
विश्व रंग 2025 आरंभ मुंबई का भव्य शुभारंभ विश्व रंग फाउंडेशन, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में स्थित ग्रीन टेक्नोलॉजी सभागार में पूर्ण भव्यता से आयोजित किया गया। विश्व रंग आरंभ मुंबई का शुभारंभ *मंगलाचरण* से करते हुए सर्वप्रथम डॉ. सुरुचि मोहता, सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका द्वारा मुंबई के ग्राम देवता सिद्धि विनायक की स्तुति में बहुत ही सुंदर भजन प्रस्तुत किया। उन्होंने तुलसीदास रचित पद ‘सदा सदा मैं शरण तिहारो, तुम हो गरीबनवाज, रघुवर तुमको मेरी लाज’ की मनमोहक प्रस्तुति के साथ ही महात्मा गांधी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये, पीर पराई जाणे रे, की मधुर प्रस्तुति जगत कल्याण और वैश्विक सद्भावना को केंद्र में रखते हुए दी। इस अवसर पर श्री संतोष मिश्रा और श्री विनोद फड़के ने संयुक्त रूप से संगीतज्ञ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विश्व रंग ‘आरंभ’ मुंबई के मुख्य अतिथि डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, भारत सरकार एवं प्रख्यात चिंतक ने अपने उद्बोधन का शुभारंभ मराठी भाषा में करते हुए कहा कि ‘भारतीय भाषाओं में परस्परता और समन्वय’ वर्तमान की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत हैं। हमारी सभी भाषाएँ हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं। सभी को सम्मान देना जरूरी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हिंदी भाषा और भारतीय भाषाओं की प्रतिष्ठा को विश्व में स्थापित करना बहुत जरूरी है। भारतीय भाषाओं में भाषाई मिलावट को रोकना भी जरूरी है। सभी भारतीय भाषाएँ ज्ञान भाषा के रूप में स्थापित होना चाहिए। हिंदी के रोमन लिपि में प्रस्तुतीकरण के बजाए अंग्रेजी को देवनागरी में प्रस्तुत करना हिंदी के हित में बहुत आवश्यक है। शीघ्र ही भारतीय भाषा नीति का निर्माण होना भी बहुत आवश्यक है। इसके लिए भाषा विवेक की भी बहुत आवश्यकता है।
डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने आगे कहा कि लिखित और वाचिक परंपरा के साथ मल्टीमीडिया के प्रयोग के साथ हमारी भारतीय भाषाओं से बच्चों को बाल्यकाल से ही परिचय कराया जाना चाहिए। दक्षिणी विश्व में सांस्कृतिक एकता के आधार पहले से मौजूद है, हमें इसे वैश्विक सांस्कृतिक आधार के सेतु के रूप में विकसित करना चाहिए। विश्व रंग के वैश्विक प्रयासों से यह विश्वास के साथ कहता हूँ कि शीघ्र ही हिंदी भाषा संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकारिक भाषा घोषित होगी।
श्री संतोष चौबे, निदेशक – विश्व रंग एवं कुलाधिपति – रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल ने आरंभ समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह गर्व का विषय है कि ‘विश्व रंग’ टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के माध्यम से रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल ने संपूर्ण विश्व के भारतीय भाषा प्रेमियों, कलाकारों एवं साहित्य प्रेमियों को एक स्थान पर लाने का अभूतपूर्व सार्थक प्रयास किया है। विश्व रंग की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों में 65 से अधिक देशों के सैकड़ों रचनाकारों एवं हजारों लोगों ने रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराकर इसे अविस्मरणीय बनाया है। यह देश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी शिक्षण संस्थान (रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय) ने देश-विदेश के 100 से अधिक भाषा, कला, साहित्य, संस्कृति और शिक्षण संस्थानों को साथ लेकर अद्भुत रचनात्मक एवं सृजनात्मक संसार रचा है। वर्ष 2019 में विश्व रंग महोत्सव का प्रथम आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में किया गया था। वर्ष 2019 से 24 तक विश्व रंग के छः अविस्मरणीय संस्करणों का आयोजन वैश्विक स्तर पर किया गया है। विश्व रंग का छठा आयोजन मॉरीशस में 7 से 9 अगस्त 2024 को विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस में भव्य रूप से आयोजित किया गया था। हाल ही में 29–30 सितंबर को ‘विश्व रंग श्रीलंका –2025’ का वैश्विक संस्करण ‘स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, भारतीय उच्चायोग, कोलंबो, श्रीलंका’ में पूर्ण भव्यता के साथ आयोजित किया गया।

