दोहा ‘गागर में सागर भरने’ की काव्य-विधा है (ग़ालिब अकेडमी में मनोज अबोध की अभिव्यक्ति)

२ अगस्त २०२६, ग़ालिब अकेडमी, नई दिल्ली में दोहा लेखन करने वाले कवियों की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का स्वागत करते हुए डॉ. अक़ील अहमद ने कहा कि हज़रत अमीर ख़ुसरो उर्दू और हिंदी के प्रथम कवि हैं। उन्होंने दोहा, पहेली और अनमेल जैसी जनरुचि की विधाओं में काव्य-रचना की। आज दोहा, पहेली और अनमेल जैसी विधाओं में कम लिखा जा रहा है।
प्रतियोगिता में 16 कवियों ने अपने दोहे प्रस्तुत किए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार डॉ. मनोज अबोध ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दोहे में केवल तेरह-ग्यारह मात्राओं और क़ाफ़िये का पालन ही पर्याप्त नहीं है। दोहा ‘गागर में सागर भरने’ की विधा है। एक दोहा किसी लंबी रचना पर भी भारी पड़ सकता है। इसमें परिवर्तन और विस्तार की बहुत बड़ी संभावनाएँ हैं।
उर्दू के प्रसिद्ध कवि शाहिद अनवर ने कहा कि दोहा केवल मात्राओं और क़ाफ़िया-पैमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पंक्ति में नकारात्मक बात कहकर दूसरी पंक्ति में उसे सकारात्मक रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी है।
इस अवसर पर कवियों के चयन और कवि-सम्मेलन की संयोजिका डॉ. संतोष संप्रीति ने कहा कि हिंदी में दोहा लिखने का चलन बहुत अधिक है। इसकी सूचना फेसबुक पर दी गई तो बहुत से कवियों ने दोहा प्रस्तुत करने की इच्छा व्यक्त की। उनमें से 16 कवियों का चयन कर उन्हें कवि-सम्मेलन में दोहा पढ़ने के लिए आमंत्रित किया गया। यह हिंदी-उर्दू भाषा के क्षेत्र में एक शानदार शुरुआत है। दोहे का अलग कवि-सम्मेलन आयोजित नहीं होता। ग़ालिब अकेडमी ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से यह बहुत सराहनीय कदम उठाया है, जिसकी व्यापक सराहना हो रही है। हिंदी की कवयित्री सरिता गुप्ता और उर्दू के कवि शाहिद अनवर ने तीन श्रेष्ठ कवियों का चयन किया। प्रथम पुरस्कार के रूप में 1500 रुपये, द्वितीय को 1400 रुपये तथा तृतीय को 1300 रुपये देने की घोषणा की गई।

बानगी के तौर पर प्रस्तुत किए गए कुछ दोहे –
हर युग कुछ कहता सदा, पढ़ लो वेद पुराण। स्वर्ग वहीं होता जहाँ, नारी का सम्मान॥
———संगीता वर्मा
चाहे संत कबीर हों, मीरा या रसखान।
तप के बल पर ही सभी, ऊँची उड़ें उड़ान॥
———सुरेश मेहरा ‘राज’
जो मन में पतझड़ भरे, गज भर रहना दूर।
दिल की सारी हसरतें, पल में करते चूर॥
————पुनीता सिंह
देश लूटते घूस से, नेता तज कर लाज।
दीन जनों की आह से, दहक उठेगा ताज॥
————प्रत्यूष गौतम
जीवन नैया है खड़ी, फँसी बीच मझधार।
जीवन मेरा तार दो, जग के पालनहार॥
————सुरेखा साहू
झूठ, पाप, अन्याय पर, करना होगा वार।
सत्य कथन की लेखनी, लेखक का हथियार॥
————-वंदना चौधरी
भारत देश महान है, हिंद हमारी शान।
हिंदी का सम्मान कर, इस पर कर अभिमान॥
————रजनी बाला ‘सहज’
जो निज सुख को छोड़ कर, करते जनहित काम।‘अयन’ युगों तक जगत में, रहता उनका नाम॥
————देवव्रत शर्मा ‘अयन’
ख़ुसरो और रहीम ने, पकड़ी यही लकीर।
दोहे लिख तुलसी तरे, देखो दास कबीर॥
————ग़ुस्ताख़ हिंदुस्तानी
पापा की खाँसी बढ़ी , घुलती रही थकान।
दवा सिराने पर पड़ी , व्यस्त रहा इंसान॥
————-जितेंद्र ‘जीत’
रोटी माँगे आदमी, मिलते हैं उपदेश।
जैसे-तैसे चल रहा, मेरा प्यारा देश॥
—————गोल्डी ‘ग़ज़ब’
ताने-बाने भिन्न सब, एक हुआ परिधान।
सूत-सूत का मान ही, बनता हिंदुस्तान॥
———आरती झा ‘आद्या’
अनेकता में एकता, भारत की पहचान ।
सर्वधर्म समभाव को, दिखाता संविधान॥
———-इंजि॰ महेन्द्र सिंह
नैन नशीले मद भरे, अधर मधुर मकरन्द।
गोरी तेरे रुप पर, लिख दूँ कोई छन्द॥
————-स्नेहलता पाण्डेय ‘स्नेह’
इस अवसर पर दैनिक इंक़लाब के रेज़िडेंट एडिटर डॉ. यामीन अंसारी, हिंदुस्तान टाइम्स के स्तंभकार मयंक ऑस्टिन सूफ़ी, प्रवीण व्यास, सीमा कौशिक, कमालुद्दीन, रवि पटवरधन, सज्जाद रिज़वी, उर्दू के विद्यार्थी, अनवर मियाँ एडवोकेट, इक़रा अंसारी, तस्मिया रफ़ीक़, राहुल राय, सूरजपाल सिंह ‘अदना’, सुलेख एवं ख़त्ताती के शिक्षक शमीम अहमद तथा विद्यार्थियों ने भाग लिया। अंत में ग़ालिब अकेडमी के सचिव डॉ. अक़ील अहमद ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ग़ालिब अकेडमी की मासिक काव्य-गोष्ठी 8 अगस्त 2026 को आयोजित की जाएगी।
