5 नवंबर 2025,  लेखक गाँव, देहरादून में आयोजित स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 के समापन समारोह में उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी की उपस्थिति रही।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून के थानो में बना लेखक गांव महज ईंट-पत्थर की संरचना नहीं, बल्कि विचारों का प्रतिविंव है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रेरणा से बने इस लेखक गांव से समाज को नई दिशा तो मिलेगी ही, आने वाली पीढ़ियां भविष्य का निर्माण करना भी सीखेंगी। लेखक गांव में स्पर्श हिमालय महोत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिन आयोजित सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कि पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की ओर से लेखक गांव के रूप में अभिनव पहल की गई है। आज पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जीवित होते तो इसे देखकर उन्हें बेहद खुशी होती। क्योंकि, उन्होंने हमें सिखाया की शब्द भी राष्ट्र निर्माण के शस्त्र बन सकते हैं। लेखक गांव आने वाले वर्षों में विचारों का ऐसा तीर्थ स्थल बनेगा, जहां नई पीढ़ी अपने विचारों को जागृत करेगी और एक नए आविष्कार को जन्म देगी। साथ ही देश की प्राचीन परंपरा को भी आधुनिक दृष्टि से जोड़ने का कार्य यहां होगा। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव का समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। भविष्य में यह स्थल विचारों का साधना स्थल बनेगा। कहा कि प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित करने का कार्य शुरू किया है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में साहित्य का प्रवाह निरंतर जारी रहे। उम्मीद है साहित्यकार, कलाकार व विद्वानों के सहयोग से हम संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में सफल होंगे।

हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पद्मश्री डा. हरमोहिनिंदर सिंह बेदी ने कहा कि देश की राष्ट्रीय अस्मिता उसकी भाषा, संस्कृति और मूल्यों में निहित है। लेखक गांव उस आत्मा का सजीव प्रतीक है, जहां शब्द साधना बनते हैं और सर्जन राष्ट्र के प्रति समर्पण कर रूप लेता है। लेखक गांव के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि स्पर्श हिमालय महोत्सव में भारत सहित 60 से अधिक देशों के साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद और विचारकों ने सहभागिता की। यहां योग से लेकर पर्यावरण, भाषा से लेकर शोध और साहित्य से लेकर राष्ट्र तक हर सत्र ने देश की सभ्यता, उसकी वैचारिक गहराई और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को नई दिशा दी।

पूर्व रक्षा सचिव डा. योगेंद्र नारायण ने कहा कि लेखक गांव महज एक सांस्कृतिक परियोजना नहीं, देश की बौद्धिक चेतना का पुनर्जागरण है। यहां साहित्य, समाज और राष्ट्र एक साथ संवाद करते हैं।

इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. योगेन्द्र नारायण जी (पूर्व रक्षा सचिव, भारत सरकार), ले. जनरल अनिल कुमार भट्ट (से. नि.), पद्मश्री डॉ. हरमोहिन्दर सिंह बेदी जी (कुलाधिपति, हिमाचल विश्वविद्यालय) सहित अनेक वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

बालकृष्ण चमोली, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सुभाष भट्ट, शादाब शम्स, विदुषी निशंक, आरुषि निशंक, श्रेयसी निशंक आदि भी मौजूद रहे।

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