Category: कविता

दिन विशेष कविता : यह करवा चौथ याद आएगा – स्मृति आदित्य

दिन विशेष कविता : यह करवा चौथ याद आएगा – स्मृति आदित्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा विभाग में एडजंक्ट प्रोफ़ेसर हैं। उनकी यह कामकाजी स्त्री…

दिन विशेष कविता : पथिक का पाथेय – नवनीत सेमवाल

दिन विशेष कविता : पथिक का पाथेय – नवनीत सेमवाल (छंद- हरिगीतिका)गंतव्य पथ के आशावान, भाग्य सब कल्पित हैं।श्रांत्यार्थ प्रतिज्ञाबद्ध रहना, यह स्वयं का हित है।ज्यों कालचक्र रहता सदा ही,…

दिन विशेष युवा लेखन में हर्षित उपाध्याय की कविताएँ

दिन विशेष युवा लेखन में हर्षित उपाध्याय की कविताएँ हर्षित उपाध्याय दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत विषय के शोधच्छात्र हैं और परंपरागत भारतीय काव्य शैली के सशक्त संवाहक हैं। छंद, लय…

दिन विशेष कविता में डॉ. निधि अग्रवाल की कविताएँ

दिन विशेष कविता में डॉ. निधि अग्रवाल की कविताएँ १. स्थायी पता कोलाहल भरी दुनिया मेंकैसे सुन ली मैंने एक धड़कनआश्चर्यों से भरे संसार मेंतुम्हारी सहजता पर हीजा कर रुकी…

दिन विशेष विजयादशमी कविता – “विजयादशमी : रावण बाहर भी है, भीतर भी है!” – प्रीति साहू

दिन विशेष विजयादशमी कविता – “विजयादशमी : रावण बाहर भी है, भीतर भी है!” – प्रीति साहू आज फिर विजयादशमी आई है,फिर सत्य ने विजय की अलख जगाई है।फिर जलेंगे…

दिन विशेष कविता : “पुण्य-पश्चाताप” – ऋतिका ‘ऋतु’

दिन विशेष कविता : “पुण्य-पश्चाताप” – ऋतिका ‘ऋतु’ ऋतिका ‘ऋतु’ नाम से जानी जाती नोएडा की ऋतिका यादव का पहला काव्य संग्रह वर्ष 2021 में आया था। अंग में, प्रत्यंग…

दिन विशेष कविता : “स्मृतियों का उजास” – दिब्येंदु कर्मकार

दिन विशेष कविता : “स्मृतियों का उजास” – दिब्येंदु कर्मकार सायक* था सदा मौन, अकेला, निराला,दफ़्तर में बीते वर्षों का जाला।न बोला अधिक, न किसी से मिला,जीवन का पथ वह…

दिन विशेष कविता : बदरा – डॉ. अर्जुन गुप्ता

दिन विशेष कविता : बदरा – डॉ. अर्जुन गुप्ता साज सवँर के बदरा आएसाज सवँर के बदरा आए,पाहुन बन कर आज।आगे-आगे हवा मचलती,करे खूब आवाज॥बंद खिड़कियाँ दर दरवाजे,खुले आज हरओर।पाहुन…

दिन विशेष कविता : खोज – अलकनंदा साने

दिन विशेष कविता : खोज – अलकनंदा साने मत करो वर्णमाला में शामिलकिसी संधि में जगह मत दोसमास में रहने दो अपने पीछेमंजूर है. एक बिनती हैतत्सम ही रहने दोअपभ्रंश…

दिन विशेष कविता : रिमझिम रिमझिम गिरत पानी – चन्द्रभूषण यदु

दिन विशेष कविता : रिमझिम रिमझिम गिरत पानी – चन्द्रभूषण यदु रिमझिम रिमझिम गिरत पानीबोती जमाती किसान किसानी सबके जिंनगी के इही कहानीका परजा अब का राजा रानी रिमझिम रिमझिम…

