राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. शैलजा सक्सेना के गीत नाट्य पर परिचर्चा का आयोजन किया

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. शैलजा सक्सेना के गीत नाट्य पर परिचर्चा का आयोजन किया । डॉ. सक्सेना की “अंत की अनंत गाथा : भीष्म “ पुस्तक सरशैय्या पर लेटे हुए भीष्म के जीवन की आधुनिक गाथा है । अभी इस सदी को महज दो दशक हुए हैं। किंतु अपने कैशोर्य में इसने मनुष्य के खंडित, एकाकी, आत्महंता और क्रूर जैसे चरित्र को समझने का प्रयास किया है और उसका निदान अपने भारतीय चरित्रों के ज़रिए खोज निकाला है । बीसवीं सदी में मनुष्य अश्वत्थामा था तो इस सदी में भीष्म । हमें भीष्म के चरित्र को जरूर समझना चाहिए। बाणों की शैय्या पर अनंत पीड़ा सहते हुए भी पांडवों को धर्म, सत्य व जीवन मूल्य की शिक्षा देते हैं । एक अर्थ में – वे आपदा में अवसर की तलाश करते हैं ।
डॉ. शैलजा जी को नई पुस्तक के लिए हार्दिक बधाई । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और वैश्विक हिंदी परिवार का आभार कि उन्होंने इस तरह के आयोजन से जुड़ने का मौक़ा दिया ।

रिपोर्ट – डॉ. सुशील द्विवेदी

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