इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रांगण में तीन दिवसीय “अयोध्या पर्व” का भव्य आयोजन सम्पन्न

दिनांक 03.04.2026 से 05.04.2026 की समयावधि के दौरान नई दिल्ली के ऐतिहासिक मार्ग जनपथ पर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रांगण में तीन दिवसीय “अयोध्या पर्व” का भव्य आयोजन किया गया है, जिसे विभिन्न सत्रों में विभक्त करके क्रियान्वित किया जा रहा है।
दिनांक 03.04.2026 को इस भव्य आयोजन के प्रथम सत्र में सुप्रसिद्ध उद्यमी, कुशल इंजीनियर, वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि बी एल गौड़ एवं वरिष्ठ लेखक डॉ शैलेष शुक्ल की संयुक्त नवीनतम कृति “भविष्य की अयोध्या” का लोकार्पण मंचासीन गणमान्य विभूतियों पद्मश्री सुविख्यात पत्रकार राम बहादुर राय, यमुना एक्सप्रेस-वे विकास प्राधिकरण के अधीक्षक आईएएस राकेश सिंह, अयोध्या के पूर्व सांसद लल्लू सिंह तथा संयुक्त सृजनकर्ता बी एल गौड़ एवं डॉ शैलेष शुक्ल के कर-कमलों द्वारा इसका भव्य लोकार्पण समारोह सम्पन्न हुआ।
इस सत्र का शुभारंभ मंचासीन गणमान्य विभूतियों के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ किया गया। अगले चरण में कुशल संचालिका कात्यायनी चतुर्वेदी द्वारा क्रमबद्ध तरीके से मंचासीन विभूतियों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिन्ह प्रदान करके सम्मानित किया गया। तत्पश्चात्, इस पुनीत अवसर पर गणमान्य विभूतियों को क्रमानुसार अपने-अपने उदबोधनों के लिए संचालिका द्वारा आमंत्रित किया गया।
डॉ शैलेष शुक्ल ने अपने उदबोधन के माध्यम से अयोध्या की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करके दृष्टिगोचर प्रस्तुत करते हुए ज्ञानार्जन किया और वर्तमान समय में पुरातन शहर को विकसित करने के लिए क्रियान्वयन हेतु संलग्न गतिविधियों पर विस्तार से जानकारी प्रदान करके अवगत कराया।
बी एल गौड़ ने अपने वक्तव्य के माध्यम से सभागार में उपस्थित विद्वतजनों को अवगत कराया कि लोकार्पित पुस्तक मात्र 20-25 दिनों के भीतर आप सभी के समक्ष उपस्थित हुई है। उन्होंने आगे बताया कि उनके अंतर्मन में अयोध्या के विकास और पुनर्निर्माण से संबंधित बहुत-सी योजनाएं काफ़ी समय से आकार लेती आ रही हैं, जिनका ज़िक्र मैंने इस पुस्तक किया है। समयावधि का संज्ञान लेते हुए इनमें से कुछ चुनिंदा बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए श्रोता-दीर्घा का ज्ञानवर्धन किया और संक्षेप में उदाहरणों के माध्यम से रेखांकित करने के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।
राकेश सिंह ने अपने उदबोधन में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वह स्वयं अयोध्यावासी हैं। अपने इस मर्यादित शहर को बचपन से देखा है और अपने परिवार की वरिष्ठ पीढ़ी तथा अपने समय में समाज में उपस्थित वरिष्ठजनों से शहर की पुरातन पृष्ठभूमि से वर्तमान तक के परिप्रेक्ष्यों के समस्त पहलुओं को नजदीक से देखा, सुना और भोगा है। साथ ही, उन्होंने अपने विस्तृत आलेख के माध्यम से भविष्य में क्रियान्वित की जाने वाली योजनाओं को व्यवस्थित प्रारूपों से संगठित और सुदृढ़ नवीन शहर की परिधियों को सुचारित विधियों के अनुरूप साकार करने पर बल देते हुए मंच पर अपना स्थान ग्रहण किया।
राम बहादुर राय ने अपनी स्मृतियों से प्रकरणों को उकेरकर रेखांकित किया कि इमरजेंसी में जिस तर्ज़ पर दिल्ली में संजय गांधी ने विध्वंसात्मक गतिविधियां प्रारंभ की थी, वैसा ही प्रयास उसने बाबा विश्वनाथ मंदिर को जान वाली वाराणसी की संकरी गलियों की तैयारियां शुरू कर दी थी, जिसकी सूचना इंदिरा गांधी तक पहुचाई गई थी। तब इंदिरा जी ने अपनी मित्र पुपुल जयकर को वहां की यथास्थिति जानने के लिए भेजा था और उनकी रपट के आधार पर वह विचार स्थगित कर दिया गया था। वर्ष 2016 में वैसा ही विचार इस सरकार ने सभी स्थितियों का आंकलन करने के पश्चात् इसका जीर्णोद्धार करने का फैसला लिया और सकारात्मक इच्छाशक्ति के आधार पर वह कर दिखाया, जो आज विश्वनाथ कोरिडोर प्रत्यक्षदर्शी आप सबके समक्ष है। इसी दृढ़संकल्पित इच्छाशक्ति और सकारात्मकता का ही परिणाम राम मंदिर की वर्तमान भव्य स्वरूप में स्थापना और अयोध्या का व्यवस्थित परियोजनाओं के तहत वहां का विकास हो रहा है।
लल्लू सिंह ने अपने संक्षिप्त उदबोधन में अयोध्या में अभी तक हुए बदलाव और नवनिर्मित योजनाओं के अंतर्गत स्थापित प्रकल्पों की जानकारी प्रदान करके ज्ञानार्जन किया। यह आयोजन गत आठ वर्षों से यहां आयोजित किया जा रहा है। इच्छा है कि भविष्य में यह आयोजन इससे भी अधिक और भव्य समारोह के तौर पर कर पाने में समर्थ और सक्षम हों, ऐसी मेरी मनोकामना है। इन्हीं विचारों के साथ उन्होंने अपनी वाणी को विराम दिया।
इसी के साथ संचालिका द्वारा सभागार में उपस्थित प्रबुद्धजनों, विद्वतजनों एवं आगंतुकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धन्यवाद और आभार ज्ञापित करने के पश्चात् इस सत्र के समापन की घोषणा की गई।
इस अवसर पर मेरे द्वारा लिए गए कुछ चित्र एवं वीडियो आप सभी के अवलोकनार्थ यहां प्रस्तुत हैं।
रिपोर्ट – कुमार सुबोध

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