भारतीय भाषाओं को लाने के लिए पाठ्यपुस्तकों को द्विभाषी करना होगा

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं भारतीय भाषा मंच के संयुक्त तत्वाधान में भारतीय भाषा विचार समूह की राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी (शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के स्थापना दिवस पर) ‘शिक्षा में भारतीयता और भारतीय भाषाएं विषय पर दिनांक 2 जुलाई 2026 को आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हैं डॉक्टर समुद्रगुप्त कुलाधिपति नागालैंड विश्वविद्यालय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वर्ष 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद भारतीय भाषाओं एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि हम पूर्वोत्तर में भारतीय भाषा में शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं वहां 200 भाषाएं हैं लेकिन 10 अथवा 12 भाषाओं की लिपि ही प्रस्तुत की हुई है इतने वर्षों में हमारी प्रज्ञा और परंपरा की हानि हुई है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय श्री मनोज श्रीवास्तव जी मुख्य चुनाव आयुक्त एवं भाषाविद ने अपने विस्तृत एवं सारगर्भित वक्तव्य में शिक्षा में भारतीयता को स्थापित करने के प्रयास पर जोर दिया उन्होंने विज्ञान संकाय में भारतीय वैज्ञानिकों एवं चिंतकों के योगदान को समुचित स्थान देने का आग्रह भी किया। अपने वक्तव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार करते हुए शल्य चिकित्सा, शून्य की खोज के साथ आर्यभट्ट वराहमिहिर और भास्कराचार्य के सिद्धांत का उल्लेख किया। उन्होंने पारिस्थितिकी की प्रणालियों की महत्ता की चर्चा की साथ ही भारतीय ज्ञान निर्माण की पद्धतियों को शिक्षा का अंग बनाने तथा विद्यार्थियों के गणितीय कौशल के साथ भारतीय गणितीय परंपरा से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। आपने कहा कि भारतीय भाषाओं में परस्पर विरोधी पक्ष हैं, एक पक्ष अंग्रेजी का है तो दूसरा पक्ष भारतीय भाषाओं को संस्कृत से जोड़ रहा है। भाषा में विकेंदीकरण की प्रक्रिया अपनाना चाहिए जिससे तकनीकी शब्द को सीधे अपना लिया जाए उन्होंने तमिलनाडु में तमिल भाषा में तकनीकी शब्द रखें जाने की बात कहीं, साथ ही पाठ्य पुस्तकें द्विभाषी प्रारूप में तैयार करें पहले मातृभाषा में फिर अंग्रेजी भाषा में रखे, ये ग्रामीण क्षेत्र की छात्रों के लिए आसान होगा। हर विश्वविद्यालय में भाषा तकनीकी सहायता केंद्र स्थापित हो साथ ही शोध में अनुभवी निर्देशक की कमी होने के कारण एक अंतर विश्वविद्यालयीन मार्गदर्शन शोध पीठ की स्थापना की जाए। दक्षिण कोरिया, जापान, इजरायल और फिनलैंड आदि देश ने अपनी मातृभाषा में तकनीकी शब्दावली का प्रयोग कर देश की उन्नति और विकास में किस प्रकार सहायक हुई इत्यादि की चर्चा की। बहुभाषिकता कक्षा में स्वाभाविक रूप से स्थापित की जाए। कौशल विकास में अंग्रेजी की शब्दावली बाधक होती है जिसके कारण अनुपस्थित और ड्रॉप आउट की संख्या अधिक होती है छात्रों पर कॉग्निटिव भार न पड़े इस हेतु उन्हें क्षेत्रीय भाषाओं पर मौलिक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाए। पुस्तकें अनूदित ना हो क्योंकि भाषा की अपनी संस्कृति और अपना मुहावरा होता है। उन्होंने न्याय एवं तर्कशास्त्र के अध्ययन में पश्चिमी चिंतन के साथ-साथ भारतीय आचार्यों विशेषकर महर्षि गौतम के न्याय सूत्रों एवं भारतीय तर्क पद्धति को समुचित स्थान देने पर बल दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा एवं शोध में मातृभाषा के उपयोग को बढ़ावा देने में आई टी आई जैसे व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में मातृभाषा को अनिवार्य बनाने तथा थिंकिंग अलाउड जैसी शिक्षण पद्धतियों को भी अपनाने का सुझाव दिया।

सानिध्य वक्तव्य में श्री ए विनोद राष्ट्रीय संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने भारतीय शिक्षा दर्शन, भारतीय भाषाओं में शिक्षा की मूल अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की शिक्षा की विषय वस्तु, शिक्षण पद्धति तथा उद्देश्य भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा का लक्ष्य केवल व्यक्ति का विकास नहीं अपितु राष्ट्र का समग्र विकास भी है। डॉ. राजेश्वर कुमार राष्ट्रीय संयोजक भारतीय भाषा मंच एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सहसंयोजक ने विषय की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि 2 जुलाई 2004 शिक्षा बचाओ आंदोलन का आरंभ हुआ इसीलिए इस दिवस को भारतीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया गया। उन्होंने शिक्षा में शिक्षक की मूलभूत भूमिका पर प्रकाश डाला साथ ही यह भी कहा कि भारतीयता का बोध, भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से विकसित किया जा सकता है। पहले के पाठ्यक्रम में अनेक विकृतियों और विसंगतियां थी जैसे हमारे देशभक्त क्रांतिकारियों को आतंकवादी कहना इतिहास के गलत तथ्य प्रस्तुत करना आदि। न्यास ने तेरह मामलों में न्यायालय के दरवाजे खटखटाएं और हमें न्याय मिला। इसे इस दिशा में प्रस्थान बिंदु माना जा सकता है 2015-16 में भारतीय भाषाओं के प्रति सकारात्मकता का वातावरण बना और भारतीय भाषियों के प्रति हीनता की ग्रंथि समाप्त हुई साथ ही तकनीकी बदलाव परिलक्षित हुआ। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय भाषा समिति और बी.के.एस. महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। विषय प्रवेश एवं स्वागत वक्तव्य देते हुए, श्री अनिल जोशी जी ( अध्यक्ष: वैश्विक हिन्दी परिवार ) ने- शिक्षा बचाओ आंदोलन से शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की विकास यात्रा को विस्तार से समझाते हुए भारतीय, भारतीयता,शिक्षा और भाषा के सहसंबंधों की गहराई से पड़ताल करने की बात कही। उन्होंने वर्तमान समय में शिक्षा में संस्कार,सोच और दृष्टि के साथ शिक्षा के मॉडल बनाने की महती आवश्यकता पर भी अपने विचार रखें राष्ट्रीय वेब संगोष्ठी सत्र का संचालन डॉ. सुधीर प्रताप सिंह, अध्यक्ष हिंदी विभाग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली ने किया आभार डॉ. गीता नायक भारतीय भाषाओं का जन जागरण,भारतीय भाषा मंच शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने दिया।
रिपोर्ट:— डॉ. गीता नायक
