
नए वर्ष का नयापन
डॉ. शैलजा सक्सेना
पिछले कुछ वर्षों से लोग, जनवरी १ की शुभकामना भेजते हुए, आंग्ल वर्ष की शुभकामनाएँ या ग्रिगेरियन कैलेंडर के नव वर्ष की शुभकामनाएँ लिख कर भेजने लगे हैं। शुभकामनाएँ चाहें किसी कैलेंडर के अनुसार दी जा रही हों, मन से दी गई हैं तो शुभकामनाएँ ही होती हैं और उनका महत्व किसी अन्य कैलेंडर के कारण दिए जाने से कम नहीं होता। कई बार तो यह भी खुशी होती है कि चलो इसी बहाने साल में दो-तीन बार लोगों की शुभकामनाएँ मिलेंगी। हमें कुछ नया प्रारंभ करने के जब एक से अधिक अवसर मिलें तो अप्रसन्नता की क्या बात?
बात अप्रसन्नता की तब होती है या होनी चाहिए जब नया दिन, नया सप्ताह, नया महीना या नया वर्ष प्रारंभ होने पर भी कुछ नया न हो। नयेपन की चाह मनुष्य की स्वाभाविक इच्छा है। उसके भीतर की क्रियात्मक ऊर्जा जहाँ उसे नए विचार देकर नए आविष्कार और नए रोमांच की खोज में लगाए रहते हैं वहीं उसका आलस, डर, स्थितियाँ, आरामतलबी उसे नये कामों को करने से रोकते हैं। हैमलेट के ’टू बी और नॉट टू बी’ के बीच यह सारा मनुष्य समाज लटका हुआ है। वह इससे निकल कर एक निश्चितता तक पहुँचना चाहता है पर इस निर्णय के लिए भी उसे कुछ प्रेरणा चाहिए होती है। आत्मानुशासन की कमी को यह ’प्रेरणा’ विभिन्न रूपों में आकर पूरा करती है। हर नई सुबह, नया दिन, नया पर्व, हमें नया उत्साह या एक और अवसर देकर हमें प्रेरित करता है कि हम अपने किए हुए को जाँचे और लंबे समय से ठहरी हुई योजनाओं को क्रियात्मक रूप दें।
ग्रिगेरियन कैलेंडर वैश्विक अर्थव्यवस्था को मान्य है परन्तु हर धर्म का अपना एक कैलेंडर है जो ग्रिगेरियन कैलेंडर से बहुत भिन्न है। हिंदु अपने कैलेंडर को पंचाग कहते हैं और प्रदेश के अनुसार विक्रम संवत या शक संवत पंचाग को स्वीकार करते हैं। यह ’लूनीसोलर’ कैलेंडर कहलाता है यानि यह चंद्र और सूर्य के आधार पर बना है इसी से हमारे सारे त्यौहार हर वर्ष अलग-अलग तिथियों पर आते हैं क्योंकि ये चंद्र की गति पर निर्भर हैं किंतु मकर संक्रांति जनवरी १४ या १५ को ही आती है क्योंकि यह तिथि सूर्य के अनुसार है। सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब यह पर्व मनाया जाता है। भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रसिद्ध ’सूर्य सिद्धांत’ संभवत: पाँचवी-छठी शताब्दी में आर्यभट्ट द्वारा बताये गए अनेक खगोलीय खोजों पर आधारित है, पुस्तक रूप में इसकी रचना को कुछ लोग आर्यभट्ट के शिष्य लटदेव की रचना बताते हैं तो कुछ १५ शतब्दी में ताड़ पत्रों पर इसके लिखित रूप को वराहमिहिर की देन मानते हैं। तामिलनाडू और केरल में प्राय: सूर्य आधारित कैलेंडर स्वीकार किया जाता है।
चंद्रमा के आधार पर बने विक्रम संवत के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, १९ मार्च,२०२६ को हिंदुओं का नव वर्ष प्रारंभ होगा और यह २०८३ वर्ष का प्रारंभ होगा। यहूदी लोग भी चंद्रमा के आधार पर अपना कैलेंडर बनाते हैं और उनके नये साल ’रोश-हाशनाह’ का प्रारंभ हिब्रू महीने तिशेरी (सातवें माह) के पहले दो दिन होती है जो २०२६ में सितंबर ११ से १३ को होगा। इस्लामिक कैलेंडर में नया साल ’रा’स-अस-सनाह’ या हिजरी भी चंद्रमा पर आधारित है और नया साल मुहर्र्म के पहले दिन माना जाता है, जो २०२६ में जून १६ को पड़ने वाला है, तब १४४८ हिजरी प्रारंभ होगी। आपको जानकर हैरानी होगी कि कैथोलिक ईसाई भी दो दिनों को नए साल के रूप में मनाते हैं। एक जिसे वे ’लिटिर्जिकल ईयर’ कहते हैं जो धार्मिक वर्ष होता है और एडवेंट (नवंबर के अंत) में शुरू होता है और ईसा मसीह के जन्म की तैयारियों के आसपास घूमता है और दूसरा व्यावहारिक नया साल जो ग्रिगेरियन कैलेंडर के अनुसार जनवरी १ को प्रारंभ होता है।
