Category: उल्लेखनीय विषय

‘वैश्विक हिंदी परिवार’ की संगोष्ठी में उठा भाषा, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक अस्मिता का व्यापक विमर्श : विजय नगरकर

‘वैश्विक हिंदी परिवार’ की संगोष्ठी में उठा भाषा, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक अस्मिता का व्यापक विमर्श : विजय नगरकर मातृभाषा : स्मृति नहीं, भविष्य की शक्ति भाषा केवल शब्दों का…

उर्दू अकादमी के कार्यक्रम में ‘स्त्री-विमर्श और संस्कारों के बदलते कथानक’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए: मनोज कुमार श्रीवास्तव

उर्दू अकादमी के कार्यक्रम में ‘स्त्री-विमर्श और संस्कारों के बदलते कथानक’ विषय पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए: मनोज कुमार श्रीवास्तव अभी जब सिराज अजमली सर बोल रहे…

वैश्विक हिंदी परिवार : विशेषांक की झलक

वैश्विक हिंदी परिवार : विशेषांक की झलक विशेषांक उल्लेखवैश्विक हिंदी परिवार के विशेषांक में साहित्य की विविध विधाओं का सुंदर संगम प्रस्तुत किया गया है। इसमें कहानी, कविता, ग़ज़ल, व्यंग्य,…

ब्रज, भक्ति और लोक-कल्याण के शाश्वत प्रतीक – श्री कृष्ण : विजय नगरकर

ब्रज, भक्ति और लोक-कल्याण के शाश्वत प्रतीक – श्री कृष्ण : विजय नगरकर ‘वैश्विक हिंदी परिवार’ के साप्ताहिक मंच पर आयोजित विशेष संगोष्ठी में भगवान श्री कृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व…

नहीं रहे बल्लभ डोभाल

नहीं रहे बल्लभ डोभाल वे नोएडा में रहते थे। वर्ष 1930 में पौड़ी गढ़वाल में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने लाहौर, धर्मशाला और इलाहाबाद से शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने जीवन…

पौराणिक अवधारणाएँ और यंत्र बुद्धि : प्राचीन मेधा और आधुनिक विज्ञान का वैचारिक सेतु – विजय नगरकर

पौराणिक अवधारणाएँ और यंत्र बुद्धि : प्राचीन मेधा और आधुनिक विज्ञान का वैचारिक सेतु – विजय नगरकर मानव सभ्यता की प्रगति सदा से उसकी असीम कल्पनाओं और जिज्ञासा के पहियों…

‘ओणम और भारतीय कालगणना’ : श्रेयस गोखले

‘ओणम और भारतीय कालगणना’ : श्रेयस गोखले ‘ओणम’ अथवा ‘तिरुवोणम्’ अर्थात् ‘श्रवण नक्षत्र’ का त्योहार। भारत में प्रत्येक पर्व किसी न किसी खगोलीय घटना से अवश्य जुड़ा होता है। इन्हीं…

गुयाना की संस्कृति में निहित भगवान राम : सुनील कुमार सिंह

गुयाना की संस्कृति में निहित भगवान राम : सुनील कुमार सिंह इस आलेख में लेखक सुनील कुमार सिंह ने लैटिन अमेरिका के गुयाना देश में विस्तारित भारतीय संस्कृति की छबियों…

गुरुदत्त : एक शापित गंधर्व – नेहा भांडारकर

गुरुदत्त : एक शापित गंधर्व – नेहा भांडारकर दिनांक: 9 जुलाई, 1925 को बंगलुरु में जन्मे, गुरु दत्त का नाम सुनते ही इंडियन सिनेमा के एक अनोखे, रहस्यमयी और टैलेंटेड…

मनाली के इग्लू ( यात्रा संस्मरण) भाग – 3 : मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’

मनाली के इग्लू ( यात्रा संस्मरण) भाग – 3 : मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’ 23 जनवरी 2021 आँख खुली तो सवेरा हो चुका था, हालांकि धूप और सूरज का नामोनिशान नहीं…

हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता की भावना : डॉ. अरुणा अजितसरिया

हिंदी साहित्य में राष्ट्रीयता की भावना : डॉ. अरुणा अजितसरिया परिचय : कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए., ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यास’ पर पीएच.डी. तथा फ्रेंच भाषा में डिप्लोमा प्राप्त कर…

परदेसी मन की संवेदनाएँ : सात समंदर पार भी धड़कता है भारत – विजय नगरकर

परदेसी मन की संवेदनाएँ : सात समंदर पार भी धड़कता है भारत – विजय नगरकर परदेसी मन की संवेदनाएँ : सात समंदर पार भी धड़कता है भारत न्यूज़ीलैंड से रोहित…

स्वतंत्र भारत: स्मृति, संघर्ष और संकल्प (15 अगस्त विशेषांक)

स्वतंत्र भारत: स्मृति, संघर्ष और संकल्प (15 अगस्त विशेषांक) रचना सूची 15 अगस्त का अर्थ : संपादकीय – (डॉ. शैलजा सक्सेना) रवींद्रनाथ ठाकुर-अनुवाद- (आशा बर्मन): मेरे सोने का बंगाल रवींद्रनाथ…

डॉ. के. जयलक्ष्मी के आलेख में ‘रामचरितमानस’ : विश्व मानवता का पथप्रदर्शक

डॉ. के. जयलक्ष्मी के आलेख में ‘रामचरितमानस’ : विश्व मानवता का पथप्रदर्शक भारतीय संस्कृति सदैव से विश्व कल्याण, मानवता और समरसता की वाहक रही है। वसुधैव कुटुम्बकम् और सर्वे भवन्तु…

शब्द उगने लगे, लेखन शुरू हो गया : देवेन मेवाड़ी

शब्द उगने लगे, लेखन शुरू हो गया : देवेन मेवाड़ी क्या बहुत लिखकर लेखक बन जाने की अभिलाषा रही?कतई नहीं। एक साथी का सवाल याद आता है, जो वे हर…

पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर : विजय नगरकर

पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर : विजय नगरकर साहित्य की दुनिया में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो समय की शिला पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर…

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर

जेन-जी की भाषा अब संसद तक! : विजय नगरकर “वास्तेगुना-हुइंया”, “कुचु-पुचु”, “FOMO”, “MIA”, “Delulu”, “Clocked It”—ये शब्द कभी केवल सोशल मीडिया और युवाओं की बातचीत तक सीमित माने जाते थे।…

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर

उत्तर-दक्षिण का सांस्कृतिक सेतु: हिंदी-कन्नड़ साहित्य का आत्मीय संवाद और अनुवाद की शक्ति : विजय प्रभाकर नगरकर भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पूँजी है।…

“खोया-खोया चिंतन” : डॉ. सरोजिनी प्रीतम

“खोया-खोया चिंतन” : डॉ. सरोजिनी प्रीतम खोया-खोया चिन्तनसगुणी बोली, ‘‘यों खोये-खोये से क्यों लग रहे हो जी?’’रूपकचन्द तेजी से बोले, ‘‘हां हां मैं तो खोया-खोया ही हूँ। मिलाओ चीनी ……

कृत्रिम मेधा के डिस्टिलेशन टेक्नोलॉजी के लिए लड़ाई! : डॉ.एस.ए.मंजुनाथ

कृत्रिम मेधा के डिस्टिलेशन टेक्नोलॉजी के लिए लड़ाई! : डॉ.एस.ए.मंजुनाथ कृत्रिम मेधा (AI) की दुनिया में आगे बढ़ने की होड़ अब एक नई टेक्नोलॉजी पर आ गई है, जिसे मॉडल…

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