पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत : स्मृति शेष — मनोज कुमार श्रीवास्तव
पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत : स्मृति शेष — मनोज कुमार श्रीवास्तव मनुष्य की मृत्यु का समाचार हमेशा एक ही बात नहीं कहता। कभी वह केवल यह बताता है कि एक शरीर…
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पद्मश्री कैलाशचंद्र पंत : स्मृति शेष — मनोज कुमार श्रीवास्तव मनुष्य की मृत्यु का समाचार हमेशा एक ही बात नहीं कहता। कभी वह केवल यह बताता है कि एक शरीर…
महादेवी वर्मा के रेखाचित्र ‘नीलकंठ’ में राष्ट्रीयता : डॉ. संध्या सिलावट वर्षा की पहली बूँद अभी धरती तक पहुँची भी नहीं है। दूर क्षितिज पर मेघों की गहरी परतें उमड़…
“रेडियो की भाषा” : निबंध इस्लामी दार्शनिक जलालुद्दीन रूमी ने अपनी मसनवी में एक कहानी बयान की है। एक आदमी ने चार अलग-अलग भाषा बोलने वालों को एक दिरहम दिया…
विचारों की भीड़ (वार्तालाप) -इन्द्रा (धीर) वड़ेहरा प्रश्न :याद आते हैं दादा जी के शब्द जो अक्सर दोहराया करते थे : “ध्यान करने बैठो, साधना होने लगेगी।” ध्यान और साधना…