सहोदर जैसे लगते है। नीदरलैंड की नागरी लिपि परिषद की प्रभारी सुश्री अश्विनी केगांवकर ने विदेशों में हिंदी की वर्तमान स्थिति और वहां रच जा रहे प्रवासी साहित्य पर अपने अनुभव साझा किए। वहीं नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष डॉ० हरि सिंह पाल ने हिंदी के वैश्विक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए पुस्तक के संपादक डॉ० राजेश माँझी के योगदान को रेखांकित किया। विशिष्ट वक्ता के रूप में अपनी बातरखते हुए हिंदी मासिक पत्रिका ‘साहित्य सप्तक’ के संपादक श्री मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर हिंदी साहित्य एवं नागरी लिपि की वैज्ञानिकता और उसकी सहज स्वीकार्यता के साथ गिरमिटियां देशों में उसकी उपयोगिता और उनके द्वारा भाषिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए ‘परदेश में हिंदी और भारतीय संस्कृति’ जैसी कृति की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने सर्वसम्मति से इस बात को रेखांकित किया कि विदेशों में रहने वाला भारतीय समुदाय अपनी जड़ों और संस्कृति को सहेजने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रबुद्ध श्रोताओं की गरिमामयी उपस्थिति के साथ यह आयोजन सांस्कृतिक एवं साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत सफल रहा।
निष्ठा ध्वनि ओटीटी चैनल का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हुआ।