दिन विशेष कविता : प्यारी अम्मा – प्रियंका सिंह

दिन विशेष कविता : प्यारी अम्मा – प्रियंका सिंह एक धुंधली सी याद हैबचपन से ही साथ हैचूल्हे पर से उठता धुआँरसोई में बैठी हमारी अम्माहांडी में रखी दाल उबलतीसिल…

दिन विशेष कविता : सच-सच बतलाना! – नागार्जुन

दिन विशेष कविता : सच-सच बतलाना! – नागार्जुन कालिदास, सच-सच बतलाना!इंदुमती के मृत्युशोक से अज रोया या तुम रोए थे?कालिदास, सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला में…

जन्मदिन विशेष में अनिल “जोशी” की कविताएँ

जन्मदिन विशेष में अनिल “जोशी” की कविताएँ व्यक्ति या विचार ये जोमानव का जन्म हैयेमानव द्वारापृथ्वी पर देखा गयासबसे सुन्दर स्वप्न है जबजन्म देते हैंपुरूष और स्त्रीशिशु कोवे केवलएक दूसरे…

दिन विशेष कविता में सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता “चाँदनी की पाँच परतें”

दिन विशेष कविता में सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता “चाँदनी की पाँच परतें” चाँदनी की पाँच परतें,हर परत अज्ञात है एक जल में,एक थल में, एक नीलाकाश मेंएक आँखों में तुम्हारे…

दिन विशेष कविता में डॉ. जमुना कृष्णराज की कविता “मेरी मातृभूमि”

दिन विशेष कविता में डॉ. जमुना कृष्णराज की कविता “मेरी मातृभूमि” मेरी मातृभूमि! इस भूमि की उपज बनी मैं,इसकी गोद में पली-बढ़ी।इसके बाग-बगीचे में मैं खेल-कूद कर हुई बड़ी॥ इसके…

दिन विशेष युवा लेखन में डॉ. राम प्रवेश रजक की कविता

दिन विशेष युवा लेखन में डॉ. राम प्रवेश रजक की कविता वह तो मैं था किसी ने ऊपर वालेसे कहामैं आपको देखनाचाहता हूँआपको महसूस करनाचाहता हूँऊपर वाले नेजवाब दियाजब तुम…

दिन विशेष विमर्श में ‘रास बिहारी गौड़’ की कविता “अपना घर”

दिन विशेष विमर्श में ‘रास बिहारी गौड़’ की कविता “अपना घर” बिटियाकभी गुस्से मेंकभी लाड़ मेंकभी जज़्बात मेंकह देती हैचली जाऊँगीएक रोज ‘अपने घर’ पूरे घर के कानों मेंथोड़ा डर,…

दिन विशेष में डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुँजन’ की कविता “घन गर्जन (सरसी छंद)”

दिन विशेष में डॉ. अर्जुन गुप्ता ‘गुँजन’ की कविता “घन गर्जन (सरसी छंद)” चला मगन घन अंबर-पथ पर,करता अद्भुत शोर।कहो इसे घन गर्जन या तुम,कहो प्रणय की डोर॥घुँघराले घन जटाजूट…

जन्मदिन विशेष में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता “अब प्रीति करी तौ निबाह करौ”

जन्मदिन विशेष में भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता “अब प्रीति करी तौ निबाह करौ” अब प्रीति करी तौ निबाह करौअपने जन सों मुख मोरिए ना ।तुम तो सब जानत नेह मजाअब…

दिन विशेष ( कविता ) में धर्मवीर भारती की कविता ‘कनुप्रिया’ से

दिन विशेष ( कविता ) में धर्मवीर भारती की कविता ‘कनुप्रिया’ से घाट से लौटते हुएतीसरे पहर की अलसायी बेला मेंमैंने अक्सर तुम्हें कदम्ब के नीचेचुपचाप ध्यानमग्न खड़े पायामैंने कोई…

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