ग्लोबल चित्रांशी समूह द्वारा ” श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य् दिवस ” के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन
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ग्लोबल चित्रांशी समूह द्वारा *श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य दिवस (वैशाख शुक्ल सप्तमी- गंगा सप्तमी) के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ कार्यक्रम की अध्यक्ष जर्मनी की सुप्रसिद्ध शिक्षाविद,साहित्यकार, संपादक, मीडिया प्रोफेशनल डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।
कार्यकम का कुशल संचालन सुश्री प्रवीणा कुलश्रेष्ठ ने किया। संस्था की संस्थापक सुश्री ऊषा श्रीवास्तव ने संस्था के मुख्य उद्देश्य को बताते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया।
कार्यकारिणी की अत्यंत सक्रिय एवं महत्वपूर्ण सदस्य डॉ श्वेता सिन्हा ने अध्यक्ष का अत्यंत सुदर एवं आत्मीय विस्तृत परिचय दिया।साथ ही भगवान चित्रगुप्त की कथा को अत्यंत रोचक रूप में सभी के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसे श्रोताओं द्वारा बहुत सराहा गया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ शिप्रा ने ग्लोबल चित्रांशी समूह की संस्थापक सुश्री ऊषा श्रीवास्तव जी एवं कार्यकारिणी सदस्यों डॉ श्वेता सिन्हा, मंजू श्रीवास्तव, मधु खरे, डॉ दुर्गा सिन्हा को उनके सार्थक एवं सुन्दर आयोजन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा “भगवान चित्रगुप्त के प्रकटोत्सव दिवस का आयोजन आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक एवं महत्वपूर्ण है, ब्रह्मा के मानस पुत्र श्री चित्रगुप्त भगवान मात्र पाप पुण्य का लेखा जोखा रखने के कारण ही नहीं पूज्य है, वरन यह दिवस आत्मावलोकन का दिवस है, न्याय और सच्चाई की पुनः स्मृति का दिन। आज के समय में जब लोग सही गलत से परे सोशल मीडिया पर क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कुछ भी कर रहे है, ऐसे में श्री चित्रगुप्त भगवान ‘कर्मफल सिद्धांत का प्रतीक है” जो हमें पाप पुण्य का बोध कराते है और ये भी बताते है कि हमे जो भी मिलता है वो हमारे कर्मों का ही फल है।
भारतीय संस्कृति की जड़े बहुत गहरी है और जो जड़ों से जुड़ा रहता है, वो ही पनपता है।
उन्होंने कहा “यम ,धर्मराज, मृत्य, अन्तक वैवस्वत काल सर्वभूत क्षयकारक औटुबर चित्र चित्रगुप्त एक मेव” भगवान चित्रगुप्त पुण्यात्माओं के लिए कल्याणकारी एवं पापियों के लिए विध्वंसकारी है। कायस्थ कुल चाहे विदेशों में हो या देश में सामाजिक समरसता, कर्म जागरूकता,आत्मनियमन , नैतिक संस्कार, नियमित आत्ममूल्यांकन, मानसिक शांति एवं कर्मों की शुद्धि पर बल देता है, हम कायस्थों का मानना है कि भगवान चित्रगुप्त की आराधना मात्र जाति विशेष के प्रति नहीं वरन सामाजिक, राजनीतिक, विसंगतियों के प्रति नैतिक आह्वाहन है।
इस अवसर पर देश विदेश से जुड़ी गणमान्य अतिथियों अमेरिका से डॉ दुर्गा सिन्हा , सुश्री मंजू श्रीवास्तव, सुश्री मधु खरे जी, सुश्री सीमा माथुर ,डॉ. श्वेता सिन्हा, रेणु माथुर, श्रीमती सरिता श्रीवास्तव, डॉ. शैलजा रोला ,मंजुला अस्थाना महंती- , प्रवीणा कुलश्रेष्ठ , मधु श्रीवास्तव, शकुन्तला श्रीवास्तव ने विभिन्न विधाओं में अपनी सराहनीय प्रस्तुतियां दी। जिसे देश विदेश से जुड़े दर्शकों ने अत्यंत सराहा।
रिपोर्ट :– डॉ शिप्रा शिल्पी
