Category: भारतीय रचनाकार

दिन विशेष कविता : यह करवा चौथ याद आएगा – स्मृति आदित्य

दिन विशेष कविता : यह करवा चौथ याद आएगा – स्मृति आदित्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सिनेमा विभाग में एडजंक्ट प्रोफ़ेसर हैं। उनकी यह कामकाजी स्त्री…

दिन विशेष कविता : पथिक का पाथेय – नवनीत सेमवाल

दिन विशेष कविता : पथिक का पाथेय – नवनीत सेमवाल (छंद- हरिगीतिका)गंतव्य पथ के आशावान, भाग्य सब कल्पित हैं।श्रांत्यार्थ प्रतिज्ञाबद्ध रहना, यह स्वयं का हित है।ज्यों कालचक्र रहता सदा ही,…

दिन विशेष कहानी : जाको राखे साईंया.. – डॉ. पद्मावती

दिन विशेष कहानी : जाको राखे साईंया.. – डॉ. पद्मावती • लेखिका : डॉ. पद्मावती,• पदनाम: सहायक आचार्य, हिंदी विभागमहाविद्यालय का नाम: एस. आर. एम. इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजीस्थान:…

दिन विशेष कहानी : “जी पिता जी” – डॉ. सत्‍येंद्र सिंह

दिन विशेष कहानी : “जी पिता जी” – डॉ. सत्‍येंद्र सिंह बाबू श्‍याम लाल को अपनी बहू का बाँई ओर का ओठ काटकर आँख नचाना भूलते नहीं भूलता। जब भी…

दिन विशेष कथेतर : हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय द्वारा समीक्षा

दिन विशेष कथेतर : हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय द्वारा समीक्षा डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय ने कथाकार हरिप्रकाश राठी के उपन्यास ‘रमंते तत्र देवता’ की…

दिन विशेष व्यंग्य : “योर सिक्स,माई नाईन” – दिलीप कुमार

दिन विशेष व्यंग्य : “योर सिक्स,माई नाईन” – दिलीप कुमार तब के अभिनेता और अब के साबुन – मंजन के सबसे बड़े विक्रय प्रतिनिधि अमिताभ बच्चन की बहुत साल पहले…

दिन विशेष : महाकवि सुब्रमण्यम भारती की तमिल कविता का जमुना कृष्णराज द्वारा हिंदी अनुवाद

दिन विशेष : महाकवि सुब्रमण्यम भारती की तमिल कविता का जमुना कृष्णराज द्वारा हिंदी अनुवाद क्या तुमने माना – जमुना कृष्णराज क्या तुमने माना किदूर-दूर भटक, पेट पालबेकार की बातें…

दिन विशेष कविता : “पुण्य-पश्चाताप” – ऋतिका ‘ऋतु’

दिन विशेष कविता : “पुण्य-पश्चाताप” – ऋतिका ‘ऋतु’ ऋतिका ‘ऋतु’ नाम से जानी जाती नोएडा की ऋतिका यादव का पहला काव्य संग्रह वर्ष 2021 में आया था। अंग में, प्रत्यंग…

दिन विशेष कविता में डॉ. निधि अग्रवाल की कविताएँ

दिन विशेष कविता में डॉ. निधि अग्रवाल की कविताएँ १. स्थायी पता कोलाहल भरी दुनिया मेंकैसे सुन ली मैंने एक धड़कनआश्चर्यों से भरे संसार मेंतुम्हारी सहजता पर हीजा कर रुकी…

दिन विशेष विजयादशमी कविता – “विजयादशमी : रावण बाहर भी है, भीतर भी है!” – प्रीति साहू

दिन विशेष विजयादशमी कविता – “विजयादशमी : रावण बाहर भी है, भीतर भी है!” – प्रीति साहू आज फिर विजयादशमी आई है,फिर सत्य ने विजय की अलख जगाई है।फिर जलेंगे…

