दीक्षित दनकौरी की महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति में पुणे के साहित्यकारों से भेंट

रचनात्मक कार्यों में समय बिताना समय का श्रेष्ठतम सदुपयोग : दीक्षित दनकौरी
पुणे, 12 अगस्त। हिंदी ग़ज़ल के प्रमुख हस्ताक्षर एवं साहित्यकार दीक्षित दनकौरी ने बुधवार, 12 अगस्त को पुणे प्रवास के दौरान महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पदाधिकारियों तथा पुणे के साहित्यकारों से आत्मीय भेंट की। बाजीराव रोड स्थित समिति के हिंदी भवन कार्यालय में आयोजित इस विशेष संवाद में हिंदी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता तथा भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों सहित विभिन्न साहित्यिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
इस अवसर पर दीक्षित दनकौरी ने कहा कि देशभर में वास्तव में पढ़ने-लिखने और रचनात्मक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने वाले लोग संख्या में कम हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शहर में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने नियमित कार्यों, मनोरंजन और अन्य व्यस्तताओं के बीच साहित्य एवं रचनाकर्म के लिए समय निकालते हैं। उन्होंने उपस्थित साहित्यकारों की सराहना करते हुए कहा कि साहित्यिक चर्चा और रचनात्मक संवाद में समय देना समय का श्रेष्ठतम सदुपयोग है।
दनकौरी ने साहित्यकारों का आह्वान किया कि वे बदलते समय और नवीन संचार माध्यमों के साथ कदम मिलाते हुए हिंदी साहित्य को अधिक व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि तकनीक और नए संचार माध्यमों का सकारात्मक उपयोग हिंदी के प्रचार-प्रसार में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
समिति के पदाधिकारियों एवं पुणे के साहित्यकारों ने दनकौरी का स्वागत किया तथा उन्हें पुणे की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी। समिति के कार्याध्यक्ष डॉ. सुनील देवधर ने समिति की पत्रिका ‘समिति संवाद’ दनकौरी सहित उपस्थित साहित्यकारों को भेंट की। संस्था के उपाध्यक्ष सदानंद महाजन ने अतिथि का स्वागत किया।
कार्यक्रम में दीक्षित दनकौरी ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लों का सस्वर पाठ किया। उपस्थित रचनाकारों ने भी अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। साहित्यिक संवाद, ग़ज़ल-पाठ और रचनाओं की प्रस्तुति से कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत आत्मीय एवं रचनात्मक रहा। साहित्यकारों ने दनकौरी के साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए भविष्य में संयुक्त साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित करने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।
उल्लेखनीय है कि दीक्षित दनकौरी देश-विदेश में आयोजित अनेक कवि सम्मेलनों एवं मुशायरों में भाग ले चुके हैं। उनके संपादन में ‘हिंदी ग़ज़ल की विकास यात्रा’ चार खंडों में प्रकाशित हुई है। हिंदी के प्रचार-प्रसार में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुणे प्रवास के दौरान महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।
इस अवसर पर प्रदीप निफाडकर, डॉ. रमेश गुप्त ‘मिलन’, डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, सुमित पॉल, इंदिरा शबनम, स्वरांगी साने, आशीष मुजुमदार, बंडोपंत पाटील, जयश्री पाटील, अनिता निफाडकर, विजय रणदिवे, दिलीप कुमार दर्श सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
