पद्य रचना-पाठ (रिपोर्ट)

पद्य रचना-पाठ सत्र का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय एवं साहित्यिक वातावरण में संपन्न हुआ। सत्र की अध्यक्षता श्री बृजेन्द्र त्रिपाठी ने की। उन्होंने साहित्य की सामाजिक भूमिका, उसकी संवेदनात्मक शक्ति और समकालीन कविता की प्रासंगिकता पर विचार रखते हुए सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक संवाद को सशक्त बनाने के साथ-साथ नई दृष्टि और चेतना का निर्माण करते हैं।
संयोजक डॉ. शालिनी शुक्ला ने मंच से सभी आगंतुकों, अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं का हार्दिक स्वागत किया और इस साहित्यिक आयोजन के महत्व पर संक्षिप्त रूप से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का कुशल एवं सधे हुए ढंग से संचालन श्री मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ द्वारा किया गया। उन्होंने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा सत्र को एक अनुशासित और रसपूर्ण दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मधु चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में साहित्य को मानवीय मूल्यों, संवेदना और सामाजिक चेतना का संवाहक बताया। उन्होंने कहा कि कविता केवल सौंदर्यबोध तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज के यथार्थ, पीड़ा, संघर्ष और आशाओं को स्वर देने का सशक्त माध्यम भी है। कवियों की रचनात्मक जिम्मेदारी पर बल देते हुए उन्होंने उपस्थित रचनाकारों और श्रोताओं को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया।
इसके पश्चात कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों — श्री राजेश चेतन, डॉ. नीलम वर्मा, डॉ. सविता चड्ढा एवं डॉ. मंजू गुप्ता ने अपने संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली वक्तव्यों के माध्यम से साहित्य, कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विविध पक्षों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने समकालीन साहित्य की चुनौतियों, रचनात्मक ईमानदारी और संवेदनशील पाठक की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कविताओं का रचना-पाठ रहा, जिसमें आमंत्रित कवियों एवं कवयित्रियों ने अपनी सशक्त, संवेदनशील और भावप्रवण रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विविध विषयों, शैलियों और भावभूमियों से सजी इन रचनाओं ने सभागार को साहित्यिक ऊष्मा और रचनात्मक ऊर्जा से भर दिया।
रचना-पाठ में सहभागिता करने वाले रचनाकार थे — डॉ. अरुणा गुप्ता, श्री राजेश्वर वशिष्ठ, श्री अरविन्द ‘पथिक’, सुश्री आशमा कौल, श्री शशिकांत, सुश्री निशा भार्गव, श्री मनोज अबोध, डॉ. आभा चौधरी, श्री अरुण कुमार ‘अरुण’, सुश्री मनोरमा, श्री दिवाकर चौबे तथा सुश्री मोनिका शर्मा। सभी रचनाकारों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने एकाग्रता एवं उत्साह के साथ सुना और सराहा। कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान करते हुए डॉ. अवधेश तिवारी ‘भावुक’, डॉ. जसविंदर कौर ‘बिंद्रा’ तथा सुश्री रचना ‘पथिक’ ने काव्य-गायन प्रस्तुत किया। उनके स्वरबद्ध काव्य-पाठ ने वातावरण को भावनात्मक और संगीतमय बना दिया, जिसे श्रोताओं ने विशेष सराहना और तालियों के साथ स्वीकार किया।
रचना-पाठ एवं काव्य-गायन के उपरांत श्रोताओं द्वारा संक्षिप्त प्रतिक्रियाएँ एवं टिप्पणियाँ प्रस्तुत की गईं। श्रोताओं ने कवियों की रचनात्मकता, विषय-विविधता तथा आयोजन की समग्र गुणवत्ता की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक सुश्री शिवांगी सिंह ने समापन वक्तव्य एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी अतिथियों, कवियों, श्रोताओं, आयोजकों तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उनके धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही यह साहित्यिक सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सत्र – पद्य रचना-पाठ
स्थान – दर्शनम् – 2 सभागार – इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली
सत्र दिनांक -09 जनवरी 2026
समय 04:00 से 5:30 बजे तक
