पुस्तक लोकार्पण (रिपोर्ट)

सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि एवं गीतकार बाल स्वरूप राही ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने कहा कि पुस्तक लोकार्पण केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि रचनात्मक संवाद का उत्सव होता है। उन्होंने लोकार्पित कृतियों की विषयगत विविधता की सराहना करते हुए कहा कि कविता, कथा, शोध, बाल साहित्य और आत्मकथात्मक लेखन—सभी विधाएँ हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाती हैं। उन्होंने रचनाकारों को समाज के प्रति उत्तरदायी दृष्टि बनाए रखने का संदेश दिया। इसके साथ ही उनकी चार पंक्तियों ने तो सत्र की शोभा में चार चाँद लगा दिए।
सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में जुड़े नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त महानिदेशक श्री जय प्रकाश पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तकें समाज की चेतना, समय की संवेदना और विचारों की निरंतरता का सशक्त माध्यम होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी हिंदी साहित्य ने वैश्विक स्तर पर हिंदी को नई दृष्टि, नए अनुभव और नई भाषा-संवेदना प्रदान की है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रशासनिक दायित्वों के साथ साहित्य-साधना व्यक्ति को मानवीय मूल्यों से जोड़ती है तथा समाज को संतुलित दृष्टि प्रदान करती है। सभी रचनाकारों को उन्होंने निरंतर लेखन एवं सृजन के लिए प्रेरित किया।
मंच संचालक श्रीमती नर्मदा कुमारी द्वारा लोकार्पित पुस्तक से पूर्व सभी रचनाकारों का आत्मीय रूप से स्वागत किया गया और संक्षिप्त परिचय के पश्चात् सभी रचनाकारों को मंच पर अपनी पुस्तक पर प्रकाश डालने हेतु आमंत्रित किया गया।
1.डॉ. अरुणा अजितसरिया (एम.बी.ई.,केम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विभाग में हिंदी की मुख्य परीक्षक, प्रशिक्षक और लेखक) ने अपनी पुस्तक प्रवासी साहित्य श्रृंखला में प्रवासी साहित्यकार दिव्या माथुर के साथ (एक अतरंग वार्ता) पर डॉ.अरुणा अजितसरिया एवं दिव्या माथुर जी ने अपने-अपने विचार रखें।
2.सुश्री रेखा राजवंशी आस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध हिंदी लेखिका, कवयित्री और रेडियो कलाकार है जो कविता, कहानी, ग़ज़ले, लेख लिखकर विदेश में भारत की पहचान है। उनकी पुस्तक त्रिशंकू का लोकार्पण किया गया। उन्होंने अपनी पुस्तक के संदर्भ में सभी को अवगत कराया।
3.सुश्री अर्चना पैन्यूली डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में एक स्कूल में अध्यापन में कार्यरत हैं और डेनिश समाज पर लिखती है। उनकी पुस्तक अलखनंदा सूत के संबंध में उन्होंने अपने विचार रखें। लेखिका के अनुसार यह पुस्तक सृजन की निरंतर जाग्रत चेतना और अंतर्मन की अलख को अभिव्यक्त करती है। इसमें संवेदना और विचार का संतुलित समन्वय है।
4.श्री नरेश शांडिल्य, भारत के कवि, दोहाकार एवं शायर की पुस्तक मेरी अपनी सोच का लोकार्पण किया गया। उन्होंने अपनी पुस्तक से दोहों की कुछ लाइनों को भी सभी के समक्ष गुनगुनाया जिससे चारों ओर समा बंध गया। उन्होंने कहा कि यह कृति सामाजिक, नैतिक और दार्शनिक प्रश्नों पर उनके निजी चिंतन का संकलन है।
5.सुश्री आशिमा कौल, हिंदी कवयित्री की पुस्तक औरत, माटी और प्रेम की कविताएँ का लोकार्पण हुआ। उन्होंने कहा यह पुस्तक केवल महिलाओं का संग्रह नहीं है बल्कि समय, संवेदना और संघर्ष के बीच रचा गया एक आत्मीय संवाद है। यह संग्रह स्त्री की जड़ें, उसकी भावनाएँ और प्रेम के विविध रूपों को स्वर देता है।
6.सुश्री सुनीता पाहूजा की पुस्तक मॉरीशस की साहित्यिक सुगंध वास्तव में मॉरीशस के द्वीपीय सौंदर्य में रची बसी हिंदी साहित्य की अनूठी सुगंध के प्रति समर्पित पुस्तक है। उन्होंने अपनी पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक गिरमिटिया विरासत से लेकर समकालीन अनुभव के रंगों को समेटे हुए हैं।
