दिन विशेष अनुवाद में “आहुति” की नेपाली कविता का “डॉ.तुलसी छेत्री” द्वारा हिन्दी अनुवाद

Tulsi kshetri

डॉ. तुलसी छेत्री
एम ए,एमफिल,पीएचडी
गुवाहाटी असम।

हिंदी कविताओं का एकल संग्रह ‘रजस्वला शहर'(2023) एवं अनुभूति,अनुकृति,इनसे हैं हम (साझा काव्य संग्रह),पूर्वागिणी (साझा कहानी संग्रह)प्रकाशित।
 कई पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त ।

Email id: tulsi.chhetry@yahoo.com

“मैं काला हूँ” – डॉ.तुलसी छेत्री

मैं काला हूँ पर मैं अंधेरा नहीं हूँ
अंधेरे का तो कोई रंग ही नहीं होता।
मैं रंगीन हूँ बेरंग नहीं,
अंधेरे का तो कोई रंग ही नहीं होता!
मैं मॉनसून के बादलों जैसा काला हूँ,
उससे भी कहीं अधिक गहरा गहरा
मैं तुम्हारे सिर के बालों जैसा काला हूँ।
उससे भी कहीं अधिक गहरा गहरा
उजाले में भाग जाए, मैं वह अंधेरा हूँ ही नहीं
रंगीन हूँ मैं रंगीन, काले रंग की रंगत में रंगीन !
मैं काला हूँ पर मैं अंधेरा हूँ ही नहीं ।
तुम गोरे हो मेरे चमकीले दाँतों की मानिंद—
उससे भी कहीं अधिक सफ़ेद सफ़ेद
गोरे हो किसी चमकते पत्थर की तरह—
उससे भी कहीं अधिक सफ़ेद सफ़ेद
अंधेरे में गुम हो जाने वाला, तुम्हारा रंग उजला है ही नहीं।
रंगीन हो केवल रंगीन, तुम गोरे रंग की रंगत में
रंगीन !
तुम गोरे हो, लेकिन तुम उजले हो ही नहीं ।
मैं काला हूँ……….

मूल रचना: “म कालो छु” – आहुति

म कालो छु तर म अध्यारो होइन
अध्यारोको त कुनै रङ्गै हुँदैन
म रंगीन छु रंगहीन होइन
अध्यारोको त कुनै रङ्गै हुँदैन !
कालो छु वर्षा यामको बादल जस्तै
अझै त्योभन्दा गाढा गाढा
कालो छु शीरको तिम्रो केस जस्तै
अझै त्योभन्दा गाढा गाढा
उज्यालोमा भागिजाने म त्यो अध्यारो हुँदै होइन
रंगीन हुँ म रंगीन म कालो रंगको रंगीन !
म कालो छु तर म अध्यारो हुँदै होइन ।
तिमी गोरो छौ मेरा चम्किला दाँत जस्तै
अझै त्योभन्दा फिका फिका
गोरो छौ टल्किरहेको ढुंगा जस्तै
अझै त्योभन्दा फिका फिका
अध्यारोमा हराइजाने तिम्रो रंग उज्यालो हुँदै होइन
रंगीन हौ केवल रंगीन तिमी गोरो रंगको
रंगीन !
तिमी गोरो छौ तर उज्यालो हुँदै होइन ।
म कालो छु……….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate This Website »