प्रख्यात लेखक : हमारा समय – मेरी दृष्टिसत्र समर्पित- स्व. डॉ. रामदरश मिश्र (रिपोर्ट)

यह सत्र शतक पुरुष पद्मश्री रामदरश मिश्र को समर्पित किया गया था। सत्र का प्रारंभ प्रो. डॉ स्मिता मिश्र ने अपने पिता रामदरश मिश्र जी से जुड़ी हुई यादों व उनकी लेखन यात्रा को स्मरण करते हुए किया। उन्होंने स्वर्गीय मिश्र जी के साहित्य सरोकार से जुड़े कुछ अनूठे प्रसंग भी सुनाए।
यह सत्र दो भागों में बाँटा गया था- प्रथम सत्र में “मेरी शब्द यात्रा” के अंतर्गत साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवयित्री और लेखिका सुश्री गगन गिल प्रख्यात कवियत्री के रूप में उपस्थित थीं। विशिष्ट अतिथि की भूमिका में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर, आलोचक समीक्षक, भाषा विशेषज्ञ व लेखिका डॉ रेखा सेठी थीं। डॉ रेखा सेठी ने गगन गिल जी से उनके साहित्य सरोकार पर परिचर्चा की। गगन जी ने साहित्य साधना से जुड़े सभी प्रश्नों का उपयुक्त उत्तर दिया।
प्रमुख वक्ता थीं अध्यापिका, आलोचक व कवयित्री युवा लेखिका सुश्री सुदीप्ति। सुदीप्ति जी ने गगन गिल की कविताओं में स्त्री के भीतर के चिंतन विमर्श के साथ-साथ उनकी कविता में प्रस्तुत बिम्बों पर विस्तृत सम्यक् विश्लेषण किया । दूसरी प्रमुख वक्ता लेखिका व पत्रकार सुश्री पूनम अरोड़ा
ने गगन गिल की कविता के विषयों व विभिन्न आयामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी ।
इन चर्चाओं और समीक्षाओं से यह स्पष्ट हुआ कि गगन जी की कविताओं में जीवन दर्शन का आधार अध्यात्म से उपजा है। इस के बाद गगन जी से उनकी कुछ कविताओं को सुनाने का आग्रह किया गया। गगन गिल ने मुस्कुराते हुए अपने चिर परिचित अंदाज़ में कई कविताएँ प्रस्तुत कीं जिन्हें श्रोताओं ने बहुत सराहा।
सत्र का कुशल संचालन लेखिका व समीक्षक अनीता वर्मा सेठी द्वारा किया गया ।
सत्र के दूसरे भाग में प्रतिष्ठित वरिष्ठ साहित्यकार, व्यास सम्मान से सम्मानित डॉ चित्रा जी आमंत्रित थीं लेकिन अपरिहार्य कारणों से वह उपस्थित नहीं हो पाईं। आलोचक, अनुवादक व चित्रा मुद्गल की बहू सुश्री शैली मुद्गल ने चित्रा मुद्गल की एक कहानी का पाठ किया
प्रमुख वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार, कहानीकार और संपादक श्री महेश दर्पण उपस्थित थे जिन्होंने चित्रा मुद्गल जी की कहानियों, उपन्यासों, उनकी लेखन शैली, पात्रों व कथ्य शिल्प पर विस्तृत चर्चा की।
साहित्यकार, शिक्षिका एवं लेखिका डॉ करुणा शर्मा ने चित्रा मुद्गल जी के व्यक्तित्व , आत्मीय सम्बन्धों पर चर्चा करते हुए चित्रा मुद्गल के विस्तृत लेखन पर प्रकाश डाला।
सत्र का संचालन जयपुर से आई प्रतिष्ठित कहानीकार, उपन्यासकार, लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने किया।
अंत में वरिष्ठ कवि श्री राजेश्वर वशिष्ठ जी ने सभी वक्ताओं, अतिथियों और श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया और समय की मर्यादा का ध्यान रखते हुए सत्र के समापन की घोषणा की। इस प्रकार “प्रख्यात लेखक : हमारा समय – मेरी दृष्टि सत्र एक गंभीर, विचारोत्तेजक और समृद्ध साहित्यिक संवाद के साथ संपन्न हुआ।
रिपोर्ट प्रस्तुति– डॉ. संध्या सिलावट
सत्र – प्रख्यात लेखक : हमारा समय – मेरी दृष्टि
सत्र समर्पित- स्व. डॉ. रामदरश मिश्र
स्थान – उमंग सभागार – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली
सत्र दिनांक -10 जनवरी, 2026
समय- 04:00 से 05:30 बजे तक
