काव्य अमृत धारा का प्रथम वार्षिकोत्सव: साहित्य, सृजन और आत्मीयता का अनुपम संगम

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31 अक्टूबर, नई दिल्ली। साहित्यिक मंच की सार्थकता केवल आयोजनों की संख्या से नहीं, बल्कि उससे जुड़ने वाले लोगों के बीच विकसित आत्मीयता और साहित्यिक संबंधों से पहचानी जाती है। इसी आत्मीयता, सृजन और पारिवारिक सौहार्द का सुंदर उदाहरण बना काव्य अमृत धारा साहित्यिक पटल का प्रथम वार्षिकोत्सव, जिसका आयोजन 31 अक्टूबर को दिल्ली स्थित क्रिएटिव अनलॉक में हर्षोल्लास के साथ किया गया। संस्था की संस्थापिका डॉ. अमृता अमृत एवं अध्यक्ष श्री निहाल चंद के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह ने एक वर्ष की साहित्यिक यात्रा को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। संस्थापिका डॉ. अमृता अमृत ने अपने भावपूर्ण संबोधन में संस्था की एक वर्ष की उपलब्धियों, साहित्यिक यात्रा और सभी सदस्यों के योगदान को स्मरण करते हुए आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संरक्षक एन.सी. खंडेलवाल, अध्यक्ष खुर्रम नूर, मुख्य अतिथि त्रिलोक कौशिक एवं नीलम बावरा तथा विशिष्ट अतिथि विवेक कविश्वर, प्रमोद कुमार ‘कुश’ (मुंबई के ख्यातिप्राप्त ग़ज़लकार), प्रवीण सक्सेना, हशमत भारद्वाज, डॉ. लिजा खान, पवन मल्होत्रा, कंचन वार्ष्णेय ‘कशिश’, गोल्डी ग़ज़ब, नरेंद्र शर्मा ‘खामोश’ एवं शाकिर देहलवी की गरिमामयी उपस्थिति रही। अतिथियों ने अपने अनुभवों, शुभकामनाओं और मार्गदर्शक विचारों से संस्था की साहित्यिक यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान की।

टीम के महत्वपूर्ण सदस्य सचिन परवाना एवं हिमांशु शुक्ल ने अपने शब्दों और गीतों से आयोजन में विशेष उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम का भावपूर्ण एवं सधे हुए अंदाज़ में संचालन पूनम मल्होत्रा एवं प्रेरणा सिंह ‘प्रेरणा’ ने किया। उनके सहज संवाद और साहित्यिक अभिव्यक्ति ने पूरे आयोजन को सुंदर प्रवाह प्रदान किया।

काव्य संध्या में पूजा चौहान, मंजूषा पंवार, नलिनी राज ‘मौसम’, अलका बलूनी पंत, अर्पणा भटनागर, रक्षा सिन्हा, स्मिता चौहान, पूजा श्रीवास्तव, ईशा भारद्वाज, ललित कुमार, शुभ्रा पालिवाल, संजीव नादान, मोहन, संगीता, जितेंद्र पाल, गगन ढींगरा सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर किया। हर रचना में अलग भावभूमि और अभिव्यक्ति की विशिष्ट छाप देखने को मिली।

अध्यक्षीय उद्बोधन ने समारोह को गरिमामय दिशा दी। वहीं समापन की ओर बढ़ते हुए डॉ. अमृता अमृत की पूरी टीम द्वारा प्रस्तुत सामूहिक बधाई गीत ने वातावरण को उल्लास और अपनत्व से भर दिया। यह प्रस्तुति बीते वर्ष की उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ आने वाले समय के लिए नए संकल्पों और संभावनाओं का संदेश भी थी।

इस पूरे आयोजन में यह बात विशेष रूप से उभरकर सामने आई कि काव्य अमृत धारा केवल काव्य पाठ का मंच नहीं, बल्कि नवोदित प्रतिभाओं को अवसर देने, वरिष्ठों का मार्गदर्शन पाने और साहित्य के माध्यम से रिश्तों को सँजोने वाला एक आत्मीय परिवार बन चुका है।

कुछ उत्सव तारीखों में दर्ज नहीं होते, वे स्मृतियों में बस जाते हैं। काव्य अमृत धारा का यह प्रथम वार्षिकोत्सव भी ऐसा ही उत्सव रहा, जहाँ एक वर्ष की यात्रा ने विराम नहीं, बल्कि एक नई और खूबसूरत शुरुआत की है।

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