Author: वैश्विक हिंदी परिवार

सुधा मूर्ति की पुस्तक ‘ टाइड्ज़ ऑफ टाइम ’ का भव्य लोकार्पण”

सुधा मूर्ति की पुस्तक “टाइड्ज़ ऑफ टाइम ’ का भव्य लोकार्पण” हाल ही में एक अत्यंत गरिमामय एवं ऐतिहासिक साहित्यिक-सांस्कृतिक समारोह में राज्यसभा सांसद एवं इन्फोसिस फाउंडेशन की अध्यक्षा, पद्म…

‘विदेश में हिंदी पत्रकारिता’ को पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार’

‘विदेश में हिंदी पत्रकारिता’ को पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ पुरस्कार’ मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा घोषित वर्ष 2024 के पुरस्कारों की सूची में वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं शोधकर्ता जवाहर कर्नावट की…

दिव्या माथुर का कलाइडोस्कोप : धूप, छाँव और अनवरत यात्राएँ ( समीक्षा ) : मनीषा कुलश्रेष्ठ

दिव्या माथुर का कलाइडोस्कोप : धूप, छाँव और अनवरत यात्राएँ ( समीक्षा ) : मनीषा कुलश्रेष्ठ बीते दिनों हुई तमाम यात्रा में यकीन मानिए खिड़की के बाहर नहीं देखा, एक…

“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

“तांडव” कविता : ( रेणुका – कविता संग्रह ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ नाचो, हे नाचो, नटवर !चन्द्रचूड़ ! त्रिनयन ! गंगाधर ! आदि-प्रलय ! अवढर ! शंकर!नाचो, हे नाचो,…

रंग जमाया टी.वी. ने ( बालगीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

रंग जमाया टी.वी. ने ( बालगीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ फीके पड़े तमाशे सारे, रंग जमाया टी.वी ने!ए बी सी डी ई एफ जी,फिल्मों की है धूम मची,सबने इतवारों की…

सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा

सात और आठ ( कविता ) : डॉ. अशोक बत्रा एक दिन झूमते हुएसात और आठपहुँच गएगणितज्ञ आर्यभट्ट के पास! खुशी से किलक कर पूछा आर्यभट्ट नेकहो प्यारे सात और…

आकाशवाणी के 90 गौरवशाली वर्ष : संगीत, संस्कृति और भारतीयता का अनुपम उत्सव

आकाशवाणी के 90 गौरवशाली वर्ष : संगीत, संस्कृति और भारतीयता का अनुपम उत्सव 8 जून 2026 का दिन भारतीय प्रसारण इतिहास में एक विशेष मील का पत्थर बनकर दर्ज हो…

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने

ब्राउन का फीका रंग ( समीक्षा ) : स्वरांगी साने काले और सफ़ेद के बीच का कोई रंग ब्राउन हो सकता है। इन दिनों एशियन परिवारों को भी ब्राउन फैमिली…

অধিকার – प्रीति अग्रवाल : अधिकार – आशा बर्मन : अनुवाद (लघुकथा)

অধিকার – प्रीति अग्रवाल : अधिकार – आशा बर्मन : अनुवाद (लघुकथा) अधिकार रश्मि अपनी दो बरस की बिटिया को अपने से चिपका कर, नजरें झुकाए, ऐसे सिमट कर बैठी…

दीवारों पर लिखी सिसकियाँ ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

दीवारों पर लिखी सिसकियाँ ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ इतिहास की किताबों में लिखा है कि शाहजहाँ ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। पर…

गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत

गया बादळा ( राजस्थानी कविता ) : कल्याणसिंह शेखावत आज बादळा, नया बादळा,चढ्या सबैरे घणा बादळा। जबरा-जबरा काळा-काळा,म्हानै लाग्या भला बादळा।म्हारो तन अर मन हरसायो,नभ मे दीख्या बड़ा बादळा।। मॉक…

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

श्रीमती गजानंद शास्त्रिणी (व्यंग्य) : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला‘ श्रीमती गजानन्‍द शास्त्रिणी श्रीमान् पं. गजानन्‍द शास्‍त्री की धर्मपत्‍नी हैं। श्रीमान् शास्‍त्री जी ने आपके साथ यह चौथी शादी की है, धर्म…

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा

मेंढकी का ब्याह ( व्यंग्य ) : वृंदावनलाल वर्मा उन ज़िलों में त्राहि-त्राहि मच रही थी। आषाढ़ चला गया, सावन निकलने को हुआ, परन्तु पानी की बूँद नहीं। आकाश में…

घोड़ाशाही ( व्यंग्य ) : सियारामशरण गुप्त

घोड़ाशाही ( व्यंग्य ) : सियारामशरण गुप्त प्राचीन भारत में चक्रवर्ती होने के लिए अश्वमेध यज्ञ किया जाता था। यज्ञ का घोड़ा छोड़ दिया जाता था और उसके पीछे-पीछे रक्षक…

“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

“मंगल-आह्वान” कविता (कविता संग्रह – रेणुका ) : रामधारी सिंह ‘दिनकर’ भावों के आवेग प्रबलमचा रहे उर में हलचल। कहते, उर के बाँध तोड़स्वर-स्त्रोत्तों में बह-बह अनजान,तृण, तरु, लता, अनिल,…

चन्दा मामा की शान ( बालगीत ) : बालस्वरूप ‘राही’

चन्दा मामा की शान ( बालगीत ) : बालस्वरूप ‘राही’ चंदा मामा कहो तुम्हारीशान पुरानी कहाँ गई?कात रही थी बैठी चरखाबुढ़िया नानी कहाँ गई?सूरज से रोशनी चुराकरचाहे जितनी भी लाओ,हमें…

ऊँट ( बालगीत ) : बाल स्वरूप ‘राही’

ऊँट ( बालगीत ) : बाल स्वरूप ‘राही’ ऊँट बड़े तुम ऊट-पटाँग!गरदन लंबी, पूंछ जरा-सीआँखें छोटी, दाटत बड़े,ऊबड़-खाबड़ पीठ, ऊँघतेरहते अक्सर खड़े-खड़े।बँधी गद्दियाँ हैं पैरों मेंलेकिन झाडू जैसी टाँग! सारा…

दीवारों पर लिखी सिसकियाँ ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’

दीवारों पर लिखी सिसकियाँ ( व्यंग्य ) : डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ इतिहास की किताबों में लिखा है कि शाहजहाँ ने मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया था। पर…

आँधियों का मौसम ( समकालीन व्यंग्य ) : प्रेम जन्मेजय

आँधियों का मौसम ( समकालीन व्यंग्य ) : प्रेम जन्मेजय मैंने तो अपने घर के टीन-छप्पर सँभाल लिए हैं, आप अपनी रक्षा स्वयं करें। जिधर से सुनों यही सुनने को…

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