ग़ालिब अकादमी में दोहा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन

नई दिल्ली स्थित ग़ालिब अकादमी में दोहा लेखन करने वाले कवियों के लिए प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 16 कवियों ने प्रतिभाग करते हुए अपने दोहे प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का उद्देश्य दोहा जैसी पारंपरिक काव्य-विधा के प्रति रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों में रुचि बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिंदी के प्रसिद्ध कवि एवं पत्रकार डॉ. मनोज अबोध ने दोहा लेखन की विशेषताओं पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दोहे में केवल तेरह-ग्यारह मात्राओं और क़ाफ़िये का पालन कर लेना पर्याप्त नहीं है। दोहा ऐसी विधा है जिसमें कम शब्दों में व्यापक भाव और विचार व्यक्त किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि दोहा ‘गागर में सागर भरने’ की विधा है और एक प्रभावशाली दोहा किसी लंबी रचना पर भी भारी पड़ सकता है। उन्होंने दोहा लेखन में परिवर्तन और विस्तार की व्यापक संभावनाओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया।
ग़ालिब अकादमी के सचिव डॉ. अक़ील अहमद ने स्वागत वक्तव्य में कहा कि हज़रत अमीर ख़ुसरो उर्दू और हिंदी के प्रथम कवि हैं। उन्होंने दोहा, पहेली और अनमेल जैसी जनरुचि की विधाओं में महत्वपूर्ण काव्य-रचना की। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान समय में इन विधाओं में अपेक्षाकृत कम लेखन हो रहा है और ऐसी प्रतियोगिताएँ इनके संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कवि-सम्मेलन की संयोजिका डॉ. संतोष संप्रीति ने कहा कि ग़ालिब अकादमी द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित यह पहल अत्यंत सराहनीय है और इसकी व्यापक सराहना हो रही है। हिंदी की कवयित्री सरिता गुप्ता तथा उर्दू के कवि शाहिद अनवर ने प्रतियोगिता में प्रस्तुत रचनाओं का मूल्यांकन करते हुए तीन श्रेष्ठ कवियों का चयन किया। विजेताओं के लिए प्रथम पुरस्कार 1500 रुपये, द्वितीय पुरस्कार 1400 रुपये तथा तृतीय पुरस्कार 1300 रुपये निर्धारित किए गए।
