आकांक्षा – (कविता)
आकांक्षा थक चले हैं पाँव, बाहें माँगती हैं अब सहारा।चहुँ दिशि जब देखती हूँ, काम बिखरा बहुत सारा॥ स्वप्नदर्शी मन मेरा, चाहता छू ले गगन को,मन की गति में वेग…
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आकांक्षा थक चले हैं पाँव, बाहें माँगती हैं अब सहारा।चहुँ दिशि जब देखती हूँ, काम बिखरा बहुत सारा॥ स्वप्नदर्शी मन मेरा, चाहता छू ले गगन को,मन की गति में वेग…
बीते ऐसे दिन बीते ऐसे दिन बहुतेरे।बीते दिन बीती रातों में,सुधियों के बढ़ते से घेरे।बीते ऐसे दिन बहुतेरे॥ बचपन के सुन्दर सपनों मेंछिपा हुआ सुखमय संसार।सहजप्राप्य अभिलाषाओं मेंभरा हुआ सुख-चैन…
बँधे-बँधे लोग खुला आकाश,दूर-दूर तक फैली धरती,स्वच्छंद समीरणऔर बँधे-बँधे लोग। भले-बुरे विभिन्न कार्य-कलाप करते हुये,अपने-अपने अहम् के सूत्र से बँधे लोग।अपने से सशक्त देखा,उनकी परिधियों सेस्वयं को भी बाँधने लगे…
समय का वरदान! बदल जाता समय-संग ही प्यार का प्रतिमान।समय का वरदान ! साथ था उनका अजाना, वह समय कितना सुहाना।एक अनजाने से पथ पर, युव पगों का संग उठना॥…
आजकल अधिकतर देशों में नारी पुरुष दोनों ही काम करते हैं। अतः उनके छोटे बच्चों के देख-रेख की समस्या भी दिनों दिन बढ़ रही है। टूटते हुए संयुक्त परिवारों ने…
स्मृति के तारों की झंकार के तीव्र स्वरों में एक स्वर अत्यन्त स्पष्टता से मुखरित हो रहा है। वह स्वर अत्यन्त पुराना तो है पर चितपरिचित भी। वह स्वर है…
जन्म-स्थान : कोलकाता, पश्चिम बंगाल। निवास : टोरोंटो (ओंटारियो) शिक्षा : बी.ए.(हिन्दी ऑनर्स) कोलकाता; ग्रेजुएशन रायर्सन यूनिवर्सिटी (एकाउंटिंग) प्रकाशन : कही अनकही (काव्य संग्रह) २०११, ’हिन्दी संवाद’, ’हिन्दी चेतना’, साहित्यकुंज…