पंजाबी, कश्मीरी, उर्दू, डोगरी : स्थिति, विकास की दिशाएँ (रिपोर्ट)

पंजाबी, कश्मीरी, उर्दू, डोगरी : स्थिति, विकास की दिशाएँ सत्र की अध्यक्षता प्रबुद्ध विद्वान डॉ. रविन्द्र सिंह, पंजाबी विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय ने की। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ रविन्द्र ने भाषाओं के संरक्षण संपुष्टिकरण और संवर्धन को संस्कृति के संरक्षण के लिए बेहद अनिवार्य बताया तथा सभी वक्ताओं की अभिव्यक्ति पर अपनी संक्षिप्त किंतु सार्थक और सटीक टिप्पणी देते हुए सत्र को सफल और उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भाषाओं के निरन्तर विकास हेतु अनिवार्य हैं और सरकारों को भाषाई संरक्षण हेतु सार्थक विमर्श देते हैं।
डोगरी भाषा के प्रखर विद्वान पद्मश्री डॉ मोहन सिंह डोगरी ने मुख्य वक्ता की भूमिका में डोगरी भाषा के विषय में बताया कि सन् 2020 में, जम्मू-कश्मीर राजभाषा अधिनियम के तहत इसे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और कश्मीरी के साथ केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषाओं में शामिल किया गया है। यह 2003 में 92वें संविधान संशोधन के माध्यम से भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल की गई थी।
एनसीपीयूएल के अध्यक्ष डॉ शम्स इकबाल ने उर्दू भाषा के विषय में बताते हुए कहा कि यह विश्व की शीर्ष 10 सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जो पिछले 50 वर्षों में तेजी से विकसित हुई है और 2021 तक इसके बोलने वालों की संख्या लगभग 23.17 करोड़ तक पहुँच गई। पाकिस्तान की यह एकमात्र राष्ट्रीय भाषा है, जबकि भारत के कई राज्यों (जैसे- कश्मीर, यूपी, बिहार) में यह एक आधिकारिक भाषा है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म और साहित्य (विशेषकर रेख्ता) के माध्यम से अपनी पहचान बनाए हुए है।
दोनों वक्ताओं ने इन भाषाओं के इतिहास से वर्तमान तक की विकास यात्रा का बख़ूबी वर्णन किया और संप्रति इन भाषाओं के विकास पर विमर्श प्रस्तुत किया।
कश्मीर से आयी विदुषी डॉ मुक्ति शर्मा ने कश्मीरी भाषा की यथास्थिति को केंद्र में रखकर संप्रति इस भाषा के संवर्धन हेतु राजकीय प्रावधानों के विषय में जानकारी दी तो दिल्ली विश्वविद्यालय से आयी डॉ आशा भंडारी जी ने डोगरी भाषा के साहित्य सृजन, क्रमिक विकास, सरंक्षण और संवर्धन पर बहुत सारगर्भित व्याख्यान के माध्यम से प्रकाश डाला।
पंजाबी भाषा के कहानी साहित्य के विषय में डॉ जसविंदर बिंद्रा ने संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ किरण खन्ना अध्यक्ष स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग डी. ए. वी. कॉलेज अमृतसर ने किया और पंजाब में रचे गए हिन्दी साहित्य की विकास यात्रा, पंजाब से हिंदी साहित्य की प्रमुख धारा में जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकारों का ज़िक्र करते हुए पंजाब में हिंदी साहित्य सृजन की स्थिति पर विस्तृत प्रकाश डाला।
सत्र – पंजाबी, कश्मीरी, उर्दू, डोगरी : स्थिति, विकास की दिशाएँ
स्थान – दर्शनम् – 1 सभागार – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली
सत्र दिनांक – 10 जनवरी, 2026
समय – 4:00 से 5:30
