Category: प्रवासी साहित्य

दिन विशेष विमर्श में एक पिता का अपनी पुत्री से अमर प्रेम पर आधारित विक्टर ह्यूगो की दो कविताओं का मनीष पाण्डेय द्वारा काव्यानुवाद

आज पढ़िए- महान फ्रांसीसी साहित्यकार विक्टर ह्यूगो की दो प्रसिद्ध कविताओं का सुन्दर काव्यानुवाद, जिसे किया है एम्स्टर्डम, नीदरलैंड में और अमेजोन में तकनीकी क्षेत्र में कार्यरत भारतीय मूल के…

दिन विशेष विमर्श में शालिनी वर्मा की कविताएँ

दिन विशेष विमर्श में शालिनी वर्मा की कविताएँ पिछले 25 वर्षों से दोहा, कतर में हिंदी लेखन, भाषा एवं साहित्य में सेवारत शालिनी वर्मा के लेखन में भारतीय संस्कृति और…

दिन विशेष विमर्श में डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे की कविता का पाठ

दिन विशेष विमर्श में डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे की कविता का पाठ डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पांडे भारत की बेटी, सूरीनाम की बहू एवं नीदरलैंड की स्थायी निवासी हैं…

कविता-विमर्श में ऋचा जैन की कविताएँ ‘फ़ोन पर माँ’ और ‘मैं राधा ही तो हूँ’

कविता-विमर्श में ऋचा जैन की कविताएँ ‘फ़ोन पर माँ’ और ‘मैं राधा ही तो हूँ’ लंदन की ऋचा जैन की कविताओं को पढ़ते हुए आप अनुभूत कर सकते हैं कि…

डॉ. पद्मेश गुप्त के आलेख ‘ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक’ पर विशेष विमर्श

ब्रिटेन में हिंदी कविता के साढ़े तीन दशक! : डॉ. पद्मेश गुप्त डॉ. पद्मेश गुप्त ब्रिटेन में बसे प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद्, उद्यमी और समाजसेवी हैं, जिन्होंने हिन्दी भाषा, शिक्षा और…

प्रगति टिपणीस की कविताएं

प्रगति टिपणीस की कविताएं कविता विमर्श में आज पढिए, मूलतः लखनऊ से प्रगति टिपणीस पिछले तीस से अधिक वर्षों से मॉस्को में निवास कर रही हैं। वे पेशे से इंजीनियर…

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना

कनाडा के वरिष्ठ साहित्यकार श्याम त्रिपाठी को श्रद्धांजलि : डॉ. शैलजा सक्सेना मृत्यु का सन्नाटा उन लोगों के लिए अधिक होता है जो पीछे रह जाते हैं। लोग कहते हैं…

पुरु और प्राची : दिव्या माथुर

पुरु और प्राची : दिव्या माथुर बद्रीनारायण ओसवाल का इकलौता वारिस था उनका बेटा, हरिनारायण जो एक अमेरिकन लड़की से शादी करके कैलिफ़ोर्निया में जा बसा था। हालांकि हरिनारायण की…

दिव्या माथुर का ‘मायाजाल’ प्रवासी जीवन, मानवीय संबंधों और आत्मसंघर्षों का बहुरंगी आख्यान : पूर्णिमा वर्मन

दिव्या माथुर का ‘मायाजाल’ प्रवासी जीवन, मानवीय संबंधों और आत्मसंघर्षों का बहुरंगी आख्यान : पूर्णिमा वर्मन शुभ संकल्प समूह-इंदौर का हार्दिक धन्यवाद, जिन्होंने मुझे दिव्या माथुर के कहानी-संग्रह ‘माया जाल’…

योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना

योग – एक जीवन-प्रणाली : डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि इसकी सार्थकता शारीरिक, मानसिक, आत्मिक संतुलन और चैतन्य की प्राप्ति…

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन 

मेरी प्रिय मित्र शैल जी ( संस्मरण ) : आशा बर्मन अभी भी विश्वास नहीं आता है कि शैल जी हमें छोड़कर चली गई हैं। मेरा और उनका साथ बहुत…

भावना ( कविता ) : डॉक्टर शिवनंदन यादव

भावना ( कविता ) : डॉक्टर शिवनंदन यादव मैंने पूछा कि भावना क्या है?कौन-सा रूप, धारणा क्या है?भावना दुलार, नेह, ममता है,मीरा का गीत, सूर-कविता है; भावना मिलन-सांझ, सरस प्रेम-पाती…

कविता अनुवाद : “टू माय डॉटर “- कवि: हेइके एन. सिम्स : “मेरी बेटी के लिए”- आशा बर्मन 

कविता अनुवाद : “टू माय डॉटर “- कवि: हेइके एन. सिम्स : “मेरी बेटी के लिए”- आशा बर्मन मेरी बेटी के लिए मेरी बेटी ,तेरी ओर देखती हूँ,और स्वयं से…

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

बूढ़ी यादें ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना याद आ रही तेरी बेटादिन में ही अँधियारा छायाआँखें अब कमज़ोर हो गईं,सही लग रहा मैला-मैला॥ तू अपने घर उलझा है,पर…

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

पिछली रोटी ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना उसने कभी नहीं दीपिछली रोटीअपने पति और बच्चों को,….ख़ुद ली…!! जब भूलने लगी अपना होना,तो याद आयामाँ ने भी नहीं दी…

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना

दो लड़कियाँ ( कविता ) : डॉ. शैलजा सक्सेना दो –दो लड़कियाँ रहती हैं मेरे भीतर!एक वो, जो पैदा हुई थीगली के कोने वाले घर में जहाँ सौर के बाहर…

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षक – डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे

प्रकृति, संवेदना और मानवता का काव्यात्मक घोष – ”धरती ने भिजवाई पाती“ : समीक्षा साहित्य जब केवल शब्दों का विन्यास न रहकर संवेदना का सजीव स्वर बन जाता है, तब…

“धरती ने भिजवाई पाती” : संगीता चौबे ‘पंखुड़ी’

“धरती ने भिजवाई पाती” : ( कविता ) धरती ने भिजवाई पातीजिसमें पीड़ा और उदासीझर झर उसके आँसू बहतेतेज गति से तरु जब कटते…. सुनो मनुज! अब मेरी गाथाकब तक…

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

सरकारी तख्ता (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन क्या आप जानते हैं कि सरकार का तख्ता कैसे उलटा जाता है? संभव है, आप कभी इस प्रकार का कार्य संपन्न करने के…

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन

रिश्वतखोर लिमिटेड (तुर्की व्यंग्य) : अजीज नेसिन जिस विभाग के कर्मचारियों को रिश्वत खाने की बीमारी लग जाए तो वे उससे कभी मुक्त नहीं होना चाहते हैं। और उसके राह…

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