अंधभक्त इतने बुरे क्यों लगते हैं – (ब्लॉग)
अंधभक्त इतने बुरे क्यों लगते हैं डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम कृष्ण खुली आँख है। राधा बंद आँख। कृष्ण जानते हैं — मेरा जन्म क्यों हुआ है! यदा यदा हि धर्मस्य……वे…
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अंधभक्त इतने बुरे क्यों लगते हैं डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम कृष्ण खुली आँख है। राधा बंद आँख। कृष्ण जानते हैं — मेरा जन्म क्यों हुआ है! यदा यदा हि धर्मस्य……वे…
हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…
जिला अधिकारी ने मेकअप क्यों नहीं किया? डॉ महादेव एस कोलूर मलप्पुरम (केरल) की जिला अधिकारी सुश्री रानी सोयामोय कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ बातचीत कर रही थीं। केरल राज्य…
जोधपुर और जैसलमेर की सैर अनीता वर्मा मुझे हमेशा से लगता रहा है कि मैं ना जाने कितने जन्मों से यायावर हूँ। चलते रहने की इच्छा, निरन्तरता और मेरे साहस…
हम ‘ई’ से ईमान रखने नहीं, बेचने लगे स्वरांगी साने बचपन में याद करते थे ई, ईख की। बाद के वर्षों में उसे ईख कहना कब बंद हुआ, याद नहीं।…
वाह! द्वारका एक्सप्रेस वे डॉ. अशोक बत्रा, गुरुग्राम वाह द्वारका एक्सप्रेस मार्ग! तेरा भी जवाब नहीं!! तू फैशनपरी-सा है! कुछ भी पहने, कहीं भी पहने! अंटशंट! मैं अपनी शादी में…
‘इ’, देखन में छोटी लगे… स्वरांगी साने ‘इंगित पर तुम्हारे ही भीम ने अधर्म किया…’ धर्मवीर भारती लिखित ‘अंधा युग’ में गांधारी का यह विलाप ‘इ’ की इतनी ताकत को…
– डॉ महादेव एस कोलूर ***** वृक्ष आदमी ने वृक्ष से कहा —कुछ तो बोलो, यूँ क्यों चुप हो।वृक्ष मुस्कुराया,पत्तों की सरसराहट में बोला —“जिन्होंने सब कुछ खोकर भी दिया,वो…
राय कृष्णदास रजनीकंत शुक्ल राय कृष्णदास का जन्म 13 नबंवर सन 1892 ई. को वाराणसी में हुआ था। वे कहानी सम्राट प्रेमचन्द के समकालीन कहानीकार और गद्य गीत लेखक थे।…
मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति रजनीकांत शुक्ल विगत वर्ष आज के ही दिन देश के प्रसिद्ध मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति का कोरोना के चलते पैसठ वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था।…
मुकम्मल इश्क की अधूरी दास्तान दिनेश कुमार माली, तालचेर, ओड़िशा आज शाम यानि 10.11.2025 को जब मैं युवा लेखक दिनेश कुशवाहा की ‘मुकम्मल इश्क़ की अधूरी दास्तान’ उपन्यास पर आलोचनात्मक…
डॉ. मंजु गुप्ता ***** फूल की ज़िद बाल हठराज हठत्रिया हठसारे संसार में प्रसिद्ध हैंपर फूल की ज़िद की अभी तक अनदेखी हैइस ओर किसी की दृष्टि ही नहीं गईहमने…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 🪷 भानु नित्य भोर में 🪷 भानु नित्य भोर में रश्मियाँ प्रसारता।भृंग बाग में सदा धुन मधुर सँवारता॥पेड़ नित्य झूमते बाँह नित पसारते।पुष्प…
डॉ॰ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश 🌸 सत्कर्म के डगर पर 🌸 (दिग्पाल/ मृदुगति छंद) सत्कर्म के डगर पर, सुविचार हो हमारा।सद्भाव सत्य संबल, सन्मार्ग हो सहारा॥मधुरिम सदैव वाणी,…
आह से ही तो उपजा था पहला गान स्वरांगी साने आषाढ़ के किसी दिन बादल बरसे पर हुआ कुछ ऐसा कि वाह न निकली और मुँह से आह निकल गई!…
कालिदास की कला और सौन्दर्य दृष्टि नर्मदा प्रसाद उपाध्याय किसी गीत की लय का, दीप्तिमान लौ में ढलना स्वयं कला का कालिदास हो जाना है। कालिदास इसी अलौकिक चमत्कार के…
बात छोटी सी नोरिन शर्मा आज शीतल और वरुण की पच्चीसवीं शादी की सालगिरह है। वरुण ने न तो कभी जन्मदिन मनाया और न ही कभी शादी की सालगिरह…! अंग्रेज़ों…
‘अ’ से शुरू हुई एक अधूरी यात्रा स्वरांगी साने अभी उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी, बात क्या, जो वह कह रही थी, उतना शब्द भी पूरा नहीं…
विवेक रंजन चतुर्वेदी वरिष्ठ व्यंग्यकार, स्वतंत्र लेखक (हिंदी व अंग्रेजी) २८ जुलाई १९५९ में मण्डला के एक साहित्यिक परिवार में जन्म। माँ – स्व दयावती श्रीवास्तव (सेवा निवृत प्राचार्या) पिता…
पहचाना आप ने? विवेक रंजन श्रीवास्तव पहचाना आप ने? अरे कैसी बात करते हैं, आप भी! संकोच में ऐसा कह चुकने के बाद, वे बातों बातों में वह सूत्र ढूंढते…