डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन-यूके तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार के साप्ताहिक कार्यक्रम के अंतर्गत “डिजिटल युग में हिंदी पत्रकारिता” विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और युवा विद्यार्थियों ने डिजिटल पत्रकारिता की संभावनाओं, चुनौतियों, भाषायी शुद्धता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का स्वागत लेखिका स्वरांगी साने ने किया।
अध्यक्षीय संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं फिल्मकार विजय राणा ने पत्रकारिता की नैतिकता, हिंदी भाषा की समृद्धि और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर भ्रामक सूचनाओं और समाचारों को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति लोकतंत्र तथा जनमत को प्रभावित करती है। हिंदी को सरल बनाने के नाम पर उसकी शब्द-संपदा सीमित करने के बजाय विविध शब्दों और अभिव्यक्तियों को अपनाकर समृद्ध बनाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता में तथ्यपरकता, संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध और ज्ञान-विस्तार का उपयोगी साधन है, किंतु उसका प्रयोग रचनात्मकता और विवेक के साथ होना चाहिए।
विशेष वक्तव्य में भारतीय अधिवास केंद्र के निदेशक एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रो. डॉ. के. जी. सुरेश ने हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक महत्त्व और डिजिटल युग की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पत्रकारिता में भाषा की शुद्धता, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और विश्वसनीयता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोगी साधन अवश्य है, लेकिन वह मानवीय विवेक और खोजपरक पत्रकारिता का विकल्प नहीं हो सकती। पत्रकारिता में नैतिकता, विषय-केंद्रित दृष्टिकोण और संवादपूर्ण भाषा का विशेष महत्त्व है।
मुख्य अतिथि एवं आजतक के वरिष्ठ पत्रकार सईद अंसारी ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इन पर अत्यधिक निर्भरता मानवीय संवेदना, चिंतन और शोध क्षमता को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने युवा पत्रकारों को समाचार-पत्र, संपादकीय और साहित्य पढ़ने तथा हिंदी भाषा, व्याकरण और उच्चारण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता और प्रभाव बनाए रखने के लिए अध्ययन, परिश्रम और नैतिकता अनिवार्य हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पुस्तकों से मित्रता करने, निरंतर सीखने और तकनीक के साथ अपनी बुद्धि का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि एवं अमर उजाला (डिजिटल) के संपादक जयदीप कर्णिक ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने हिंदी पत्रकारिता के विस्तार और विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद भाषा की शुद्धता, मानवीय संवेदना और पत्रकारिता की विश्वसनीयता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने युवा पत्रकारों को समाचार-पत्र, साहित्य और शब्दकोश पढ़ने तथा हिंदी के व्याकरण एवं शब्द-संपदा को समृद्ध करने का आग्रह किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में मानवीय विवेक और संपादकीय दृष्टि को महत्त्वपूर्ण बताया।
सान्निध्य वक्तव्य में वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल शर्मा ‘जोशी’ ने कहा कि डिजिटल पत्रकारिता ने समाचारों की गति और पहुँच बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ सनसनीखेज प्रस्तुति, टीआरपी की होड़ और व्यावसायिक हितों जैसी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल पाठकों की रुचि के अनुसार समाचार प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि सत्य, निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व को बनाए रखना भी है। उन्होंने हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग का समर्थन किया तथा पत्रकारिता में नैतिकता, विवेक और मानवीय दृष्टि को सर्वोपरि रखने पर बल दिया।
विमर्श सत्र में फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे के मीडिया एवं संचार विभाग के आर्यन कुमार ने कहा कि भाषा किसी व्यक्ति के ज्ञान का मापदंड नहीं, बल्कि संवाद का माध्यम है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को कमतर आँकने की प्रवृत्ति से बचने और अपनी भाषा का सम्मान करने की आवश्यकता बताई। डिजिटल पत्रकारिता में समाचारों के सत्यापन, मीडिया नैतिकता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि केवल मोबाइल होने से कोई पत्रकार नहीं बन जाता। पत्रकारिता के लिए तथ्यों की जाँच और सामाजिक उत्तरदायित्व आवश्यक हैं। उन्होंने तकनीक के साथ पत्रकारिता के मूल्यों और हिंदी के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के डिजिटल विभाग के अतिथि कुमार शर्मा ने कहा कि डिजिटल युग में समाचारों का प्रसार तेज हुआ है, लेकिन उनकी सत्यता और प्रमाणिकता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। भ्रामक खबरें समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए तथ्यों की जाँच और विवेकपूर्ण दृष्टि आवश्यक है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उपयोगी साधन बताते हुए कहा कि तकनीक मानवीय विवेक और संवेदनशीलता का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता में वर्तनी की शुद्धता और भाषा-कौशल के महत्त्व पर बल देते हुए युवा पीढ़ी से अपनी भाषायी दक्षता मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र तथा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की शोधार्थी प्रीति साहू ने किया। अंत में वैश्विक हिंदी परिवार, दिल्ली इकाई के अध्यक्ष ऋषि कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
रिपोर्ट : अजय शर्मा

