रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीलंका के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य नृत्य नाटिका “रावणेश्वर” की मनमोहक प्रस्तुति संपन्न हुई।

अभिव्यक्ति, संगीत व नृत्य

इस नाटिका में श्रीलंकाई पारंपरिक श्रीलंकाई वैशभूषा, मुखौटे, नृत्यशैली, संगीत और रंगमंचीय प्रस्तुति का समन्वय देखने को मिला । कलाकारों द्वारा भाव-भंगिमाओं (अभिनय), कथानक-वर्धक संवाद और नृत्य-मंचन के माध्यम से दर्शकों को कथा-भूमि में खींचा जाता है।

मंच-चित्र, प्रकाश-प्रभाव और समूह-नृत्यों के संयोजन से यह प्रस्तुति न केवल दृश्य-रूप से आकर्षक है, बल्कि भावनात्मक दृष्टि से भी गहरी छाप छोड़ती है।

डॉ अमिला दमयंती, विभागाध्यक्ष, नृत्य एवं नाट्य संकाय, इंडियन एंड एशियन डांस विभाग, श्रीलंका ने बताया कि “‘रावणेश्वर’ एक डांस ड्रामा है, जिसे हमने वर्ष 2019 में कुम्भ मेले के लिए तैयार किया था। मैंने अपनी पीएच.डी. भारत और श्रीलंका की रामलीला पर तुलनात्मक अध्ययन विषय पर की है। इसी शोध कार्य के दौरान श्रीलंका के रामायण से संबंधित पात्रों और कथाओं का गहन अध्ययन करने के बाद, मैंने इस डांस ड्रामा की रचना की है।

‘रावणेश्वर’ लगभग 55 मिनट की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति है, जिसमें श्रीलंका की पारंपरिक तीन प्रमुख नृत्य शैलियों – कैंडियन डांस, लो कंट्री डांस और सबरगमो डांस का समावेश किया गया है। इन शैलियों की अमुद्राओं, अभिव्यक्तियों और तालों को भारतीय नाट्य शैली के तत्वों के साथ जोड़कर इस अनोखी प्रस्तुति की संरचना की गई ।

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