डिजिटल युग में हिंदी : अवसर, चुनौतियाँ और रोजगार पर विमर्श एवं परिचर्चा

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हिंदी दिवस के अवसर पर “धौलाधार सृजन भारती, हमीरपुर” द्वारा शनिवार को अनुराग पैलेस, तरोपका में “डिजिटल युग में हिंदी : अवसर, चुनौतियाँ और रोजगार” विषय पर विमर्श एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के बदलते स्वरूप, डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव तथा हिंदी में रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ऋषि कुमार शर्मा, पूर्व उप सचिव, हिंदी अकादमी, दिल्ली ने कहा कि डिजिटल युग हिंदी के लिए चुनौती से कहीं अधिक एक बड़ा अवसर लेकर आया है। आज हिंदी इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल पत्रकारिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉगिंग, पॉडकास्ट, कंटेंट राइटिंग और ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से विश्व स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को हिंदी को केवल विषय के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और उद्यमिता की भाषा के रूप में भी देखना चाहिए।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध समाज सेवी डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा, समाजसेवी कार्यकर्ता, हमीरपुर ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी की व्यापक स्वीकार्यता के लिए तकनीक और भाषा के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। डॉ. संतोष कुमारी, अध्यक्ष, धौलाधार सृजन भारती ने हिंदी दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए संस्था की गतिविधियों और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ (सह संपादक, साहित्य सप्तक) ने साहित्य और डिजिटल मंचों के बीच बन रहे नए संबंधों पर चर्चा की और कहा की, उन्होंने डिजिटलीकरण से हिंदी में उपलब्ध नवीन अवसरों और उसके वैश्विक प्रसार के संबंध में सोशल मीडिया और डिजिटल प्रकाशन आरंभ होने से भाषा, साहित्य, साहित्यकार और श्रोता को एक सूत्र में बांधा है।
विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ.विवेक शर्मा (प्राध्यापक, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने 21वीं सदी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को वैश्विक पटल के परिदृश्य में प्रस्तुत किया और वर्तमान हिंदी:2.0 के नवीन आयामों के आलोक में नित-नवीन तकनीकी टूल्स को पारिभाषित कर कहा कि- “कृत्रिम बुद्धिमत्ता मनुष्य द्वारा निर्मित अत्याधुनिक टूल है किंतु यह “आर्टिफिशियल” बुद्धिमत्ता मनुष्य की “वास्तविक बुद्धिमत्ता” का स्थान कभी न ले सकेगी। डिजिटल माध्यमों के हिंदी के विस्तार और उसकी संभावनाओं पर विचार रखे।
डॉ० जितेन्द्र चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि तकनीकी शब्दावली का अभाव में हिंदी की अंग्रेजी पर निर्भरता बनी रहती, उसे प्रबंधित करने की महती आवश्यकता है।
परिचर्चा में आचार्य पवन कुमार, सुश्री रजनी बाला तथा सह संयोजक सुरेंद्र कुमार लता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने हिंदी में डिजिटल कंटेंट निर्माण, अनुवाद, शिक्षण, मीडिया, तकनीकी लेखन और स्वतंत्र रोजगार के नए अवसरों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संचालन श्री होशियार सिंह ने किया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं हिंदी प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विमर्श ने यह संदेश दिया कि यदि हिंदी समय के साथ तकनीक से जुड़ती है तो डिजिटल युग उसके लिए चुनौती नहीं, बल्कि वैश्विक विस्तार और रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकता है। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का सफल संचालन गज़लकार कार्तिक ने किया जिसमें भारती बहल, विनोद शर्मा, विजना डोगरा, लेखराज शर्मा, विनोद कुमारी, सुखदेव, स्वामी लाल, अशोक सोनी, दिव्या भारती, विशाल कौल आदि हिमाचली रचनाकारों ने एवं दिल्ली से पधारे मनोज श्रीवास्तव अनाम ने अपनी ग़ज़लों से बेहतरीन समां बांधा। सभी आगत रचनाकारों, वक्ताओं एवं सुधी श्रोताओं के प्रति विपन कुमार जी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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