विश्व रंग 2025 ‘आरंभ’ का यह आयोजन इस बार मुंबई विश्वविद्यालय के सहयोग से दिनांक 13 एवं 14 नवंबर 2025 (गुरुवार–शुक्रवार) को ग्रीन टेक्नोलॉजी सभागार, मुंबई विश्वविद्यालय, कालानी परिसर, मुंबई (महाराष्ट्र) में पूर्ण भव्यता के साथ आयोजित हो रहा है।
विश्व रंग का मुख्य आयोजन रवीन्द्र भवन, भोपाल परिसर में 27 से 29 नवंबर 2025 तक पूर्ण भव्यता के साथ ही आयोजित होगा। इसमें देश–विदेश के प्रमुख विद्वानों, प्रवासी रचनाकारों, विचारकों और भाषाविदों की भागीदारी होगी।
यह बहुत खुशी की बात है कि इस वर्ष दुनिया के अनेक देशों जिनमें इजरायल, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, यूएई, श्रीलंका, चीन, इटली, तिब्बत, नेपाल, स्वीडन, अमेरिका, बेल्जियम, सिंगापुर, बहरीन, म्यांमार, यू.के., कनाडा, इंडोनेशिया, अर्मेनिया, भूटान, उज्बेकिस्तान, थाईलैंड, साइप्रस, नेपाल आदि शामिल हैं। भारत सहित इन देशों के एक हजार से अधिक प्रतिनिधि विश्व रंग में शामिल हो रहे हैं ।
विशिष्ट अतिथि – श्री कृष्ण प्रकाश, अपर पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक, फोर्स वन (महाराष्ट्र) ने कहा कि हमारी भाषाएँ शक्तिशाली है इसीलिये टिकी हुई है और विश्व के कई देशों में बोली जा रही है। हमें रचनात्मकता के साथ ही शक्तिशाली भी होना है। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय और विश्व रंग फाउंडेशन हिंदी और भारतीय भाषाओं के लिए वैश्विक स्तर पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। यह बहुत सराहनीय है। सभी भाषाएँ संप्रेषण और संवाद का माध्यम होती है लेकिन आज के आर्टीफिशियल इंटलीजेंस के दौर में इमोशनल इंटलीजेंस की भी बहुत जरूरत है।
डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, सह निदेशक विश्व रंग ने कहा कि युवाओं की भूमिका विश्व रंग में बहुत रचनात्मक रूप से होती है। युवाओं के रचनात्मक वैश्विक मंच के रूप में उभरा है विश्व रंग। विश्व रंग महोत्सव युवाओं में बहुत लोकप्रिय है। यहाँ युवाओं के लिए स्टार्टअप की बात होती है। ओटीटी प्लेटफार्म पर युवाओं की भूमिका, गीत, कविता, गजल, कहानी के रचनात्मक रूप से प्रस्तुतिकरण को लेकर इस बार महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए जाएँगे। विश्व रंग फाउंडेशन एक मिशन के रूप में कार्य कर रहा है। विश्व रंग का आरंभ मुंबई से हो रहा है यह गर्व की बात है।
इस अवसर पर डॉ. विजय सिंह कुलगुरु, स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल, डॉ. जवाहर कर्नावट, निदेशक, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र ने भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार व्यक्त किए।
विश्व रंग आरंभ के उद्घाटन समारोह का संचालन श्री विनय उपाध्याय, निदेशक टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र, भोपाल ने करते हुए विश्व रंग के सांस्कृतिक पक्ष पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र द्वारा विश्व रंग के अंतर्गत प्रकाशित 65 देशों में हिंदी की स्थिति का गहन अवलोकन करती महत्वपूर्ण पुस्तक ‘विश्व में हिंदी’ का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया। इसके साथ ही विश्व रंग के सभी संस्करणों को आकर्षक रूप में समेटे हुए विश्व रंग केटलॉग का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया।
डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय, विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, मुंबई विश्वविद्यालय ने आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर मुंबई सहित महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों और देशभर से सैकड़ों वरिष्ठ एवं युवा रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों आदि ने रचनात्मक भागीदारी की।
