सात रंगों से सजा था फगरे का व्यक्तित्व : पुणे में श्रद्धांजलि सभा

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पुणे। सात रंगों के चक्रों को यदि तेज गति से घुमाया जाए, तो केवल सफेद रंग दिखाई देता है और सातों रंग उसमें घुल-मिल जाते हैं। ज. गं. फगरे का व्यक्तित्व भी इसी तरह सात रंगों से भरा और तेज गति से चलायमान था। उनके व्यक्तित्व के सारे रंग हर कोई नहीं देख पाता था। सबको एक ही रंग दिखाई देता था, फगरे नामक शुभ्र राजहंस का। वरिष्ठ शिक्षाविद न. म. जोशी ने राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पुणे स्थित सभागार में यह बात कही, सभी अपने-अपने नज़रिए से फगरे को याद कररहे थे ।
समिति के संचालक रहे फगरे के निधन पर रविवार, 4 अक्टूबर को समिति की ओर से कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। पूरा हॉल लोगों से भरा था और सबकी आँखें नम थीं। समिति के कार्याध्यक्ष डॉ सुनील देवधर ने कहा कि फगरे जी के प्रति यह स्मृतियों का समर्पण और आदरांजलि अर्पण, की सभा है ।इस सभा के आयोजन का उद्देश्य यही था कि जो लोग उनके निधन पर उनके अंतिम दर्शन नहीं कर सके, वे अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। मंचासीन जोशी ने फगरे और उनकी पत्नी पद्मा को अद्वैत का उदाहरण बताया। श्रीमती फगरे की उपस्थिति मानो उस अद्वैत का साक्षात्कार करा रही थी। उनके परिवार के सदस्य तो उपस्थित थे ही, हिंदी जगत से जुड़ा उनका विशाल परिवार भी इस सभा में आया था। सोलापुर से बंडो पंत पाटिल आए थे, तो रत्नागिरी से गोविंद राठौर नासिक से बी एच गाड़ी लोहार कोल्हापुर से प्रकाश सु ता र।
महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा की नीला बोरवर्णकर एवं रवि किरण गणंगे ने एक स्वर में कहा कि सभा और समिति के कार्य एक ही दिशा में रहे हैं। सभा का संचालन करते हुए स्वरांगी साने ने उपस्थित लोगों को अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया, और साथ ही जम्मू-कश्मीर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के संचालक डॉ. भारत भूषण शर्मा और प्रसिद्ध साहित्यकार दामोदर खडसे, वर्धा समिति के प्रधानमंत्री श्री हेमचंद वैद्य द्वारा समिति को भेजे गए श्रद्धासुमनों का वाचन भी किया। समिति के उपाध्यक्ष सदानंद महाजन के अलावा भालेराव, माधव माटे, इनामदार, स्नेहसुधा कुलकर्णी, विनया जोशी, मधुमिलिंद मेंहदले, , श्री डांगे, श्री सप्रे, गरुड़ आशा रावत आदि ने भी आदरांजलि अर्पित की। हिंदी जगत से डॉ. कांति लोधी, प्रसाद जोशी, अलका अग्रवाल, संजय भारद्वाज तथा डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव ने फगरे की स्मृतियाँ ताजा कीं। सुमित पॉल, राव , मिलिंद मजूमदार संजय लेले सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कर्मठ एवं समर्पित ज. गं. फगरे का निधन हिंदी जगत की अपूरणीय क्षति है। वे हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए आजीवन संघर्षशील रहे। अंत में दो मिनट का मौन रखकर सभा का समापन किया गया।

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