दिन विशेष : राष्ट्रकवि कुवेम्पु की कन्नड़ कविता ‘आगे बढ़ो, का डॉ. मैथिली पी. राव द्वारा हिंदी अनुवाद
आगे बढ़ो – डॉ. मैथिली पी. राव
आगे बढ़ो, आगे बढ़ो,
तोड़कर बाधाएँ कदम आगे बढ़ाओ!
न डगमगाओ, न डर से झुको,
उज्ज्वल और स्पष्ट, साहस के साथ चलो ।
“भारत का हित में ही है हित मेरा”
बसा लो इस सत्य को अपने भीतर।
भारत माँ की आत्मा की पुकार,
देगी मेरे लक्ष्य को आकार।
भारत माँ की संतान
हैं मेरे बंधु, भाई-बहन।
भारत माँ की मुक्ति में ही,
है मेरी मुक्ति।
आगे बढ़ो, आगे बढ़ो,
आगे — निडर होकर बढ़ो!
न पीछे हटो, कभी न झुको,
स्वाभिमान से भर, संतुष्ट हो आगे चलो।
मूल रचना : ನಡೆಮುಂದೆನಡೆಮುಂದೆ
ಕುವೆಂಪು – राष्ट्रकवि कुवेम्पु (के.वी. पुट्टप्पा)
ನಡೆಮುಂದೆನಡೆಮುಂದೆ
ನುಗ್ಗಿನಡೆಮುಂದೆ !
ಜಗ್ಗದಯೆಕುಗ್ಗದೆಯೆ
ಹಿಗ್ಗಿನಡೆಮುಂದೆ !
ಭಾರತಖಂಡದಹಿತವೇ
ನನ್ನಹಿತಎಂದು
ಭಾರತಮಾತೆಯಮತವೇ
ನನ್ನಮತಎಂದು
ಭಾರತಾಂಬೆಯಸುತರೆ
ಸೋದರರುಎಂದು
ಭಾರತಾಂಬೆಯಮುಕ್ತಿ
ಮುಕ್ಕಿನನಗೆಂದು
ನಡೆಮುಂದೆನಡೆಮುಂದೆ
ನುಗ್ಗಿನಡೆಮುಂದೆ !
ಜಗ್ಗದಯೆಕುಗ್ಗದೆಯೆ
ಹಿಗ್ಗಿನಡೆಮುಂದೆ

