प्रो. नामवर सिंह जन्मशती समारोह में आठवाँ स्मारक व्याख्यान आयोजित, पुस्तक ‘मेरे बिसरे बिखरे शब्द’ का लोकार्पण

नई दिल्ली। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि प्रभाग द्वारा हिंदी के प्रख्यात आलोचक और साहित्यकार प्रो. नामवर सिंह के जन्मशती समारोह के अवसर पर आठवें प्रो. नामवर सिंह स्मारक व्याख्यान का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, आलोचना और विचार-जगत से जुड़े विद्वानों ने प्रो. नामवर सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उनके साहित्यिक अवदान पर विस्तार से चर्चा की। जन्मशती समारोह एवं स्मारक व्याख्यान की अध्यक्षता इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. आशीष त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में कहा कि नामवर सिंह पूरी तरह स्वावलंबी व्यक्तित्व के धनी थे। वे सदैव अपने ऊपर निर्भर रहते थे और दूसरों से सहायता लेने की उनकी प्रवृत्ति नहीं थी। प्रो. त्रिपाठी ने नामवर सिंह की तुलना एक गंवई किसान से करते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में किसान जैसी सहजता, कर्मठता और अदम्य दृढ़ता विद्यमान थी। उन्होंने कहा कि नामवर सिंह की पहुँच हिंदी साहित्य के हर वर्ग तक थी और पिछले 50-60 वर्षों में विचारों के क्षेत्र में उनके जैसा विराट व्यक्तित्व दूसरा कोई नहीं हुआ। वे महाभारत और बुद्ध से लेकर राजनीति विज्ञान के विभिन्न विचारकों तक पर समान अधिकार के साथ अपनी बात रख सकते थे। इस विशेष अवसर पर नामवर सिंह के पुत्र विजय प्रकाश सिंह द्वारा संकलित एवं संपादित पुस्तक ‘मेरे बिसरे बिखरे शब्द’ का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विजय प्रकाश सिंह ने कहा कि हर नई पुस्तक आत्मा का नया रूप होती है—ऐसा नामवर सिंह कहा करते थे। उन्होंने कहा कि यह कृति नामवर सिंह के विचारों की यात्रा का संकलन है और यही पुस्तक उनकी अपनी ऊर्जा भी है। कार्यक्रम के दौरान दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के कला एवं अभिकल्प संकाय के डीन प्रो. रमेश चंद्र गौड़ ने प्रो. नामवर सिंह की स्मृति में अब तक आयोजित किए गए सभी स्मारक व्याख्यानों की यात्रा और उनके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इन व्याख्यानों को नामवर सिंह की वैचारिक और साहित्यिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। कलानिधि प्रभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं आयोजन के उद्देश्यों की जानकारी दी।
