प्रवासी साहित्य के स्वरूप और प्रवृत्तियों पर साहित्यिक परिसंवाद

जयपुर। कानोड़िया पी.जी. महिला महाविद्यालय, जयपुर के हिन्दी विभाग एवं स्पंदन महिला साहित्यिक संस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में 17 अगस्त को ‘प्रवासी साहित्यः स्वरूप और प्रवृत्तियाँ’ विषय पर साहित्यिक परिसंवाद का आयोजन किया गया।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि प्रवासी साहित्य भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक संदर्भ में समझने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रवासी साहित्यकार शालिनी वर्मा ने प्रवासी साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भारतीय संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर अभिव्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने विदेशों में हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा प्रवासी रचनाकारों के योगदान पर भी चर्चा की।

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शीताभ शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए शालिनी वर्मा से उनकी साहित्यिक यात्रा, हिन्दी भाषा-साहित्य तथा प्रवास में साहित्य-सृजन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। छात्राओं ने भी वक्ता से संवाद किया। प्रश्नों के उत्तर देते हुए शालिनी वर्मा ने विदेशों में हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन तथा रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी।

प्रमुख साहित्यकार एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. संदीप अवस्थी ने विदेशों में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में कार्यरत संस्थाओं तथा प्रवासी साहित्यकारों की भूमिका रेखांकित की। महाविद्यालय की निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में ‘पहला गिरमिटिया’ उपन्यास का उल्लेख करते हुए डायस्पोरा लिटरेचर की अवधारणा पर प्रकाश डाला और बताया कि प्रवासी भारतीय आज भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े हुए हैं।

कार्यक्रम के अंत में स्पंदन महिला साहित्यिक संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, शिक्षकों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

परिसंवाद में उप-प्राचार्य डॉ. रंजुला जैन, डॉ. मनीषा माथुर, सहायक आचार्य डॉ. धर्मा यादव तथा प्रमुख साहित्यकार एस. भाग्यम शर्मा, कवि विनय कुमार अंकुश, प्रो. बीना अग्रवाल, डॉ. अलका अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकारों एवं छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम में प्रवासी साहित्य के विविध पक्षों, उसकी विशेषताओं और समकालीन संदर्भों पर सार्थक एवं विचारोत्तेजक चर्चा हुई।

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