काव्यांजलि : हिंदी, ओड़िया और बांग्ला काव्य-संगम
“गंगा-कावेरी संवाद श्रृंखला”

दिनांक 29 मार्च 2026 को विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन, भारतीय भाषा मंच, हिंदी राइटर्स गिल्ड तथा झिलमिल के तत्वाधान में वैश्विक हिंदी परिवार, बंगाल प्रांत की प्रस्तुति ‘गंगा-कावेरी संवाद श्रृंखला’ हिंदीतर प्रांत कार्यक्रम के अंतर्गत एक अत्यंत भावपूर्ण एवं सांस्कृतिक गरिमा से युक्त ऑनलाइन कार्यक्रम ‘काव्यांजलि: हिंदी, ओड़िआ और बांग्ला काव्य संगम’ का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन हिंदी भाषा और भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंधों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम वैश्विक हिंदी परिवार के संरक्षक, कार्यक्रम के अध्यक्ष, प्रख्यात साहित्यकार एवं हिंदी-सेवी श्री अनिल शर्मा जोशी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ, जिसमें 70 से अधिक देशों से जुड़े हिंदी के विद्वान, साहित्यकार एवं भाषा कर्मी उत्साहपूर्वक सहभागी बने। यह आयोजन केवल एक काव्य-पाठ न होकर एक सजीव गीति-आलेख के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसकी संकल्पना, रचना एवं अनुवाद प्रख्यात साहित्यकार, अनुवादक एवं शिक्षाविद्, शिक्षक प्रशिक्षण विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय की आदरणीय प्रोफेसर सोमा बंदोपाध्याय द्वारा अत्यंत सृजनात्मक रूप से संपन्न की गई।
इस कार्यक्रम के गीतों को सुमधुर स्वर एवं संगीतबद्धता प्रदान की सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री अनेश्वा चक्रवर्ती ने जिनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। साथ ही सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती किरण सिंह ने भी अपनी गीत-प्रस्तुति से कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।

इस सांस्कृतिक प्रवाह को और भी सजीव एवं समृद्ध बनाया कलकत्ता विश्वविद्यालय के एम.ए. द्वितीय वर्ष की प्रतिभाशाली छात्राएं -सुश्री सुमन शर्मा, पूजा कुमारी, रिया जायसवाल, कविता रजक, रश्मि भगत, पिंकी शर्मा, अंजली सिंह, अंजलि शाह एवं निशा साव ने जिनकी सहभागिता ने युवा संवेदनाओं को सशक्त अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं काव्य-पाठ डॉ. पारोमिता दास द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस गरिमामयी संध्या में विशिष्ट कवियों के रूप में उड़ीसा से डॉ. मिहिर साहू तथा पश्चिम बंगाल से डॉ. प्रवीण मुखोपाध्याय की उपस्थिति उल्लेखनीय रही जिससे कार्यक्रम में चार चांद लग गए। साथ ही, श्री अनिल जोशी की हिंदी कविता मां के साथ का खाना कविता का बांग्ला अनुवाद प्रस्तुत किया गया और उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष प्रतिष्ठा प्रदान की। कार्यक्रम का समाहार हिंदीतर प्रांत की संयोजिका अनुवादक एवं भाषा प्रौद्योगिकी की सक्रिय भाषा कर्मी श्रीमती नर्मदा कुमारी द्वारा अत्यंत सुंदर एवं सुसंगठित ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के संयोजन एवं समन्वय में डॉ. एस. ए.मंजुनाथ, डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा एवं डॉ. प्रतीक सिंह का मार्गदर्शन प्रशंसनीय रहा।
कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘वसंत’ रहा, जिसके अंतर्गत हिंदी और बांग्ला के सुप्रसिद्ध कवियों की रचनाओं का चयन कर एक बहुभाषिक, बहुरंगी गीति-आलेख का सृजन किया गया। यह आयोजन न केवल भाषायी विविधता का उत्सव था बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकात्मता का सजीव प्रतीक भी सिद्ध हुआ।

रिपोर्ट: डॉ पारोमिता दास

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