हमीरपुर में साहित्य और संस्कृति का महाकुंभ, दो दिवसीय सृजन उत्सव का भव्य समापन

हमीरपुर, 26-27 जून: पं. राम प्रसाद बिस्मिल फाउंडेशन एवं धौलाधार साहित्यिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में साई सदन, दुग्घा में आयोजित द्वि-दिवसीय साहित्यिक/सांस्कृतिक महोत्सव शुक्रवार को संपन्न हो गया। 26-27 जून तक 4 सत्र में चले इस आयोजन में देश भर के साहित्यकारों ने शिरकत की। परिचय एवं स्वागत प्रथम सत्र में आगत सभी साहित्यकारों, मनीषियों, कवियों एवं विद्वजनों द्वारा एक दूसरे के परिचयात्मक उद्बोधन के तौर पर सम्पन्न हुआ। जिसमें सभी के कार्यक्षेत्र, उपलब्धि एवं साहित्यिक/सांस्कृतिक अवदान का परिचय प्राप्त हुआ। सत्र की शुरुआत धौलाधार साहित्यिक मंच की संस्थापिका डॉ. संतोष कुमारी के स्वागत वक्तव्य से आरंभ हुआ एवं समापन डॉ. शालिनी शुक्ला (अध्यक्षा, उदिता फाउंडेशन) के द्वारा आभार ज्ञापन से हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता आचार्य राजेश कुमार एवं संचालन मनोज श्रीवास्तव अनाम ने किया। विमर्श से विमोचन तक चला मंथन द्वितीय सत्र “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: साहित्य एवं लघु पत्रिकाएं” की शुरुआत मुख्य अतिथि माननीय आशीष शर्मा (विधायक, हमीरपुर) ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। तत्पश्चात बाल नृत्यांगना ओजस्विनी भारती द्वारा भरतनाट्यम की प्रस्तुति द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। क्रांति के नव चेतना के रूप में पत्रकारिता आज भी अपने मूल स्वरूप को संजोए हुए है। आयोजक अरविंद पथिक ने बीज वक्तव्य में भारतीय इतिहास में साहित्यकारों, क्रांतिकारियों द्वारा पत्रकारिता में अभूतपूर्व सेवा उनके योगदान को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि मा० आशीष शर्मा ने कहा कि पं. राम प्रसाद बिस्मिल के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देते हैं। उदिता फाउंडेशन एवं पंडित रामप्रसाद बिस्मिल फाउंडेशन द्वारा हिमाचल के वीर सैनिकों और आगत अतिथियों को स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित किया गया। महोत्सव के पहले दिन “हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष: साहित्य एवं लघु पत्रिकाएं” विषय पर विमर्श हुआ। सत्र के अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. बरुण कुमार (पूर्व राजभाषा निदेशक राजभाषा, भारतीय रेल) ने कहा कि लघु पत्रिकाएं ही नए लेखकों की पहली पाठशाला हैं। पूर्व उप सचिव हिंदी अकादमी ऋषि कुमार शर्मा, प्रखर वक्ता शैलेन्द्र सिंह, समकालीन चौथी दुनिया के सम्पादक प्रवीण चौहान और कवि ब्रह्मदेव शर्मा ने भी विचार रखे। इसी सत्र में “साहित्य सप्तक” के स्त्री विशेषांक का लोकार्पण हुआ। संयोजक डॉ. संतोष कुमारी ने बताया कि इसमें 10 राज्यों की महिला रचनाकारों को स्थान मिला इस सत्र में स्वागत वक्तव्य रचना पथिक ने आभार ज्ञापन मनोज श्रीवास्तव अनाम और संचालन डॉ. विवेक शर्मा द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन में झूमे श्रोता इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के आरंभ मेरे कुमारी सलोनी ने महाप्राण निराला की अमर रचना वर दे वीणा वादिनि, वर दे … की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति देकर की। संगीतमय काव्य संध्या के इस अवसर पर आयोजित सरस कवि सम्मेलन में आचार्य राजेश कुमार, डॉ. वरुण कुमार, ब्रह्मदेव शर्मा, ज्ञान प्रकाश वाजपेयी, डॉ. राजेश कुमार माँझी, डॉ. जितेंद्र, रचना पथिक, मीनाक्षी यादव और स्थानीय कवियों ने समसामयिक रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। संचालन मनोज श्रीवास्तव अनाम एवं अध्यक्षता अरविंद पथिक ने किया। पर्यटन, पुस्तक विमोचन एवं परिचर्चा दूसरे दिन स्थानीय भ्रमण कार्यक्रम अन्तर्गत बिलकेश्वर महादेव मंदिर, गसोता महादेव मंदिर, स्थानीय बाजार लोक संस्कृति समेत प्रमुख शक्तिपीठ ज्वालामुखी एवं मां चिंतपूर्णी देवी के दर्शन किया गया। अन्तिम सत्र के दौरान तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’, रचित “जो कह न सका” (काव्य संग्रह) डॉ. बरुण कुमार कृत “यह हंस अहा तरता तरता (ललित निबंध संग्रह) तथा आचार्य राजेश कुमार लिखित उपन्यास “पार्क में एक दिन” – शामिल हैं। इन सभी पुस्तकों पर क्रमशः डॉ. विवेक शर्मा एवं डॉ. शालिनी शुक्ला, डॉ. जितेंद्र एवं रचना पथिक, संतोष कुमारी एवं डॉ. प्रियंका ने अपनी समीक्षात्मक दृष्टि रखी एवं इनके कलेवर और सृजनात्मक मूल्यों पर सार्थक परिचर्चा भी हुई। इस सत्र की अध्यक्षता श्री ऋषि कुमार शर्मा (पूर्व उप सचिव, हिंदी अकादमी दिल्ली) एवं संचालन श्री अरविंद पथिक (प्रधान संपादक, साहित्य सप्तक) ने किया। इस अवसर पर महानिदेशक, क्रिएटिव कल्चर आचार्य राजेश कुमार, वरिष्ठ कवि सुरेंद्र शर्मा, कृष्ण चंद्र महादविया, प्रो. रतन लाल शर्मा, उपन्यासकार गंगाराम राजी संपादक प्रवीण चौहान, समाजसेवी डॉ. आर एस तोमर, उदय प्रताप सिंह, संतोष कुमारी, राहुल कुमार, नीलम सांगवान, विवेक चौधरी, राजन वर्मा, संतोष कुमार, पूजा कुमारी, नायक कृपाराम, विपन कुमार, कैप्टन जगीर सिंह पठानिया, सैनिक सुखदेव, तरलोक सिंह डढवाल, सूबेदार धनबीर सिंह वैदिक सलोनी सहित शताधिक साहित्य/संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजक मंडल ने सभी का आभार जताया।

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