दिन विशेष कहानी : “गहरे तालाब की विरासत” – अलका सिन्हा

दिन विशेष कहानी : “गहरे तालाब की विरासत” – अलका सिन्हा कविता की अंतिम पंक्ति तक आते-आते सारा रूपक स्पष्ट हो गया – “तेरा अपराधी हूँ मेरी कविता, जो लिखा…

दिन विशेष लघुकथा में बलराम अग्रवाल की लघुकथाएँ

दिन विशेष लघुकथा में बलराम अग्रवाल की लघुकथाएँ १. “एक असन्तुष्ट से बातचीत” जैसे ही कार उसके नजदीक से गुजरती, भौंकते हुए वह आदतन-सा उसके साथ दौड़ पड़ता। आखिरकार, एक…

अव्यक्त को व्यक्त करने की क्षमता है, अनिल प्रभा में : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र

अव्यक्त को व्यक्त करने की क्षमता है, अनिल प्रभा में : डॉ. मनोज मोक्षेंद्र समीक्षित पुस्तक: “शिवना कथा सप्तक : अनिल प्रभा कुमार’प्रकाशक : शिवना प्रकाशनविधा : कहानीकथाकार : अनिल…

दिन विशेष : राष्ट्रकवि कुवेम्पु की कन्नड़ कविता ‘आगे बढ़ो, का डॉ. मैथिली पी. राव द्वारा हिंदी अनुवाद

दिन विशेष : राष्ट्रकवि कुवेम्पु की कन्नड़ कविता ‘आगे बढ़ो, का डॉ. मैथिली पी. राव द्वारा हिंदी अनुवाद आगे बढ़ो – डॉ. मैथिली पी. राव आगे बढ़ो, आगे बढ़ो,तोड़कर बाधाएँ…

दिन विशेष व्यंग्य : अम्मी की दुआओं में – डॉ. रमेश यादव

दिन विशेष व्यंग्य : अम्मी की दुआओं में – डॉ. रमेश यादव बरेली रेलवे स्टेशन के बाहर वह बड़े दार्शनिक अंदाज़ में बैठा था, जैसे भारतीय रेलवे की देरी और…

दिन विशेष कविता : “स्मृतियों का उजास” – दिब्येंदु कर्मकार

दिन विशेष कविता : “स्मृतियों का उजास” – दिब्येंदु कर्मकार सायक* था सदा मौन, अकेला, निराला,दफ़्तर में बीते वर्षों का जाला।न बोला अधिक, न किसी से मिला,जीवन का पथ वह…

दिन विशेष कविता : बदरा – डॉ. अर्जुन गुप्ता

दिन विशेष कविता : बदरा – डॉ. अर्जुन गुप्ता साज सवँर के बदरा आएसाज सवँर के बदरा आए,पाहुन बन कर आज।आगे-आगे हवा मचलती,करे खूब आवाज॥बंद खिड़कियाँ दर दरवाजे,खुले आज हरओर।पाहुन…

दिन विशेष कहानी : नचनिया – डॉ. रेनू यादव

दिन विशेष कहानी : नचनिया – डॉ. रेनू यादव डॉ. रेनू यादव की यह कहानी लोमहर्षक है. इस कहानी में एक नचनिया (नृत्यांगना) के इर्द-गिर्द कथानक के ताने-बाने को बुना…

नाना पाटेकर : स्मृतियों में जीवंत अभिनय की अमिट छाप – मनोज कुमार श्रीवास्तव

नाना पाटेकर : स्मृतियों में जीवंत अभिनय की अमिट छाप – मनोज कुमार श्रीवास्तव नाना पाटेकर गुस्सा नहीं निभाते थे। वे उस आदमी को निभाते थे जिसने गुस्से का हिसाब…

हिंदी के घर में अंग्रेज़ी का भविष्य : हितेन्द्र पटेल

तेज़ी बच्चन, प्रकाशवती पाल और स्वतंत्र भारत की व्यावहारिक बुद्धि प्रभात रंजन ने हाल ही में हरिवंशराय बच्चन से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग साझा किया। इस तरह की छोटी-छोटी ऐतिहासिक…

Translate This Website »