दिन विशेष कविता : सच-सच बतलाना! – नागार्जुन
दिन विशेष कविता : सच-सच बतलाना! – नागार्जुन कालिदास, सच-सच बतलाना!इंदुमती के मृत्युशोक से अज रोया या तुम रोए थे?कालिदास, सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला में…
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दिन विशेष कविता : सच-सच बतलाना! – नागार्जुन कालिदास, सच-सच बतलाना!इंदुमती के मृत्युशोक से अज रोया या तुम रोए थे?कालिदास, सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला में…