‘विषुवत से कर्क तक’ – डॉ. आरती ‘लोकेश’ ( पुस्तक परिचय ) : सुनीता पाहूजा
एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना मात्र ही यात्रा नहीं कहलाता, बल्कि इसमें मनुष्य के अनुभवों, उसकी संवेदनाओं और दृष्टिकोण का विस्तार भी शामिल होता है। जब एक संवेदनशील…
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एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना मात्र ही यात्रा नहीं कहलाता, बल्कि इसमें मनुष्य के अनुभवों, उसकी संवेदनाओं और दृष्टिकोण का विस्तार भी शामिल होता है। जब एक संवेदनशील…
“अपने अपने बुर्ज ख़लीफ़ा“ (पुस्तक-परिचय) हर व्यक्ति के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण प्रतिमान होते हैं और वह उन तक पहुँचने की क्षमता का विकास किस प्रकार से कर सकता है…
सिने जगत के शब्दशिल्पी – देवमणि पांडेय, मुंबई मेरे मन में हमेशा उन फ़िल्म लेखकों के प्रति आदर का भाव रहा है जिनके हुनर ने मुझे प्रभावित किया। डॉ राही…
कौन देश को वासी, वेणु की डायरी – डॉ. जयशंकर यादव) प्रवासी भारतीय होना भारतीय समाज की महत्वाकांक्षा भी है,सपना भी है,कैरियर भी है और सब कुछ मिल जाने के…