“लोकभाषा मे रचनापाठ” कार्यक्रम सम्पन्न

दिनांक 17 ( रविवार ) को विश्व हिंदी सचिवालय, केंद्रीय हिंदी संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद, वातायन तथा भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वाधान में वैश्विक हिन्दी परिवार का आयोजित “लोकभाषा में रचना पाठ” कार्यक्रम संपन्न हुआ | कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतुप्त’ द्वारा आत्मीय स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसमें उन्होंने वैश्विक मंच पर जुड़े सभी सम्मानित अतिथियों और देश-विदेश के रचनाकारों का हार्दिक अभिनंदन किया। इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा की पूर्व निदेशक बीना शर्मा ने की, जिन्होंने ब्रज भाषा की मिठास और उसके ऐतिहासिक महत्व को बहुत ही सुरुचिपूर्ण ढंग से रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित राजस्थानी साहित्यकार बुलाकी शर्मा उपस्थित थे, जिन्होंने लोकभाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली सरकार के उप शिक्षा निदेशक डॉ. जगदीश व्योम ने कन्नौजी भाषा की भाषाई विशेषताओं और उसके साहित्यिक योगदान पर अपना अत्यंत सारगर्भित व सारवान व्याख्यान प्रस्तुत किया। भावुक ने अपनी-अपनी मातृभाषाओं में बेहतरीन काव्यपाठ कर लोक कला और जनभावनाओं का जीवंत ताना-बाना बुना। इसी क्रम में हैदराबाद से जुड़े ‘दैनिक हिंदी मिलाप’ के ब्यूरो चीफ एफ.एम. सलीम ने दक्खिनी हिंदी की अनूठी शैली में अपनी रचना प्रस्तुत की, जिसने भाषाई विविधता की सुंदरता को और अधिक गहरा किया। शासकीय हाईस्कूल की सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्या डॉ. शशि निगम ने मालवी भाषा में अपनी मधुर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सरस्वती वंदना तथा रचना पाठ को प्रस्तुत किया।

इन सभी रचनाकारों के उत्कृष्ट पाठ ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की असली पहचान उसकी भाषाई विविधता और आंचलिक बोलियों की सहज अभिव्यक्ति में ही निहित है। इस आयोजन की रीढ़ रहीं कार्यक्रम की मुख्य संयोजक और राज्य कर उपायुक्त एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. संध्या सिलावट ने शानदार मंच संचालन किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिंदी की उन जड़ों को सींचना और सम्मानित करना था, जो देश की विभिन्न लोकभाषाओं और बोलियों के रूप में भारतीय संस्कृति की आत्मा को जीवंत रखे हुए हैं। उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब तक लोकभाषाएं समृद्ध और सुरक्षित रहेंगी, तब तक हिंदी की वैश्विक यात्रा निरंतर और अधिक सशक्त एवं प्रासंगिक बनी रहेगी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में डॉ. सुरेश सिंह राठौड़ ने सभी सहयोगियों, आयोजकों और तकनीकी टीम के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए औपचारिक रूप से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष व संरक्षक अनिल जोशी तथा मार्गदर्शक मंडल के वरिष्ठ सदस्यों नारायण कुमार, वी. राव. जगन्नाथन्, प्रो. तोमियो मिज़ोकामी और डॉ. सुरेन्द्र गंभीर की प्रेरणादायक भूमिका रही।

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