अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद और वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में ‘डायस्पोरा से संवाद’ एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया

अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद और वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में ‘डायस्पोरा से संवाद’ एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रवासी भारतीय समुदाय (डायस्पोरा) के माध्यम से हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने तथा उनसे सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक परिदृश्य में हिंदी की वर्तमान स्थिति, चुनौतियाँ, अवसर और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न देशों से आए प्रतिष्ठित वक्ताओं ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के वैश्विक प्रसार पर अपने अनुभवपूर्ण विचार साझा किए । सबसे पहले नीलांति राजपक्ष जी (श्रीलंका) ने श्रीलंका से हिंदी की स्थिति, स्थानीय समुदाय में हिंदी की भूमिका और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर प्रकाश डाला। कथाकार रीता कौशल जी (सिंगापुर /ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी प्रवासी लेखिका) ने प्रवासी साहित्य में हिंदी कहानी और उपन्यास की भूमिका, विदेशों में हिंदी रचनात्मकता की चुनौतियाँ एवं सफलताओं पर विस्तार से चर्चा की। वे लंबे समय से प्रवासी हिंदी साहित्य से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। डेविड एल्मर जी ने विदेशी दृष्टिकोण से हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व, सीखने की प्रक्रिया और सांस्कृतिक पुल के रूप में हिंदी पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप में श्री वीरेंद्र गुप्ता जी (पूर्व अध्यक्ष, एआरएसपी तथा पूर्व राजदूत) ने हिंदी को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए डायस्पोरा की भूमिका पर जोर दिया। श्री श्याम परांडे जी (संयुक्त सचिव, एआरएसपी) ने वैश्विक हिंदी प्रसार की सरकारी एवं संस्थागत पहलों पर प्रकाश डाला। श्री नारायण जी (निदेशक, एआरएसपी) ने हिंदी की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत करने की आवश्यकता और डायस्पोरा से जुड़ाव पर विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. दर्शन पांडेय जी (प्राचार्य, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने की। उन्होंने अपनी अध्यक्षीय टिप्पणी में हिंदी शिक्षा, साहित्य और डायस्पोरा के बीच मजबूत सेतु बनाने की आवश्यकता पर बल दिया । धन्यवाद ज्ञापन श्री अनिल जोशी जी (अध्यक्ष, वैश्विक हिंदी परिवार) ने किया, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया तथा हिंदी के वैश्विक मंच को और सशक्त बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशील द्विवेदी ने किया। पूरे कार्यक्रम का संयोजन प्रो. गोपाल अरोड़ा जी ( सचिव, एआरएसपी) व ऋषि कुमार शर्मा जी (पूर्व उप-सचिव, हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार) ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया। उनके प्रयासों से कार्यक्रम सुव्यवस्थित और प्रभावशाली रहा।
यह कार्यक्रम डायस्पोरा के माध्यम से हिंदी को न केवल जीवंत रखने, बल्कि उसे वैश्विक भाषा के रूप में और मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हुआ। ऐसे आयोजन हिंदी की वैश्विक यात्रा को नई गति प्रदान करते हैं और प्रवासी समुदाय को अपनी भाषा-संस्कृति से गहराई से जोड़ते हैं।
रिपोर्ट – डॉ. सुशील द्विवेदी
