दिन विशेष : शिक्षक दिवस – रजनी मिश्रा
5 सितंबर शिक्षक दिवस है ।अभी गुरु पूर्णिमा गई हैअब शिक्षक दिवस आने वाला है क्या अंतर है दोनों में?शिक्षक,शिक्षा देने वाला,गुरु ज्ञान देने वाला।आज की शिक्षा जिससे आप धनोपार्जन कर सकें,जीविका चला सकें ऐसा ज्ञान देने वाला शिक्षक और जीवन के गुर सिखाने वाले जो आपको जीवन जीने कला , कम से कम धन में भी जीवन जीने की कला,धैर्य,अनुशासन, अचानक आई मुसीबतों से निपटना व अन्य जीवन जीने की कलाओं से परिचित कराये वो गुरु है।पहले जो गुरु थे, शिक्षक थे वे भिन्न थे। शिक्षण उनका धंधा नहीं था, उनका आनंद था। शिक्षण जब धंधा बनता है उस दिन से शिक्षक गुरु होने की हैसियत खो देता है। उस दिन वह गुरु नहीं रह जाता, व्यवसायी हो जाता है।
असल में कभी सोचा ही नहीं गया था कि शिक्षण भी कभी धंधा बन सकता है, लेकिन अब बन गया है।उससे शिक्षक को बड़ा कष्ट भी है,उसको पीड़ा भी बहुत है। दुनिया में इतने विश्वविद्यालय हैं, हर वर्ष वे न मालूम कितने स्वर्ण-पदक बांटते हैं, कितनी पदवियां बांटते हैं, कितने लोग प्रथम आते हैं, फिर वे कहां खो जाते हैं, जिंदगी में उनका कुछ पता नहीं चलता है। जिंदगी पर उनकी छाप छूट ही नहीं पातीऔर जिंदगी पर जिनकी छाप छूट पाती है,अक्सर वे,वे लोग नहीं होते जो स्वर्ण-पदक धारी हैं।
एक लड़का एक दिन सुबह अपने घर आता है और अपनी माँ को उसने स्कूल की चिट्ठी दी। उसके हेडमास्टर ने लिखा है कि यह लड़का सीख नहीं सकता है,इसकी स्मृति बहुत कमजोर है। यह किसी परीक्षा में पास ही नहीं हो सकता। इसे कृपा करके स्कूल से उठा लें, हम थक गए हैं। उस लड़के का नाम उस वक्त किसी को पता नहीं था, वह तो बाद में पता चला। उसका नाम था थाॅमस अल्वा एडीसन। जिस आदमी ने बाद में एक हजार आविष्कार किए हैं।उनकी माँ ने एक अच्छी शिक्षक बनकर उनके अंदर छुपी प्रतिभा को पहचान कर उसे उभारकर एक आविष्कार बनने में मदद की।
गुरु वह है जो किसी की आत्मा को जगा दे, किसी के व्यक्तित्व को गरिमा दे दे। शिक्षक वह है जो पुरानी पीढ़ियों के द्वारा अर्जित सूचनाओं को, नई पीढ़ी तक पहुंचाने में वाहन का काम करता है और अपने परिवार की जरूरतों को पूरी करने के लिये धनोपार्जन करता है वो उसकी जरूरत है उसके बिना उसके जीवन की कल्पना भी नहीं । पहले गुरु हमेशा शिष्य से ज्यादा जानता था। आज ऐसा जरूरी नहीं है। आज संभावनाएं बिलकुल बदल गई हैं, क्योंकि बीस वर्ष में एक पीढ़ी बदलती है, और बीस वर्ष में नये ज्ञान का इतना विस्फोट हो जाता है कि बीस साल पहले जो शिक्षित हुआ था, वह अपने विद्यार्थी से पीछे रह जाता है।