7.डॉ. नीलम वर्मा की पुस्तक एक चित्रात्मक पुस्तक : रामायण (हाइकू कविता) है। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक बाल पाठकों के लिए चित्रों के माध्यम से रामायण की कथा प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य संस्कार, संस्कृति और कथा–परंपरा को सरल रूप में पहुँचाना है।
8. डॉ मीरा सिंह, अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य प्रवाह अमेरिका की संस्थापक की दो पुस्तकों टूटते पंखों की उड़ान, उपन्यास और जीजिविषा, कहानी संग्रह की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। उन्होंने बताया कि कहानी संग्रह पुस्तक संघर्षों के बीच भी आशा और साहस की उड़ान की कथा है। इसमें जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबरते पात्रों की सशक्त कहानियाँ हैं।
9. सुश्री आशा शर्मा की दो पुस्तकों स्वयं से अनुभूति एवं दूसरी किताब काव्यांजलि का लोकार्पण किया गया। लेखिका के अनुसार ये पुस्तकें आत्मानुभूति, आत्मसंवाद और आत्मबोध की रचनाएँ है। ये पाठक को स्वयं से जुड़ने और भीतर झाँकने के लिए प्रेरित करती है।
10.श्री ललित कुमार सक्सेना की पुस्तक सफर जो गुजर गया के संदर्भ मेंउन्होंने कहा कि यह कृति स्मृतियों, अनुभवों और जीवन–यात्रा के पड़ावों का भावात्मक लेखा–जोखा है। इसमें अतीत की झलक और वर्तमान का विवेक समाहित है।
11.सुश्री सतविंदर कौर की पुस्तक ज़िंदगी हौसलों से – जहाँ उम्मीद हार नहीं मानती अपने आप में यह पुस्तक सकारात्मक सोच, साहस और संघर्ष से जीवन को सँवारने का संदेश देती है। यह युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है।
12.सुश्री किरण खन्ना की भारतीय हिंदी और हिंदीतर साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा विवेचन विविध विमर्श पुस्तक के लोकार्पण के समयउन्होंने कहा कि यह शोधपरक कृति हिंदी और अन्य भाषाओं के साहित्य में एक तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है और साहित्यिक छवि का विश्लेषण है।
13. प्रो. रवि शर्मा की पुस्तक मधुप : चैन की बंसी एक व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण हुआ। वह स्वयं भी वर्तमान में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में हिंदी विभागाध्यक्ष है। उनकी अभी तक 40 पुस्तकें तथा युवाओं, महिलाओं तथा व्यंग्य विषयक 500 से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई है।
14. डॉ. सुधा शर्मा की पुस्तक पुष्प : रिश्तों का सच एक कहानी संग्रह है। उन्होंने सभागार में उपस्थित सभी विद्वानों एवं साहित्य प्रेमियों को कहा कि यह कहानी–संग्रह रिश्तों की जटिलताओं, सच्चाइयों और भावनात्मक उतार–चढ़ाव को उजागर करता है। इसमें जीवन के यथार्थ को संवेदनशीलता को प्रस्तुत किया गया है।
पुस्तक लोकार्पण सत्र हिंदी साहित्य की विविध विधाओं, विषयों और दृष्टियों का सजीव परिचय था। रचनाकारों के संक्षिप्त किंतु सारगर्भित वक्तव्यों ने श्रोताओं को पुस्तकों से जुड़ने में उत्सुकता प्रदान की। संपूर्ण सत्र साहित्यिक सौहार्द, विचार–विनिमय और रचनात्मक ऊर्जा के साथ धन्यवाद ज्ञापन सहित सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
इस सत्र का संचालन भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग की श्रीमती नर्मदा कुमारी, वरिष्ठ अनुवादक ने किया। शिवांगी सिंह के कुशल संयोजन से सत्र अनुशासित, प्रभावशाली एवं समयबद्ध रूप में संपन्न हुआ।
सत्र – पुस्तक लोकार्पण
स्थान – दर्शनम् -2 सभागार – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली
सत्र दिनांक – 10 जनवरी, 2026
समय – 4:00 से 5:30 तक
