स्वर, साधना और परंपरा का अद्भुत संगम

विश्व संगीत दिवस एवं संगीत-विदुषी डॉ. प्रेमलता शर्मा की पुण्य-स्मृति में इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, कलाकोश संविभाग तथा अखिल भारतीय गान्धर्व महाविद्यालय मंडल, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में फिल्म “आरव : मिरज का तानपुरा” का लोकार्पण एवं संगीतिक प्रस्तुति सम्पन्न हुई। कार्यक्रम में कुमार गंधर्व के शिष्य एवं प्रख्यात संगीत विशेषज्ञ पंडित सत्यशील देशपांडे ने अपनी प्रभावशाली संगीतिक प्रस्तुति से श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया। पद्मश्रीऔर इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र न्यासी प्रो. भरत गुप्त ने तानपुरा के इतिहास, उसकी सांगीतिक महत्ता तथा भारतीय संगीत परंपरा में विभिन्न वाद्ययंत्रों की भूमिका पर विचार साझा किए।

केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि नई पीढ़ी को मूल वाद्यों के साथ संगीत की साधना के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। इससे भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। वहीं कलाकोश विभागाध्यक्ष प्रो. सुधीर लाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा और इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। प्रख्यात कला-विदुषी एवं शास्त्रीय संगीत गायिका डॉ. सुभद्रा देसाई ने तानपुरा से जुड़ी अपनी स्मृतियों और अनुभवों को साझा करते हुए इस वाद्य की सांस्कृतिक एवं भावनात्मक महत्ता को रेखांकित किया। अखिल भारतीय गान्धर्व महाविद्यालय मंडल, मुंबई के कुलसचिव प्रो. विश्वास जाधव ने फिल्म निर्माण सहित अन्य वाद्य की महत्ता को रेखांकित किया। यह आयोजन केवल एक फिल्म के लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संगीत की शाश्वत परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और तानपुरे जैसे मूल वाद्यों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सार्थक सांस्कृतिक प्रयास बन गया।