यह सब आपको यह बताने के लिए लिखा कि हर धर्म के लोगों के पास जनवरी १ के अतिरिक्त अपने नये वर्ष के दिन भी हैं जिन्हें सब बहुत उत्साह से मनाते हैं पर वैश्विक स्तर पर आधिकारिक और शासकीय रूप से ग्रिगेरियन कैलेंडर को ही माना जाता है जो सौर्य कैलेंडर है।
जनवरी १ से प्रारंभ हुआ नया वर्ष, वैश्विक कारोबार का मील का पत्थर होता है, नए साल के नए ’एग्रीमेंट’, नए संबंध और मुनाफ़े/घाटे के आँकड़े विश्व की अर्थव्यवस्था के नए अध्याय की ओर संकेत करते हैं, स्टॉक मार्केट से लेकर कंपनियों में नौकरी देने आदि सबके लिए जनवरी १ मह्त्वपूर्ण है।
लोग ३१ दिसंबर को पार्टी करते हुए प्राय: एक दूसरे से नए साल के लिए बनाए गए ’रेज़्योल्यूशन’ या योजनाओं को पूछते हैं और सर्वे बताता है कि ४६ प्रतिशत लोग एक्सरसाइज़ और स्वस्थ आहार करने का संकल्प करते हैं, शेष में पैसा बचाना, परिवार के साथ समय बिताना और नई जगहों पर घूमने का संकल्प लोकप्रिय है। प्राय: ये संकल्प कुछ ही समय में टूट भी जाते हैं। संकल्प, विकल्प, मन की ये दोनों लहरें पूर्ण समर्पण के कारण अधूरे ही रहते हैं।
हमें बताते हुए प्रसन्नता है कि वैश्विक हिंदी परिवार के हिंदी प्रचार-प्रसार के पिछले वर्षो के संकल्प सफल रहे। इस सफलता का कारण एक विस्तृत टीम का हिंदी भाषा और संस्कृति के प्रति समर्पण है। हमने पिछले वर्षों में प्रति सप्ताह के कार्यक्रम के साथ वेबसाइट से विश्व के अनेक रचनाकारों को जोड़ा। इस वर्ष वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन नि:शुल्क हिंदी शिक्षण का कार्य सफ़लतापूर्वक प्रारंभ हुआ तथा वैश्विक परिवार की कई शाखाओं का संयोजन हुआ जैसे उत्तरी अमेरिका शाखा, यूरोपीय शाखा, थाईलैंड शाखा, जापान शाखा, ऑस्ट्रेलिया शाखा आदि। इनमें से उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया शाखाओं का उद्घाटन और कार्य प्रारंभ हो चुका है। हमारा संकल्प है कि हम नई शाखाएँ प्रारंभ करेंगे और सभी शाखाओं को सक्रिय करेंगे। हमारा ऑन लाइन शिक्षण का काम भी कई देशों में जनवरी ४ से पहली बार प्रारंभ हो रहा है। डॉ. वेदप्रकाश जी ने जापान से इस काम का प्रारंभ अपनी कुशल टीम के साथ किया था और इस वर्ष वे इसे विश्व के कोने-कोने तक फ़ैलाने का संकल्प लिए हुए हैं और एक किताब भी अध्यापन के लिए लिख रहे हैं।
इससे भी बड़ा एक संकल्प है प्रवासी दिवस और विश्व हिंदी के अवसर पर आयोजित होने वाले ’अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन-२०२६’ को सफल बनाना। यह महोत्सव नए वर्ष में, एक बार फिर हिंदी के प्रसार, प्रचार और समृद्धि के संकल्प को दोहरा रहा है। इस महोत्सव में अनेक भाषाओं के विद्वान, ७० देशों से प्रवासी साहित्यकार, चित्रकार, नाटक-अभिनेता भाग ले रहे हैं। हिंदी के साथ-साथ दक्षिण भारत की भाषाओं, पूर्व की शास्त्रीय भाषाओं, पंजाबी, काश्मीरी, डोगरी, उर्दू आदि भाषाओं की स्थिति और विकास की दशाओं पर चर्चा होगी। अनुवाद, पत्रकारिता, विज्ञापन की भाषा, मीडिया की भाषा, प्रौद्योगिकी, लघु फ़िल्में आदि अनेक विषयों पर चर्चाएँ होंगी तथा प्रतिष्ठित साहित्यकारों से बातचीत होगी। कई कहानियों का वाचन और नाट्यरूपातंरण प्रस्तुत किया जायेगा।
हमारा संकल्प है कि युवाओं और विश्व के साहित्य प्रेमियों को परस्पर एक मंच पर लाना है, इस आयोजन में सभी भारतीय भाषाओं को आदर देते हुए, हिंदी से जोड़ना है, इसी संकल्प में इस महोत्सव की सफलता छिपी है।
हम आप सभी साहित्यप्रेमियों को अपने इस संकल्प में भागीदार बनाना चाहते हैं। हिंदी का समृद्ध भविष्य अन्य भारतीय भाषाओं के समृद्ध भविष्य से संबद्ध है। आइये, हम संकल्प करें कि अपनी मातृभाषाओं के साथ ही हिंदी के प्रसार के लिए काम करेंगे। इसके साथ ही हम भी कामना करते हैं कि आप के द्वारा लिए गए नए वर्ष के संकल्प आपको समृद्ध करें और सफ़ल रहें।
आप सभी को नव वर्ष की मंगलकामनाएँ। आप सपरिवार स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और संवेदनात्मक ज्ञान से परिपूर्ण रहें!
सादर
शैलजा
