अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा संगोष्ठी एवं अन्तराष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मलेन का फ्रैंकफर्ट, जर्मनी में आयोजन


22 अगस्त 2026, जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में वैश्विक हिन्दी परिवार, वैश्विक हिंदीशाला संस्थान (जर्मनी), वैश्विक भाषा, कला एवं संस्कृति संगठन (GLAC, यूरोप) , सेवा इंटरनेशनल(जर्मनी), भारतीय भाषा मंच , वैश्विक हिंदीशाला संस्थान (जर्मनी) के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा संगोष्ठी एवं अन्तराष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मलेन आयोजित किया गया।
दो सत्रों में आयोजित इस संपूर्ण अधिवेशन में भारतीय वाणिज्यिक दूतावास फ्रैंकफर्ट के श्री भूपेन्द्र सिंह निखुरपा जी Consul (Commerce & Political) Frankfurt Consulate , Govt. Of India की उपस्थिति विशेष थी । इसमें नीदरलैंड, बेल्जियम, इंग्लैंड एवं जर्मनी के विभिन्न शहरों के कवियों, शिक्षाविदों, संस्कृतकर्मियों, शिक्षकों, साहित्यसाधकों ने प्रतिभागिता की।
प्रथम सत्र : अन्तराष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मलेन
प्रथम सत्र हिंदी , तमिल, तेलगु, मराठी, मलयालम, कन्नड़, पंजाबी आदि भाषाओं की सुंदर कविताओं को समर्पित रहा। जिसका संचालन डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना ने किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ श्री राहुल नारायण (आयोजक सदस्य ) ने अपने स्वागत भाषण से किया।
दीप प्रज्ज्वलन प्रथम सत्र के अध्यक्ष डॉ. पद्मेश गुप्त (संरक्षक, वैश्विक हिन्दी परिवार , लन्दन ), मुख्य अतिथि श्री कपिल कुमार (सह – संस्थापक GLAC,बेल्जियम), विशिष्ट अतिथि श्री अरुण माहेश्वरी (अध्यक्ष : वाणी प्रकाशन भारत), श्री रमेश शर्मा ( KVM मेंबर एवं सोशल एक्टिविस्ट, जर्मनी) एवं श्री राकेश भटनागर ( पूर्व अध्यक्ष HCC e.V जर्मनी ), डॉ. जवाहर कर्णावत ( निदेशक प्रवासी भारतीय भाषा एवं शोध केंद्र, भारत) द्वारा किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ अद्वैत ए. बावडेकर ने सुमधुर स्वर में “असतो मां सदगमय” मंत्र का पाठ किया।
कवि सम्मेलन के विधिवत प्रारम्भ से पूर्व श्री अतुल कोठारी जी ( संरक्षक : भारतीय भाषा मंच ) एवं श्री श्याम परांडे जी (ग्लोबल कॉर्डिनेटर एवं सचिव : सेवा इंटरनेशनल) एवं संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री संतोष तनेजा जी के वीडियो शुभकामना संदेशों को डिजिटल माध्यम से दिखाया गया। उन्होंने अपने संदेशों में कहा भारतीय भाषाओं को हमें अपनी भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना होगा, साथ ही कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उन्होंने कहा ”जर्मनी में एक ही मंच पर भारतीय भाषाओं का एक साथ एकत्र होना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है।”
इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ पद्मेश गुप्ता ने कहा भारतीय भाषाएं अपने आप में अत्यंत समृद्ध है जरूरत बस एक जुट होकर एक साथ उनके संवर्धन के लिए कार्य करने की है। जिसका उदाहरण आज का ये सम्मेलन है।
प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि कपिल कुमार ने कहा ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन भारतीय भाषाओं को विदेशों में और भी समृद्ध करेंगे, हम भविष्य में भी एक साथ ऐसे आयोजन करते रहेंगे।
वाणी प्रकाशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी जी ने कहा साहित्य एवं शिक्षण के क्षेत्र में प्रवासियों का योगदान महत्वपूर्ण है। वाणी प्रकाशन प्रवासी लेखकों की रचनाओं के प्रकाशन में यथा संभव सहयोग करेगा।
श्री रमेश शर्मा ने कहा जर्मनी में भारतीय भाषाओं को समर्पित यह बहुभाषी कवि सम्मेलन एवं शैक्षणिक सत्र निश्चित ही जर्मनी में भारतीय भाषाओं के उन्नयन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने इस आयोजन के लिये प्रेरणा के रूप में अनिल जोशी का विशेष आभार किया । श्री राकेश भटनागर ने कहा साहित्य के क्षेत्र में एक ही मंच पर विभिन्न भाषाओं को अपने विचार एवं कविताओं को साझा करते देखना सुखद है, ऐसे सार्थक आयोजन भावी पीढ़ी को भारत की भाषाओं, साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ने में महती भूमिका का निर्वाह करेंगे।
कार्यक्रम में लन्दन, यू के से डॉ. पद्मेश गुप्त , तितिक्षा शाह, भारत से अनिल जोशी, बेल्जियम से कपिल कुमार,नीदरलैंड से विश्वास दुबे, मनीष पांडेय ‘मनु’, अश्विनी केगांवकर ने जहां अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियोंसे सभी के मन को मोह लिया, वहीं जर्मनी से शेफाली गुप्ता, रश्मि त्रिवेदी, पाँखुरी भटनागर, अंजू राय, डॉ शिप्रा शिल्पी (हिंदी) ने अपनी रचनाओं के सशक्त पाठ से दर्शकों को मंत्र मुग्ध कर दिया।
वही कुलदीप मुल्तानी (पंजाबी), शोभा चौहान (कन्नड़), अद्वैत अमोल बाडवेकर एवं शिल्पा गडमडे-मुळे(मराठी). श्री निवास रामकृष्णा प्रतापा (तेलगु), सौंदर्यराजू गोविंदराजू, (तमिल), आदि ने अपनी संवेदनशील रचनाओं से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी।
इस अवसर पर आईसेक्ट पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित डॉ शिप्रा शिल्पी सक्सेना के संपादन में प्रकाशित ‘जर्मनी की चयनित रचनाएं’ एवं श्री विश्वास दुबे की पुस्तक “दिल से दिल तक” का लोकार्पण गणमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। डॉ जवाहर कर्णावत एवं मनीष पांडेय मनु ने पुस्तक पर क्रमशः अपनी अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की।
प्रथम सत्र का औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन आयोजक समिति की सदस्य चित्रा अग्रवाल जी ने किया।
