भाषा और प्रौद्योगिकी: भारतीय भाषाओं में सफल स्टार्टअप (रिपोर्ट)

10 जनवरी 2026 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के उमंग सभागार में तृतीय अंतर्राष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के एक सत्र में भाषा और प्रौद्योगिकी: भारतीय भाषाओं में सफल स्टार्टअप विषय पर चर्चा हुई।
इस सत्र के अध्यक्ष थे श्री अरुण मोहन शैरी, निदेशक, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान लखनऊ। उन्होंने बताया कि लोगों के बीच यह भ्रम है कि तकनीक की भाषा केवल अंग्रेजी तक सीमित है, लेकिन उनका मत है कि यह सच नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके संस्थान में सबसे अधिक पैकेज हिंदी भाषी वर्ग के छात्र को ही मिला था। अपने सत्र में, उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि यदि तकनीक को सहज भाषा (जिस भाषा में आप सहज हों) में सिखाया जाए, तो इसे समझना आसान हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भी हिंदी भाषी उम्मीदवारों का प्रतिशत अधिक पाया गया है। यह समाज में अंग्रेजी की श्रेष्ठता को लेकर व्याप्त उस भ्रम को दर्शाता है, जो पूरी तरह से गलत है कि भाषा और उसे सीखने की क्षमता के बीच कोई संबंध नहीं है।
मुख्य अतिथि, श्री प्रदीप गुप्त (IT industry stalwart) ने लोगों को स्टार्टअप में निवेश शुरू करने के लिए प्रेरित किया और भाषा के महत्व पर जोर देते हुए स्टार्टअप की उपयोगिता को विस्तार से समझाया। उन्होंने अपना वक्तव्य संक्षिप्त रखा क्योंकि वह उपस्थित लोगों के साथ एक संवादात्मक सत्र (Interaction Round) करना चाहते थे, जहाँ उन्होंने हिंदी भाषा को लेकर लोगों के मन में व्याप्त हीन भावना और भ्रम को दूर किया।
सत्र के मुख्य वक्ता श्री प्रसून शर्मा , बोर्ड सदस्य, पॉलिसी फाउंडेशन ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से तकनीक के महत्व को बेहद खूबसूरती से समझाया और विशेष रूप से अपने स्टार्टअप के बारे में बात की। उन्होंने यह समझाने की कोशिश की कि हमें तकनीक का उपयोग उन कार्यों के लिए करना चाहिए जिन्हें मनुष्य करना पसंद नहीं करते और जो हमारी वर्तमान कार्यशैली से बिल्कुल विपरीत हैं। उन्होंने नोएडा स्थित अपनी नई स्टार्टअप कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी कंपनी कचरे को अलग करने (waste segregation) के लिए रोबोट का उपयोग करती है, क्योंकि यह एक ऐसा काम है जिसे लोग आमतौर पर पसंद नहीं करते। अपने स्टार्टअप के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि आप तकनीक में निवेश करना चाहते हैं, तो ऐसी चीजों में निवेश करें जहाँ हम तकनीक का उपयोग करें, न कि तकनीक हमारा उपयोग करे।
आरुषि ठाकुर, विद्यार्थी, दिल्ली विश्वविद्यालय के संयोजन में तथा प्रो. विवेक शर्मा के संचालन में यह सत्र अत्यंत कुशलता और सुव्यवस्थित तरीके से पूर्ण हुआ। उनके संचालन में न केवल ‘दुशाला’ जैसे सुंदर शब्दों के उपयोग ने श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया और विशेष प्रशंसा बटोरी, बल्कि पूरे सत्र को बहुत ही सहजता से आगे बढ़ाया। साथ ही उन्होंने सम्मानित वक्ताओं को अपने विचार साझा करने के लिए उचित समय दिया, और निर्धारित समय सीमा के भीतर ही सत्र का समापन भी किया। उनकी इसी समयबद्धता के कारण अन्य सत्र भी समय पर शुरू और समाप्त हो सके।
सत्र – भाषा और प्रौद्योगिकी: भारतीय भाषाओं में सफल स्टार्टअप
स्थान – उमंग सभागार – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली
सत्र दिनांक – 10 जनवरी 2026
समय 9:30 से 11:00 बजे तक
