पावस गीत गोष्ठी में बही गीतों की रसधारा

नई दिल्ली, 3 अगस्त। दिल्ली में आयोजित पावस गीत गोष्ठी साहित्य और संगीत के सुरों से सराबोर रही। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित गीतकारों ने वर्षा, प्रकृति, भारतीय संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित अपने गीतों का भावपूर्ण पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन देश के सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ. ओंकार त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ऋषि कुमार शर्मा (पूर्व उपसचिव, हिंदी अकादमी, दिल्ली) ने कहा कि गीत काव्य की अद्भुत विधा है, जिसमें भारतीय जीवन-मूल्य, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के दर्शन होते हैं। गीत लिखना अत्यंत दुष्कर कार्य है, इसलिए अनेक रचनाकार अन्य विधाओं की ओर चले जाते हैं। गीत जैसी विधा को जीवंत बनाए रखने के लिए युवाओं को इससे जोड़ना समय की आवश्यकता है।


कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि डॉ. सुशील द्विवेदी (सहायक संपादक, साहित्य अकादमी) ने कहा कि भारतीय छंद, गीत और दर्शन की महान परंपरा के उत्तराधिकारी होने के नाते आपके गीतों में भारतभूमि की गंध, उस का एकात्मबोध, उसकी भाषाएं और छंद-विधान अनिवार्य हैं। केवल धुन और प्रस्तुति से नहीं, बल्कि मौलिक संवेदना और भारतीयता से ही प्रामाणिक गीत का सृजन संभव है।
कार्यक्रम के संयोजक एवं सुप्रसिद्ध शायर-गीतकार शिवकुमार बिलग्रामी ने सावन और भगवान शिव की महिमा पर आधारित अपनी चर्चित रचनाओं “कौन दिशा में छुप कर बैठा ओ गंगाधर पर्वतवासी” तथा “कल्पवृक्ष की शाखाओं पर बंधे हुए हैं अनगिन धागे…” का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं की खूब सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम के संचालक डॉ. ओंकार त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि “जब गद्य असमर्थ हो जाता है, तब कविता जन्म लेती है और जब कविता भी अपनी अभिव्यक्ति में असमर्थ हो जाती है, तब गीत जन्म लेता है। गीत रस है, जो स्वयं रस-वर्षा करता है और समाज को रसग्राही बनाता है।”
गोष्ठी में डॉ. ओंकार त्रिपाठी, शिवकुमार बिलग्रामी सहित डॉ. राजीव कुमार पांडेय, विनय विक्रम सिंह ‘मनकही’, नेहा वैद, नीना सहर, पीयूष कांति, नरेंद्र मस्ताना, डॉ. ईश्वर सिंह, शोभा सचान, डी.पी. सिंह और शैलजा सिंह ने अपने गीतों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस कार्यक्रम में उपस्थित साहित्य प्रेमी एवं गीत-रसिकों ने झूम-झूमकर गीतों का आनंद लिया। बहुत दोनों बाद दिल्ली में एक विशुद्ध गीत गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate This Website »